महाराष्ट्र की सियासत में 21 जून की तारीख बहुत मायने रखती है, खासकर उद्धव ठाकरे और उनकी सियासत के लिए. आज से चार साल पहले 2022 की 21 जून को ही उनकी पार्टी टूटी थी. न सिर्फ पार्टी टूटी थी, बल्कि उद्धव की सत्ता भी चली गई थी. अब 2026 की 21 जून को भी उनकी पार्टी लगभग टूट गई है. भले ही इसका औपचारिक ऐलान अब तक हुआ न हो.
एकनाथ शिंदे का 'ऑपरेशन टाइगर' सफल हो गया है. खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसका ऐलान किया. 'ऑपरेशन टाइगर' पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, 'यह ऑपरेशन सफल रहा है और संगठन की स्थिति बहुत अच्छी है. किसी को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है. जिन्हें आत्ममंथन करने की जरूरत है, उन्हें ऐसा करना चाहिए.'
वहीं, फडणवीस के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि वह अधूरे ऑपरेशन नहीं करते. उन्होंने कहा, 'जब भी मैं कोई ऑपरेशन शुरू करता हूं, तो उसे पूरा करता हूं. हमने यह पहले भी करके दिखाया है.' उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही आपको 'ब्रेकिंग न्यूज' मिलेगी.
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तो क्या टूट गई शिवसेना (यूबीटी)?
शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अटकलें कई दिनों से हैं. इसे 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया गया है. लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के 9 सांसद हैं, जिनमें से 6 बागी हो गए हैं और पाला बदलने की फिराक में हैं.
पार्टी के 9 में से 6 सांसद- संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर ने बगावत कर दी है.
सभी 6 सांसद 17 जून को दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे अटकलें तेज हो गईं कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में जा रहे हैं. रविवार को 6 में से 2 बागियों ने इस बात की पुष्टि कर दी कि वे शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं.
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उद्धव पर भारी पड़ गया एक और 21 जून
शिवसेना (यूबीटी) का टूटना उद्धव ठाकरे के लिए 4 साल में दूसरा बड़ा झटका है. वह इसलिए क्योकि इससे उनकी पार्टी और कमजोर हो गई. अब उनके पास लोकसभा में सिर्फ तीन सांसद बचेंगे.
चार साल पहले 21 जून 2022 को ही शिवसेना में पहली बड़ी बगावत हुई थी. हुआ ये था कि 21 जून को एकनाथ शिंदे अचानक गायब हो गए. उनसे संपर्क नहीं हो पाया. तब उस समय के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सभी विधायकों की बैठक बुलाई लेकिन एकनाथ शिंदे समेत 10-12 विधायक इसमें नहीं पहुंचे.
बाद में एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि उनके पास 40 विधायक हैं. अगले ही दिन 22 जून को एकनाथ शिंदे ने कहा कि वह अपने साथ 40 विधायकों को लेकर गुवाहाटी आ गए हैं. 23 जून को एकनाथ शिंदे को शिवसेना का नेता चुन लिया गया. एकनाथ शिंदे ने शिवसेना पर दावा ठोक दिया और दावा किया कि अब वही 'असली शिवसेना' हैं.
शिंदे को मनाने की सारी कोशिशें नाकाम रहीं. इस बीच देवेंद्र फडणवीस ने फ्लोर टेस्ट की मांग की. लेकिन 30 जून को फ्लोर टेस्ट से पहले ही उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद 30 जून को एकनाथ शिंदे की मदद से बीजेपी ने सरकार बना ली. इस सरकार में शिंदे मुख्यमंत्री और फडणवीस डिप्टी सीएम बने.
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फिर पार्टी भी चली गई
21 जून 2022 को हुई उस बगावत के कुछ महीनों बाद उद्धव ठाकरे के हाथ से पार्टी भी चली गई. 17 फरवरी 2023 को चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना को ही 'असली शिवसेना' माना. चुनाव आयोग ने अपने फैसले में कहा कि पार्टी का नाम और सिंबल 'धनुष तीर' शिंदे गुट के पास ही रहेगा.
चुनाव आयोग ने अपने 77 पन्नों के फैसले में कहा था कि शिवसेना के 67 विधायकों और विधान परिषद सदस्यों में से 40 शिंदे गुट के पास थे. संसद के दोनों सदनों के 22 में से 13 सांसद शिंदे गुट के पक्ष में थे. आयोग ने कहा कि 2019 के विधानसभा चुनाव में जीत कर 55 विधायकों के वोटों में से 76% शिंदे गुट और सिर्फ 23.5% वोट उद्धव गुट को मिले थे.
इसके बाद 10 जनवरी 2024 को महाराष्ट्र विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर राहुल नार्वेकर ने भी शिंदे गुट को ही 'असली शिवसेना' के रूप में मान्यता दी.
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