दलीलें हमेशा नहीं चल सकतीं... सोनम वांगचुक केस में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिए अंतिम 10 मिनट

सोनम वांगचुक केस में सुप्रीम कोर्ट में आज तीखी बहस देखने को मिली. कोर्ट ने इस मामले में अपनी बात रखने के लिए केंद्र को अंतिम 10 मिनट का समय दिया है. सिब्बल और वांगचुक की पत्नी ने इस पर विरोध जताया.

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  • सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की NSA हिरासत चुनौती की सुनवाई आज केंद्र के अतिरिक्त समय मांगने पर टली
  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वीडियो अनुवाद के मुद्दे पर और दलीलें पेश करने के लिए दस मिनट अतिरिक्त मांगे
  • याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र के काउंटर में आरोपों का कोई जवाब न देने का विरोध किया
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नई दिल्ली:

लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की एनएसए हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई आज उस समय दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई जब केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से एक्स्ट्रा समय मांग लिया। कोर्ट ने पहले ही इशारा कर दिया कि यह सुनवाई हमेशा नहीं चल सकती, लेकिन इसके बावजूद केंद्र को 10 और मिनट देने पर सहमत हो गया. अब यह मामला सोमवार के लिए टल गया। सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई में सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अपनी प्रतिवाद दलीलें पूरी कीं. कोर्ट ने आज ही सुनवाई खत्म करने की योजना बनाई थी, लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पिछली सुनवाई में उठे वीडियो ट्रांसलेशन के मुद्दे पर उन्हें और दलीलें रखनी हैं.

केंद्र ने क्यों मांगा एक्स्ट्रा समय?

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत से थोड़े और समय की मांग की. उनका कहना था कि वे उन वीडियो और बयानों के अनुवाद पर कुछ कहना चाहते हैं, जिन्हें सोनम वांगचुक की हिरासत का आधार बनाया गया है. मेहता ने कहा, 'एक 40 मिनट का वीडियो है, मुझे उसके अनुवाद के आरोपों पर जवाब देना है.'

याचिकाकर्ता ने किया विरोध

मेहता की मांग का याचिकाकर्ता गीतांजलि जे. अंग्मो की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि केंद्र ने अपने काउंटर अफिडेविट में इस आरोप का जवाब तक नहीं दिया है, इसलिए अब नई दलील के नाम पर और समय नहीं दिया जा सकता. सिब्बल ने तर्क दिया, 'हमने आरोप लगाए, उनके काउंटर में इसका कोई जवाब नहीं है. यानी इसे स्वीकार किया गया. यह मामला यूं ही हमेशा नहीं चलता रह सकता.

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इस बीच, वांगचुक की पत्नी ने भी अतिरिक्त समय देने पर आपत्ति जताई. लेकिन जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि सुनवाई लंबी नहीं खिंच सकती, फिर भी केंद्र को थोड़ा समय और दिया जाएगा. कोर्ट ने इस मामले में 23 फरवरी तय कर दी गई.

पेनड्राइव भी कोर्ट को सौंपा गया

इसके अलावा पिछली सुनवाई में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि वांगचुक को दी गई वीडियो वाली पेनड्राइव को सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में जमा किया जाए. आज वह पेनड्राइव कोर्ट में सौंप दी गई. अंग्मो का दावा है कि वांगचुक को आठ में से केवल चार वीडियो ही दिए गए थे. सिब्बल ने कहा कि अब जमा की गई स्टोरेज डिवाइस से साफ हो जाएगा कि वे चार वीडियो वास्तव में शामिल हैं या नहीं. 

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जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने इस बहस को खत्म करने के लिए खुद कमान संभाल ली है. कोर्ट ने कहा, 'हम खुद उन वीडियो को देखेंगे। अगर कोई संदेह हुआ तो हम दोनों पक्षों से सवाल पूछेंगे.'अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी, जहां केंद्र को अपनी बात रखने का अंतिम मौका मिलेगा.
 

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