'बंद कमरे में हो सुनवाई' : यौन शोषण मामले में तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की

तरुण तेजपाल ने बॉम्‍बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 2013 के रेप मामले में उन्हें बरी करने के खिलाफ गोवा सरकार द्वारा दायर अपील पर ‘ इन कैमरा' में सुनवाई का अनुरोध किया था जिसे HC ने खारिज कर दिया था.

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तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपने मामले की अपील की इन-कैमरा सुनवाई की मांग की है
नई दिल्‍ली:

सहयोगी से रेप के मामले में तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं. उन्‍होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की अपील की इन-कैमरा सुनवाई की मांग की है. तरुण तेजपाल की याचिका में कहा गया है कि मामले की सुनवाई ‘बंद कमरे, में हो. इसमें हाईकोर्ट के याचिका खारिज करने को भी चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court)इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई करेगा. जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की बेंच यह सुनवाई करेगी.  गौरतलब है कि तरुण तेजपाल ने बॉम्‍बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 2013 के रेप मामले में उन्हें बरी करने के खिलाफ गोवा सरकार द्वारा दायर अपील पर ‘ इन कैमरा' में सुनवाई का अनुरोध किया था जिसे HC ने 24 नवंबर 2021 को खारिज कर दिया था.

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तेजपाल की दलील थी कि बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील पर पीड़िता की तरह आरोपी की भी पहचान को संरक्षित करना जरूरी है. साथ ही उन्होंने अपील के सुनवाई योग्य होने को लेकर शुरुआती आपत्ति दर्ज कराते हुए उसे खारिज करने की गुहार लगाई थी. हालांकि, गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपात की ‘बंद कमरे में' सुनवाई की अपील का विरोध करते हुए कहा कि देश को जानने का हक है कि लड़की (पीड़िता) के साथ क्या व्यवहार किया गया?  21 मई 2021 को सत्र अदालत ने तहलका मैगजीन के प्रधान संपादक तरुण तेजपात को रेप के मामले में बरी कर दिया था.उन पर आरोप था कि उन्होंने नवंबर 2013 में गोवा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पंच सितारा होटल के लिफ्ट में अपनी सहकर्मी पर यौन हमला किया. इस फैसले के खिलाफ गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है

तेजपाल के वकील अमित देसाई ने  बॉम्‍बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में न्यायमूर्ति एम एस सोनक और न्यायमूर्ति एम एस जावलकर की खंडपीठ से मामले की सुनवाई ‘बंद कमरे' में करने की अपील की थी जैसा कि इस मामले में निचली अदालत में सुनवाई हुई थी.देसाई ने कहा था कि मामले और आरोपों की संवेदनशीलता को देखते हुए सुनवाई ‘बंद कमरे' में होनी चाहिए. उन्होंने इसके लिए पीठ के समक्ष औपचारिक आवेदन कर विचार करने का अनुरोध किया था. 

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