कॉर्पोरेट दफ्तर, जहां सुरक्षा और प्रोफेशनल माहौल की उम्मीद की जाती है, वहीं अगर डर, दबाव और चुप्पी का माहौल बन जाए तो सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं, पूरी व्यवस्था का हो जाता है. नाशिक स्थित TCS शाखा से सामने आया मामला इसी कड़वी सच्चाई को उजागर करता है, जहां महिला कर्मचारियों ने उत्पीड़न की शिकायत की, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें ही चुप रहने, 'हाइलाइट न होने' और खुद को संभालने की सलाह दी गई. पीड़िताओं के बयानों में न सिर्फ आरोपियों की हरकतें सामने आई हैं, बल्कि मैनेजमेंट की कथित अनदेखी और मिलीभगत ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
पीड़िताओं के मुताबिक, उन्होंने कंपनी के ऑपरेशन हेड सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से बार-बार शिकायत की, लेकिन हर बार उन्हें नजरअंदाज किया गया. एक पीड़िता के अनुसार, जब उसने सीधे कंपनी हेड से शिकायत की, तो जवाब मिला, 'तुमको क्यों हाईलाइट होना है, जाने दो, छोड़ दो.' यह प्रतिक्रिया न केवल संवेदनहीनता दिखाती है, बल्कि शिकायत प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती है.
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'अकेले मत रहो'
पीड़िता ने जून 2023 में अपने क्वालिटी और ट्रेनिंग मैनेजर से मौखिक शिकायत की थी. लेकिन कार्रवाई के बजाय उसे सलाह दी गई कि आरोपी का चरित्र पहले से खराब है, इसलिए वह खुद सावधान रहे और अकेले न रहे. टीम लीडर ने भी इसी तरह की सलाह देकर मामले को टाल दिया, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी में शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया.
ट्रेनिंग रूम से शुरू हुआ उत्पीड़न
पीड़िता के अनुसार, आरोपी रजा मेमन ने तीन साल पहले ट्रेनिंग के दौरान ही उसे अकेले पाकर नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की. उसने इस बात को गुप्त रखने का दबाव बनाया और बाद में लगातार पीछा करना, घूरना और आपत्तिजनक तरीके से छूना शुरू कर दिया.
शिकायत के बाद बढ़ा उत्पीड़न और बदनामी
शिकायत करने की जानकारी मिलते ही आरोपी ने बदले की भावना से पीड़िता के खिलाफ अफवाहें फैलानी शुरू कर दीं. उसका नाम एक सहकर्मी के साथ जोड़कर ऑफिस में उसकी छवि खराब करने की कोशिश की गई. इसके साथ ही उसकी निजी जिंदगी और शादी को लेकर अश्लील टिप्पणियां भी की गईं.
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काम के जरिए मानसिक दबाव बनाने का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ऑफिस सिस्टम में छेड़छाड़ की. जहां कॉल्स हर 30 सेकंड में आने चाहिए थे, उन्हें हर एक सेकंड में कर दिया गया, ताकि वह काम के दबाव में टूट जाए और मानसिक रूप से परेशान हो.
त्योहार के दिन भी नहीं रुका उत्पीड़न
पीड़िता ने बताया कि Gudi Padwa के दिन, जब वह साड़ी पहनकर ऑफिस आई थी, एक अन्य आरोपी ने उसके पास बैठकर अश्लील टिप्पणी की और बाहर चलने का प्रस्ताव दिया.
जांच के घेरे में कंपनी प्रशासन
अब पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह भी देखा जा रहा है कि क्या कंपनी के अन्य अधिकारी भी आरोपियों को बचाने में शामिल थे. यह मामला केवल एक कंपनी का नहीं, बल्कि पूरे कॉर्पोरेट सेक्टर में महिला सुरक्षा और जवाबदेही की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा करता है.














