ट्रांसजेंडर एक्ट में संशोधन बिल के पास होते ही संसद से लेकर सड़क तक पर इसे लेकर घमासान शुरू हो गया है. गुरुवार को देशभर के ट्रांसजेंडर दिल्ली में इकट्ठा हुए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल ने उनके अस्तित्व को पूरी तरह नकार दिया है. ऐसे में वो इस बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे. NDTV ने इस दौरान कई ट्रांसजेंडर से बात की. महाराष्ट्र से आई सोनाक्षी जेठवानी ने NDTV से बात करते कहा कि इस बिल में मेडीकल बोर्ड में जांच कराने की बात कही गई लेकिन जब MBBS में ट्रांसजेंडर को लेकर कुछ पढ़ाया ही नहीं जाता है तो कैसे मेडीकल जांच करवाने की क्या जरुरत है ? हम कौन हैं हमारा क्या अस्तित्व है ? कपड़े के अंदर क्या है ? इसको सरकार क्यों जानना चाहती है. उनका इशारा सीधे तौर पर इस बिल के प्रावधान की तरफ़ था जिसमें कहा गया है कि ट्रांसजेंडर को मेडीकल बोर्ड से जाँच करवाने के बाद प्रमाणपत्र लेना पड़ेगा जबकि पहले स्वघोषित सार्टिफीकेट की जरूरत होती थी.
डाक्टर सोनाक्षी कहती हैं कि अगर ट्रांसजेंडर के लिए सरकार इतनी चिंतित है तो हमारे साथ अगर बलात्कार होता है तो उसे केवल दो साल की सजा है इस प्रावधान को क्यों नहीं बदला ? इसी तरह एक अन्य ट्रांसजेंडर आर्यन पाशा ने कहा कि अगर कोई इंटर सेक्स चेंज करवाकर ट्रांसजेंडर बन रहा है उसे भी इसमें डाल दिया गया.एक अन्य ट्रांसजेंडर सर्वग्य सोनी कहते हैं कि हम पितृसत्ता के सताए हुए हैं फिर से हमारी मान्यता को छीन लिया गया है.किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर भी बिल का विरोध कर रही है.
किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर प्रोफेसर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी भी बिल का विरोध करने दिल्ली पहुंची है. मीडिया से उन्होंने कहा कि सरकार हमारे समुदाय को ट्रांसफोबिक अधिकारी से बचाए क्योंकि ये अधिकारी हमारी भावनाओं को नहीं समझते हैं. उन्होंने कहा कि बिल बनाते वक्त हम लोग मंत्री से मिलने आए लेकिन हमें केवल अधिकारी ही मिली जो ट्रांसफोबिक थी.
उन्होंने आरोप लगाया कि बिल लाने से पहले कम्यूनिटी से कोई संवाद नहीं किया गया और बिल जल्दबाज़ी में ले आया गया.चार चार घंटे के अंदर बिल पास कर दिया जाता है.हम प्यारे लोग हैं सुंदर लोग हैं. हमसे भागिए मत, हम अपनी गुहार लगाएंगे.हमारे विपक्षी पार्टियों का शुक्रिया जिन्होंने हमारा समर्थन किया.लक्ष्मी नारायण ने कहा कि मेरी उम्रों50 साल है अब मैं डीएम आफिस के चक्कर लगाऊं अपनी जांच कराऊं कि मैं किन्नर हूं. पंजाब से आए गुरुअजान सिंह ने बताया कि वो 28 साल तक अपने घर पर रहें लेकिन परिवार वाले हमारी भावनाओं को नहीं समझ पाते हैं. वो तंत्र मंत्र करवाते रहे हमें सरकार से उम्मीद थी कि हमें पहचान मिलेगी लेकिन हमारी पहचान खत्म करने के लिए ये बिल लाया गया.
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