"पूरी यूपी पुलिस को ही खत्म कर दें..." सुप्रीम कोर्ट की बेहद तल्ख टिप्पणी, कहा- ये बकवास अब बंद होनी चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने एक एफआईआर में आरोपी का नाम न जोड़ने पर यूपी पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि "इससे बेहतर तो पूरी यूपी पुलिस को ही खत्म कर दें, यह बकवास अब बंद होनी चाहिए." वहीं इस टिप्पणी के बाद अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है. पूरी खबर पढ़ें.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins

उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली और मनमानी पर देश की सर्वोच्च अदालत ने अब तक की सबसे तीखी और तल्ख टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिस तरह से यहां कानूनी प्रक्रियाओं का माखौल उड़ाया जा रहा है, उसे देखते हुए तो "यूपी पुलिस को भंग ही कर देना चाहिए." कोर्ट ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि व्यवस्था और कानून के साथ चल रहा यह खिलवाड़ और बकवास अब हर हाल में बंद होना चाहिए.कोर्ट ने ये टिप्पणी एक FIR में आरोपी का नाम खाली छोड़ देने और बाद में नाम जोड़ने पर की है. दूसरी तरफ कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि इस सरकार का रवैया पहले दिन से ही भेदभावपूर्ण रहा है.

किस मामले पर भड़का सुप्रीम कोर्ट का गुस्सा?

मामला उस जांच से जुड़ा है जिसमें पुलिस ने एक मोटरसाइकिल सवार के खिलाफ ‘अज्ञात' व्यक्ति के नाम से FIR दर्ज की, जबकि शिकायतकर्ता का कहना था कि उसने आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया था और पुलिस के हवाले कर दिया था. पीठ ने सवाल किया कि FIR अज्ञात लोगों के खिलाफ क्यों दर्ज की गई? अगर व्यक्ति को मौके पर ही पकड़ लिया गया था तो उसका नाम अज्ञात क्यों लिखा गया? अगर उसे मौके पर पकड़ा गया था तो अज्ञात मोटरसाइकिल सवार के खिलाफ FIR क्यों दर्ज की गई? लोग पुलिस पर भरोसा कैसे करेंगे? याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरुआत से ही जांच को एकतरफा तरीके से आगे बढ़ाया. उसका कहना था कि मौके पर पकड़े गए मोटरसाइकिल सवार का नाम FIR में दर्ज नहीं किया गया और आरोपी वाले कॉलम को खाली छोड़ दिया गया. 

बाद में हाईकोर्ट के स्टेटस रिपोर्ट मांगे जाने के बाद पुलिस ने चार्जशीट में मोटरसाइकिल सवार का नाम शामिल किया, लेकिन बाद में उसे क्लीन चिट दे दी गई.  याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि जब मोटरसाइकिल जब्त की गई थी तब उस पर नंबर प्लेट नहीं थी, लेकिन जांच के दौरान बाद में उसमें एक रजिस्ट्रेशन नंबर जोड़ दिया गया . इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि लाइन पर चलना एक बात है, लेकिन उसके लिए हद से ज्यादा झुक जाना दूसरी बात है. और इस तरह का कवर-अप? जितना कम कहा जाए उतना बेहतर है 

पीठ ने यह भी सवाल किया कि आप आरोपी को मौके पर पकड़ते हैं, लेकिन FIR में उसका नाम नहीं देना चाहते. शायद अगर समीकरण आपके पक्ष में बन जाए तो आप नाम बदल सकते हैं, अपने किसी व्यक्ति का नाम डाल सकते हैं… क्या वहां इसी तरह काम होता है? कोर्ट ने यूपी पुलिस की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे को भी “पूरी तरह निराशाजनक” बताया.

 कोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है . पीठ ने कहा कि अधिकारी को बेहतर हलफनामे के साथ आना होगा और यह साफ करना होगा कि जब मोटरसाइकिल सवार को मौके पर ही पकड़ लिया गया था, तो FIR में उसका नाम क्यों नहीं दर्ज किया गया . 

कोर्ट की चेतावनी: अपनी हद में रहे पुलिस 

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और पुलिस के आला अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने साफ कहा है कि कोई भी पुलिस अधिकारी कानून और संविधान से ऊपर नहीं है. अगर पुलिस ने अपनी इस मनमानी कार्यशैली को तुरंत नहीं सुधारा, तो अदालत को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश शासन की होगी.<

Advertisement

अखिलेश यादव हमला: 'PDA' को बनाया जा रहा निशाना

सुप्रीम कोर्ट की इस लल्ख फटकार के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार को घेरा. अखिलेश यादव ने कहा, "बीजेपी सरकार ने पहले दिन से ही भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया हुआ है. देश की अदालतों ने भी कई बार इस बात को नोट किया है और सरकार को फटकार लगाई है." अखिलेश ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए आगे कहा, "उत्तर प्रदेश में इस समय सबसे ज्यादा भेदभाव 'PDA' यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोगों के साथ किया जा रहा है. पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल करके जानबूझकर एक खास वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है."
ये भी पढ़ें: गोरखपुर में 5 दिन से लापता 10वीं के टॉपर छात्र का तालाब में मिला शव, लव अफेयर में हत्या की आशंका

Advertisement

Featured Video Of The Day
LPU हिंसक प्रदर्शन: 'मुझ पर दो बार हुआ जानलेवा हमला', आरोपी छात्र फरहद ने NDTV के सामने रखा अपना पक्ष

Topics mentioned in this article
Supreme Court News
UP Police
Supreme Court Warning
Yogi Government Criticism