- ममता बनर्जी ने दिल्ली में चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट में स्वयं जाकर एसआईआर मामले की दलीलें पेश कीं
- उन्होंने चुनाव आयोग के साथ बैठक के लिए कैमरे के सामने होने की मांग की और प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की
- CM ममता ने CEC के खिलाफ महाभियोग लाने की बात कही और राजनीतिक लड़ाई के लिए तैयार रहने का संकेत दिया
मुझे याद नहीं आता है कि कभी किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री दिल्ली में हो और सुप्रीम कोर्ट में जा कर खुद दलीलें पेश की हो.ममता बनर्जी इस बार दिल्ली आती हैं और साथ में उन लोगों को साथ लाती हैं जिन्हें वो SIR का पीड़ित बताती हैं.उन सभी को लेकर ममता बनर्जी चुनाव आयोग जाती है वहां जाने के पहले चुनाव आयोग के साथ होने वाली बैठक को कैमरा के सामने करवाने की मांग करती हैं.चुनाव आयोग के साथ बैठक के दूसरे दिन दिल्ली में नेशनल मीडिया के सामने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करती हैं जिसमें उन लोगों को भी बैठाया जाता है जिन्हें वो अपने साथ लेकर आई थी.
कोर्ट में जिरह से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस
ममता बनर्जी ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की बात कही,ये भी कहा कि वो जानती हैं कि बंगाल में उन्हें एक राजनैतिक लड़ाई लड़नी पड़ेगी और उसे वो उसी रूप में लड़ने के लिए तैयार हैं.ममता बनर्जी ने कहा कि एक राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते उन्होंने 6 पत्र मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा मगर चुनाव आयोग ने उनकी एक भी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया.ममता बनर्जी यहीं नहीं रूकी उन्होंने यहां तक कहा कि उनकी जो मुलाकात चुनाव आयोग के साथ हुई उसमें भी उनके साथ अच्छे ढंग से व्यवहार नहीं किया गया.संवाददाता सम्मेलन में ही ममता बनर्जी ने यह इशारा कर दिया कि वो अगले दिन सुप्रीम कोर्ट में जब एसआईआर मामले की सुनवाई होगी तो वो वहां जाएगी और अपनी बात रखेंगी क्योंकि उनके पास भी कानून की डिग्री है और वो पेटीशनर भी है.
कोर्ट में क्या हुआ
ममता बनर्जी कोर्ट खुलने से पहले 10:30 बजे ही सुप्रीम कोर्ट पहुंचती है और पीछे जा कर बैठ जाती हैं.जब पश्चिम बंगाल में एसआईआर का मामला 12:50 में आता है तब वो आगे आती हैं.मामले पर उनके वकील बात कर रहे होते हैं मगर ममता बनर्जी चीफ जस्टिस से खुद भी बोलने की अनुमति मांगती है.वो अदालत से कहती हैं कि उन्हें केवल पांच मिनट चाहिए मगर चीफ जस्टिस कहते हैं कि बोलिए हम आपको 15 मिनट तक सुनेंगे.ममता बनर्जी ने अदालत के सामने वो सारी बातें रखी जो वो अभी तक पब्लिक मीटिंग या प्रेस कांफ्रेंस में कहती आई हैं.
70 लाख वोट की लड़ाई
ममता उन 70 लाख नाम को काटने के बारे में सुप्रीम कोर्ट से राहत चाहती हैं जो उनके मुताबिक बनर्जी-बंदोपाध्याय,चटर्जी-चट्टोपाध्याय,गांगुली-गंगोपाध्याय,रॉय-राय की वजह से हटा दिए गए थे.ममता बनर्जी का आरोप है कि बंगाल में 1 करोड़ 36 लाख लोगों के नाम केवल नाम के स्पेलिंग में गड़बड़ी या ऐसी कुछ सामान्य गलतियों की वजह से हटा दिए गए हैं.
सियासी संदेश
ममता बनर्जी के लिहाज से ये अहम है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी पूरी बात रखी जो कि वो करना चाहती थी.आखिर ममता बनर्जी ये सब क्यों कर रही थी,मतलब साफ है कि ममता अपने वोटरों को दिखाना चाहती थीं कि वो उनकी लड़ाई खुद सुप्रीम कोर्ट तक लड़ आई है.इससे उनके मुस्लिम मतदाताओं में ममता के लिए भरोसा और भी बढ़ेगा.पिछली बार भी एनआरसी के मुद्दे पर ममता बनर्जी ने मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट रखा था और इस बार एसआईआर के बहाने वही करने की कोशिश हो रही है.सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ममता कोलकाता जा चुकी हैं और यह भी संकेत दे गई हैं कि वो अगली सुनवाई जो कि 9 फ़रवरी को है फिर दिल्ली आ सकती है.
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