- मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
- शीर्ष अदालत ने पूछा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षित निकासी क्यों सुनिश्चित नहीं की?
- मालदा में SIR प्रक्रिया के दौरान भीड़ ने कई न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के नालदा में न्यायिक अधिकारियों को घेरकर बंधक बनाने को लेकर ममता बनर्जी सरकार को जमकर सुनाया है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत की पीठ ने पश्चिम बंगाल के मालदा में हुए विरोध प्रदर्शन का गंभीर संज्ञान लेते हुए कहा कि यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने का बेबाक प्रयास है बल्कि ये इस न्यायालय के अधिकार को भी चुनौती देती है.
मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बना लिया था बंधक
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राज्य के मालदा जिले में बुधवार रात को बड़ा बवाल हुआ था. SIR के काम में जुटे 7 न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने यहां कई घंटों तक घेरे रखा था. मालदा जिले की मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर वहां भीड़ काफी उग्र नजर आ रही थी. सैकड़ों लोगों ने कालीचक 2 बीडीओ ऑफिस के बाहर प्रदर्शन शुरू किया जो देर रात तक जारी रहा. बंगाल में SIR प्रक्रिया में मदद के लिए इन न्यायिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है. ये अधिकारी, जिनमें चार महिलाएं भी शामिल थीं, उन मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच कर रहे थे. चुनाव आयोग ने इस घटना की जानकारी कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को दी है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत इस सत्यापन प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं. इसी मामले पर संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने ममता सरकार को लताड़ा है.
CJI ने खूब सुनाया
CJI सूर्य कांत राज्य सरकार से काफी नाराज दिखे. उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, मुझे आधी रात में आदेश डिक्टेट करना पड़ा. उन्होंने कहा कि यह घटना केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने का बेबाक प्रयास ही नहीं है, बल्कि इस न्यायालय के अधिकार को चुनौती भी देती है. उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि ऐसा लगता है कि यह एक योजनाबद्ध और प्रेरित कदम था. चीफ जस्टिस ने कहा कि इस घटना का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों का मनोबल तोड़ना और बचे हुए मामलों में आपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया को रोकना था.
हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देंगे
चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि हम किसी को भी यह अनुमति नहीं देंगे कि वे हस्तक्षेप करें और कानून अपने हाथ में लेकर न्यायिक अधिकारियों के मन पर मनोवैज्ञानिक हमला करें क्योंकि यह स्थापित आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है. चीफ जस्टिस ने कहा कि यह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कर्तव्य का परित्याग भी है. उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि उन्हें सूचित करने के बावजूद उन्होंने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षित निकासी क्यों सुनिश्चित नहीं की?
मुख्य सचिव और गृह सचिव को कारण बताओ नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव को इस मामले पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है. सर्वोच्च अदालत ने पूछा क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई ना हो? कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई में वर्चुअली पेश होने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष एजेंसी मामले की जांच करेगी. अदालत ने कहा कि हम मामले को मॉनिटर करेंगे. अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग बुधवार को मालदा में हुई घटना की जांच को या तो सीबीआई या NIA को सौंपे और इसके बाद अदालत में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए. शीर्ष अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी शुरुआती जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करें.













