- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाल और आदिवासी समुदाय के विकास को लेकर टीएमसी सरकार पर आरोप लगाए हैं
- टीएमसी सरकार ने आदिवासियों को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार के किए गए कामों की पूरी लिस्ट सामने रखी
- ममता सरकार के कार्यक्रम स्थल को लेकर अनुमति नहीं देने के बाद राष्ट्रपति का कार्यक्रम दूसरी जगह आयोजित की गई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने शनिवार को पश्चिम बंगाल पहुंची थी. इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने टीएमसी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि इस क्षेत्र में संथाल और आदिवासी समुदाय का विकास हुआ है. उन्होंने साथ ही कहा कि कोई चाहता नहीं है कि संथाल समुदाय आगे बढ़े. उन्हें समारोह में भी आने से रोका जा रहा है. राष्ट्रपति मुर्मू की इस टिप्पणी पर तृणमूल कांग्रेस ने पलटवार किया है.
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के संबोधन पर एआईटीसी (AITC) ने कहा, "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि माननीय राष्ट्रपति महोदया को यह गलत धारणा है कि बंगाल में आदिवासी समुदायों का कोई विकास नहीं हुआ है. महोदया, हम विनम्रतापूर्वक तथ्यों को आपके समक्ष प्रस्तुत करना चाहते हैं."
- लक्ष्मी भंडार योजना के तहत, अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए मासिक वित्तीय सहायता में ₹500 की वृद्धि की गई है, जिससे कुल राशि ₹1,700 प्रति माह (₹20,400 वार्षिक) हो गई है.
- 2025-26 में, सिखशास्त्री छात्रवृत्ति के तहत 1,09,272 अनुसूचित जनजाति के छात्रों को उनकी शिक्षा में सहायता प्रदान की गई है.
- जय जौहर योजना के तहत, 2,98,315 लाभार्थियों को ₹1,000 की मासिक पेंशन मिल रही है, जिससे अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्यों को आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है.
- पश्चिम बंगाल सरकार ने अनुसूचित जनजाति समुदाय के बच्चों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाने के लिए 'सिद्धू कानू मेमोरियल (संताली माध्यम) आवासीय विद्यालय' स्थापित करने की पहल की है.
- जंगलमहल जिले में अनुसूचित जनजाति समुदाय के लगभग 35,845 व्यक्ति 'पश्चिम बंगाल केंदू लीव्स कलेक्टर्स सोशल सिक्योरिटी स्कीम' के अंतर्गत आते हैं, जो उन्हें महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है.
- पश्चिम बंगाल सरकार ने LAMPS की महिला स्वयं सहायता समूहों की आजीविका को मजबूत करने के लिए चालू वित्त वर्ष में प्रत्येक स्वयं सहायता समूह को ₹30,000 की सहायता प्रदान की है. इस पहल के तहत 7,932 स्वयं सहायता समूहों को ₹23.80 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं.
- जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए, जिसमें अंतिम छोर तक संपर्क, पेयजल और स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण तथा सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण शामिल है, पश्चिम बंगाल सरकार ने सड़कों, पुलियों और पुलों का निर्माण; हैंडपंप और सौर ऊर्जा आधारित ट्यूबवेल की स्थापना; अनुसूचित जनजाति छात्रावासों की मरम्मत; सामुदायिक हॉल, आईसीडीएस केंद्र, जाहेर थान और मांझी थान का निर्माण; और सौर स्ट्रीट लाइटों की स्थापना जैसे कार्य किए हैं. इन पहलों के लिए अब तक कुल ₹78.94 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं.
ये जमीनी स्तर पर किए जाने वाले ऐसे उपाय हैं जिनका उद्देश्य बंगाल भर में आदिवासी समुदायों के लिए गरिमा, अवसर और विकास सुनिश्चित करना है.
राष्ट्रपति ने दौरे पर प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ नहीं होने को लेकर भी नाराजगी जताई. साथ ही पहले तय किए गए कार्यक्रम स्थल को लेकर अनुमति नहीं दिए जाने पर राज्य के प्रशासन की आलोचना की. उन्होंने कहा, “मैं बंगाल की बेटी हूं, फिर भी मुझे यहां आने की अनुमति नहीं है. ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं, पता नहीं, शायद वह मुझसे नाराज हैं. इसीलिए मुझे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वहां (गोशाईपुर) जाना पड़ा. कोई बात नहीं, मुझे इस बात को लेकर कोई गुस्सा या नाराजगी नहीं है.”
दरअसल राष्ट्रपति को मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर उपमंडल में कार्यक्रम को संबोधित करना था, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी. इसलिए कार्यक्रम स्थल को बागडोगरा के गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया. अपना कार्यक्रम पूरा करने के बाद वह मूल स्थल पर गईं और वहां अपनी बात रखी.
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