- अमेरिका ने पहली बार स्वीकार किया है कि ईरान ने उसके युद्धपोत USS Abraham Lincoln पर हमला किया है
- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने 100 से ज्यादा मिसाइलों से हमला किया
- गौरतलब है कि कि तेहरान ने दावा किया था कि उसने अमेरिकी युद्धपोत पर हमला किया है
अमेरिका की शान कहे जाने एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन पर ईरान ने 101 मिसाइलें दागी हैं. और ये बात खुद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कही है. ट्रंप ने पहली बार कबूल किया है कि ईरान ने यूएसएस अब्राहम को निशाना बनाया है. वैसे ईरान काफी बार ये बात कह चुका है. लेकिन अमेरिका की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी. ट्रंप ने बताया कि ईरान ने अब्राहम लिंकन पर 2-4 नहीं बल्कि 101 मिसाइलें दागी हैं.
सारी मिसाइलें समुंदर के हवाले कर दिया-ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक सारी ईरानी मिसाइलों को एक एक करके समुंदर में ही मार गिराया. ईरान का अमेरिकी कैरियर पर हमला करना बहुत बड़ी बात है. वजह अमेरिका दूसरा सबसे बड़ा एयरकाफ्ट कैरियर अकेले नही चलता है बल्कि उसे साथ और भी दूसरे युद्धपोत चलते हैं. इसे कैरियर बैटल ग्रुप कहा जाता है. और तो और इसमें केवल युद्धपोत ही नही साथ में सबमरीन भी होते हैं. अब्राहम लिंकन पर तो अकेले 80 से ज्यादा लड़ाकू विमान और अटैक हेलीकॉप्टर चौबीसों घंटे तैनात होते है. इसी पोत पर एफ-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान, EA-18G ग्राउलर, पांचवीं पीढ़ी का फाइटर एफ-35 और MH-60R हेलीकॉप्टर तैनात हैं. इससे भी बड़ी बात अब्राहम लिंकन के साथ चलने वाले इन सारे युद्धपोतों में ऐसे रडार लगे होते है जो किसी भी हमले को पल भर में नाकाम कर सकते है. ये ऐसे मिसाइल और रॉकेट से लैस होते है जो दुश्मन देश के हमले को उन तक पहुंचने पहले ही तहस-नहस कर देते है.
ईरान ने किया था दावा
ईरान की आईआरजीसी ने पहले दावा किया था कि उसके मिसाइल और ड्रोन ने अमेरिकी विमानवाहक पोत अब्राहम पर सटीक हमला किया है. उसके मिसाइल और ड्रोन के डर की वजह से अमेरिका अब्राहम लिंकन को स्टेट ऑफ होर्मूज से दूर लेकर गया. आईआरजीसी ने उस वक्त यहां तक कहा कि उसके हमले से अमेरिकी अब्राहम को नुकसान भी पहुंचा है. हालांकि उस वक्त अमेरिकी की सेन्ट्रल कमांड ने आईआरजीसी के दावे को झूठा करार दिया था. पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति का ताजा कबूलनामा बताता है कि अमेरिका पहले अब्राहम को लेकर झूठ बोल रहा था. इन्हीं सारी वजहों से एक बार फिर अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन चर्चा के केंद्र में है.
Photo Credit: USS Abraham Lincoln पर तैनात लड़ाकू विमान
क्यों खास है USS अब्राहम लिंकन?
यह विमानवाहक पोत परमाणु उर्जा से चलता है यानी यह लंबे समय कर ऑपरेशन कर पाने में सक्षम हैं. इसमें ऊर्जा के लिए न्यूक्लियर पावर का इस्तेमाल किया जाता है. ये 1989 में सेना में शामिल हुआ था. यह सबसे बड़े और अत्याधुनिक विमानवाहक पोतों में से एक माना जाता है. अमेरिका के 16 वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के नाम पर इस विमानवाहक पोत का नाम रखा गया है. यह अमेरिकी नौसेना के हमला करने वाले कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा हैं. यह अमेरिका में 9/11 आतंकी हमले के बाद अमेरिकी सेना के इराक, अफगानिस्तान और सीरिया जैसे सैन्य अभियानों का मुख्य हिस्सा रहा है. अमेरिका के ईरान पर 28 फरवरी को हमले करने के साथ ही यह उस इलाके में पहुंच गया था. इसको लेकर अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने कहा कि इसे मध्य पूर्व में क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के लिए तैनात किया गया है. अब्राहम लिंकन के साथ अमेरिका के तीन गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी शामिल हैं. ये हैं यूएसएस फ्रैंक ई पीटरसन जूनियर, यूएसएस स्प्रुएंस और यूएसएस माइकल मर्फी.
USS Abraham Lincoln पर तैनात सैनिक
USS अब्राहम लिंकन की खासियत
यूएसएस अब्राहम लिंकन की लंबाई लगभग 333 मीटर से थोड़ी कम है. इसकी अधिकतम चौड़ाई करीब 77 मीटर है. इसका वजन लगभग एक लाख टन है. इसमें करीब साढ़े पांच हजार नौसैनिक तैनात रहते हैं. यह करीब 56 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकता है. चूंकि यह परमाणु उर्जा से चलता है तो महीनों या सालों समंदर में ऑपरेशन कर सकता है. यह आधुनिकतम रडार और मिसाइल सिस्टम से लैस है. यह दुश्मन पर हवाई हमला करने के साथ साथ उसकी गतिविधियों पर नजर रख सकता है. इस विमानवाहक पोत को पहले भी कई बार अरब की खाड़ी और ओमान सागर में तैनात किया जा चुका है. ये कैरियर अमेरिकी नौसेना की ताकत का प्रतीक है. पर ईरानी मिसाइल का निशाना बनना कहीं न कहीं अमेरिका के सुपरपावर वाले तमगे पर चोट पहुंचाता है.
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