- अहमदाबाद के नवताली की पोल के पास एक पुराना मकान अचानक भारी धमाके से धराशायी हो गया था
- मकान गिरने के बाद तीन लोग मलबे के नीचे दब गए और चारों ओर चीख-पुकार मच गई थी
- रेस्क्यू टीम ने धैर्य और मेहनत से मलबा हटाते हुए एक व्यक्ति के जीवित होने का पता लगाया
अहमदाबाद के घीकांटा की तंग गलियों में जब 'नवताली की पोल' के पास एक पुराना मकान ताश के पत्तों की तरह ढहा, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि धूल के गुबार के नीचे सांसे अब भी बाकी हैं. लेकिन कुदरत के करिश्मे और इंसानी जज्बे ने मिलकर मौत के जबड़े से एक जिंदगी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.
जब 'काल' बनकर गिरी इमारत
अहमदाबाद के बड़ी हमाम की पोल के पास स्थित यह रिहायशी इलाका अपनी पुरानी इमारतों के लिए जाना जाता है. अचानक एक जोरदार धमाके के साथ नवताली की पोल में एक मकान जमींदोज हो गया. देखते ही देखते तीन जिंदगियां मलबे के ढेर के नीचे गुम हो गई थीं. चारों तरफ चीख-पुकार और धूल का मंजर था.
जाको राखे साइयां...
रेस्क्यू ऑपरेशन का जो वीडियो सामने आया है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है. वीडियो की शुरुआत में वहां सिर्फ मिट्टी, ईंटें और लकड़ी का मलबा नजर आता है. ऊपर से देखने पर यह यकीन करना नामुमकिन लगता था कि इस भारी भरकम मलबे के नीचे कोई जीवित बच सकता है. लेकिन बचाव दल ने हार नहीं मानी.
वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे राहतकर्मी मलवा हटा रहे हैं. अचानक मलबे के बीच से एक हाथ हिलता हुआ दिखता है. यह वह पल था जिसने साबित कर दिया कि "जाको राखे साइयां, मार सके न कोय."
एक हैरान कर देने वाला 'पुनर्जन्म'
कड़ी मशक्कत के बाद जब उस व्यक्ति को मलबे की परतों के नीचे से निकाला गया, तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं. यह सिर्फ एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं था, बल्कि उम्मीद की जीत थी. मिट्टी में दबे उस व्यक्ति को जब सुरक्षित बाहर खींच लिया गया, तो वह मंजर किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था. बाद में इलाज के लिए पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया.
देवांग आचार्य की रिपोर्ट














