- केंद्र ने स्पष्ट किया कि US के साथ हुए व्यापार समझौते में किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है.
- कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर पूरी तरह संरक्षित रहेंगे और उनके हितों की रक्षा की जाएगी.
- भारत ऊर्जा खरीद में नागरिकों को प्राथमिकता देगा और प्रतिबंधित देशों से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा.
अमेरिका के साथ हाल ही में घोषित व्यापार समझौते को लेकर संसद के बाहर विपक्ष के प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार के सूत्रों ने साफ किया है कि किसानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है. किसानों से जुड़े कृषि और डेयरी जैसे सभी संवेदनशील सेक्टर पहले की तरह पूरी तरह संरक्षित रहेंगे.
सरकारी सूत्रों ने कहा कि विपक्ष का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है और यह समझौता भारत के आर्थिक हितों तथा निर्यात क्षमता को मजबूत करने वाला है.
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सरकारी सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया:
1. भारतीय किसानों के हितों पर कोई समझौता नहीं.
2. संवेदनशील डेयरी और कृषि क्षेत्रों की रक्षा की जाएगी.
3. भारत ऊर्जा खरीद में अपने नागरिकों को प्राथमिकता देना जारी रखेगा, बाजार मूल्य इसका निर्धारण करेंगे.
4. भारत प्रतिबंधित संस्थाओं से ऊर्जा खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है.
5. भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार अगले कुछ वर्षों में 500 अरब डॉलर की ओर '5 गुना' बढ़ेगा.
6. नए व्यापार समझौते से भारी आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे.
कच्चे तेल की खरीद पर भी सरकार ने दी सफाई
सूत्रों ने बताया कि भारत पहले की तरह ही दुनिया के उन देशों से कच्चा तेल खरीदेगा, जहां से खरीदने पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं है. वेनेज़ुएला पर जब पाबंदी थी, भारत ने वहां से तेल नहीं खरीदा. अब पाबंदी हट चुकी है, इसलिए बाजार भाव (रेट) के आधार पर खरीद जारी रहेगी.
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500 अरब डॉलर का आंकड़ा क्यों?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह आंकड़ा इसलिए आया है क्योंकि ट्रेड डील अनलॉक होने से व्यापार और निवेश दोनों बढ़ेंगे. अमेरिका से भारत आमतौर पर 40–50 अरब डॉलर का आयात करता है और लगभग उतना ही निवेश भारत में आता है. बड़े सौदे- जैसे एयक्राफ्ट, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और अन्य सेक्टर मिलकर यह 500 बिलियन डॉलर का प्रोजेक्शन बनाते हैं.
विपक्ष ने लगाया किसानों के हितों से समझौते का आरोप
संसद भवन के बाहर विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ टैरिफ डील में किसानों के हितों से समझौता किया गया है. सरकार ने किसानों, डेयरी सेक्टर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल दिया है. विपक्ष ने मांग की है कि सरकार संसद में डील की सभी शर्तों को पेश करे और यह स्पष्ट करे कि इसका कृषि क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा.
पीयूष गोयल टैरिफ डील के बारे में संसद में समझाएंगे
इस पर सरकार का कहना है कि कृषि‑डेयरी सेक्टर को किसी भी तरह का खतरा नहीं. संवेदनशील श्रेणियां पहले जैसी संरक्षित रहेंगी. यह डील भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करेगी. इसके साथ ही सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल आज लोकसभा में 3 बजे इस मुद्दे पर बोलेंगे और टैरिफ डील के बारे में सदन को विस्तार से बताएंगे.













