विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. यूजीसी मामले को लेकर कई अधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं, तो वहीं अब यूपी के बलिया में भी एक अधिकारी त्रिभुवन मैदान में कूद गए हैं. उनका कहना है कि जाति भेद ही समाप्त कर दिया जाए, जिससे कि सारे झगड़े समाप्त हो जाएं. जब झगड़े की जड़ ही नहीं रहेगी, तो झगड़ा ही नहीं रहेगा.
बलिया के अपर जिलाधिकारी त्रिभुवन, मुख्य राजस्व अधिकारी के पद पर तैनात हैं. ये गाने के माध्यम से संदेश दे रहे हैं. इनका कहना है कि जाति के भेद को समाप्त किये बिना देश आगे नहीं बढ़ सकता है. जब जाति ही नहीं रहेगी, तो संघर्ष किस बात का होगा. जाति भेद समाप्त कर दिया जाए, जिससे कि सारे झगड़े समाप्त हो जाएं.
इस्तीफा देने वाले नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कलेक्ट्रेट में धरना दिया
बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में सोमवार देर रात निलंबित कर दिया. आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. हालांकि, अग्निहोत्री ने कहा कि वह एक दिन पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं. उन्होंने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में धरना दिया और अपने खिलाफ एक सोची-समझी साजिश का आरोप लगाया. अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को पद से इस्तीफा दे दिया था, जिससे एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया.
अग्निहोत्री ने प्रथम अनुशासनहीनता की...
सोमवार देर रात जारी एक आदेश के अनुसार, अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया है और साथ ही उन्हें जिलाधिकारी शामली के कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है. उत्तर प्रदेश सरकार के नियुक्ति अनुभाग-सात से विशेष सचिव अन्नपूर्णा गर्ग के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि अग्निहोत्री ने प्रथम दृष्ट्या अनुशासनहीनता की है, जिसके कारण तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित किया गया है. आदेश में कहा गया है कि विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अग्निहोत्री के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए बरेली मंडल के आयुक्त बीएस चौधरी को जांच अधिकारी नामित किया जाता है. विशेष सचिव गर्ग ने बताया कि प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजा.
बता दें कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए 13 जनवरी, 2026 को प्रकाशित यूजीसी के नियमों में विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी दलों की स्थापना अनिवार्य की गई है, ताकि विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके.














