वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को तेलंगाना हाई कोर्ट ने दी गैर-जमानती वारंट जारी करने की चेतावनी

एवी रंगनाथ को हाइड्रा का प्रमुख नियुक्त किया गया था, जो झीलों सहित सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण से बचाने और आपदा प्रबंधन करने के लिए स्थापित एक एजेंसी है. एजेंसी को उसके विध्वंस अभियानों के लिए सराहना मिली है.

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  • तेलंगाना हाई कोर्ट ने HYDRAA के आयुक्त एवी रंगनाथ को 5 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है
  • बाथुकम्मा कुंटा झील के पास विवादित संपत्ति में यथास्थिति आदेश का कथित उल्लंघन अवमानना मामले का केंद्र है
  • कोर्ट ने HYDRAA द्वारा झील के पुनरुद्धार के नाम पर संपत्ति में बड़े पैमाने पर बदलाव करने पर असंतोष जताया है
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तेलंगाना हाई कोर्ट ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया एवं संपत्ति संरक्षण एजेंसी (HYDRAA) के आयुक्त एवी रंगनाथ को चेतावनी दी है कि यदि वह 5 दिसंबर को बाथुकम्मा कुंटा झील अवमानना ​​मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जाएगा. यह कड़ा निर्देश तब आया है जब न्यायालय ने बाग अंबरपेट में झील के पास एक विवादित संपत्ति के संबंध में आयुक्त द्वारा अपने पूर्व न्यायिक आदेशों का कथित रूप से पालन न करने पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया था.

क्या है मामला

यह अवमानना ​​कार्यवाही बाथुकम्मा कुंटा के पास एक भूमि के टुकड़े पर लंबे समय से चल रहे विवाद से उपजी है, जहां याचिकाकर्ता ए. सुधाकर रेड्डी स्वामित्व का दावा करते हैं, जबकि HYDRAA का कहना है कि यह क्षेत्र झील के पूर्ण टैंक स्तर (FTL) के अंतर्गत आता है और इसे पुनर्स्थापन की आवश्यकता है.

अवमानना ​​के आरोप का मूल यह है कि HYDRAA पर जून में हाई कोर्ट द्वारा पारित यथास्थिति आदेश का उल्लंघन करने का आरोप है. इस आदेश में एजेंसी को स्थल पर केवल सीमित मानसून-पूर्व बाढ़ रोकथाम कार्य करने की अनुमति दी गई थी, तथा विशेष रूप से उन्हें विवादित भूमि पर अतिक्रमण न करने का निर्देश दिया गया था.

हालांकि, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एजेंसी ने झील के पुनरुद्धार की आड़ में, संपत्ति में "काफी बदलाव और संशोधन" किए हैं, जो यथास्थिति बनाए रखने के अदालत के निर्देश का स्पष्ट उल्लंघन है. अदालत ने अक्टूबर तक साइट पर बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधि दिखाने वाली प्रस्तुत तस्वीरों को देखते हुए, इसे पहले ही अवमानना ​​का प्रथम दृष्टया मामला माना था.

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एवी रंगनाथ काफी पॉपुलर

हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान, अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आयुक्त रंगनाथ व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए, बल्कि उन्होंने उपस्थिति से छूट की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी. खंडपीठ ने इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अदालत के आदेशों की कथित जानबूझकर अवज्ञा के लिए उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य है.

एवी रंगनाथ को हाइड्रा का प्रमुख नियुक्त किया गया था, जो झीलों सहित सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण से बचाने और आपदा प्रबंधन करने के लिए स्थापित एक एजेंसी है. एजेंसी को उसके विध्वंस अभियानों के लिए सराहना मिली है, लेकिन हाल ही में उसे भूमि संबंधी कार्यों में उचित प्रक्रिया के पालन के संबंध में अनेक अवमानना ​​याचिकाओं और न्यायिक आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है. हाई कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसके पिछले निर्देशों को वह सम्मान नहीं दिया गया, जिसके वे हकदार थे और चेतावनी दी कि यदि आयुक्त अगली निर्धारित तिथि 5 दिसंबर को उपस्थित नहीं होते हैं, तो न्यायालय बिना किसी देरी के गैर-जमानती वारंट जारी करने की कार्यवाही करेगा.

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