वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर का मामला एक बार फिर पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

आवेदक ने कहा है  कि वे मूल संस्थापक स्वामी श्री हरि दास जी गोस्वामी के वंशज हैं और उनका परिवार सदियों पुरानी रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार 500 से अधिक सालों से मंदिर के मामलों का प्रबंधन कर रहा है.

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वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. कोर्ट से बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर विकास को लेकर दिए फैसले में संशोधन की मांग की गई है. कोर्ट सुनवाई को तैयार है और इस मामले में अगले हफ्ते सुनवाई होगी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में 15 मई के फैसले को संशोधित करने के लिए एक याचिका दायर की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार को श्री बांके बिहारी मंदिर से धन का उपयोग कॉरिडोर विकास के लिए मंदिर के आसपास 5 एकड़ भूमि अधिग्रहण करने की अनुमति दी गई थी हालांकि शर्त भी लगाई गई थी कि अधिग्रहित भूमि देवता के नाम पर पंजीकृत होगी.

आवेदक की ओर से सीनियर वकील अमित आनंद तिवारी ने CJI  बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की  पीठ के समक्ष उल्लेख किया कि आवेदक को पक्षकार बनाए बिना उक्त फैसला एकपक्षीय रूप से पारित किया गया था. CJI गवई ने कहा कि वो कल सुनवाई करेंगे. आवेदक देवेंद्र नाथ गोस्वामी के बारे में कहा गया है कि वे मंदिर के मामलों का प्रबंधन करते हैं और शेबैत की राजभोग शाखा से जुड़े हैं. आवेदक ने कहा है  कि वे मूल संस्थापक स्वामी श्री हरि दास जी गोस्वामी के वंशज हैं और उनका परिवार सदियों पुरानी रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार 500 से अधिक सालों से मंदिर के मामलों का प्रबंधन कर रहा है. उन्होंने कहा है कि अब राज्य के पास मंदिर के धन तक पहुंच है, जबकि मंदिर के मामलों और धन के प्रशासन और प्रबंधन का मुद्दा इलाहाबाद हाईकोर्ट  के समक्ष लंबित है.

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