'दादा' की आखिरी इच्छा थी NCP का पुनर्मिलन- शरद पवार गुट के नेता अंकुश काकडे का बड़ा खुलासा

अंकुश काकडे ने दावा किया कि अजित पवार अपने अंतिम समय तक दोनों NCP गुटों को एक करना चाहते थे और इसके लिए हर स्तर पर बातचीत का प्रयास किया गया. काकडे ने कहा कि दोनों गुट का विलय दादा की सबसे बड़ी इच्छा थी, जो पूरा नहीं हो पाई और यही सबसे बड़ा मलाल.

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  • शरद पवार गुट के नेता अंकुश काकडे ने बताया कि अजित पवार अंतिम दिनों में NCP के पुनर्मिलन की इच्छा रखते थे
  • अजित पवार राजनीतिक और भावनात्मक रूप से दोनों NCP गुटों के विलय को अपनी प्राथमिकता मानते थे
  • काकडे और अन्य नेताओं ने कई बार दोनों गुटों के एकीकरण के लिए प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हो पाए
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मुंबई:

शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता अंकुश काकडे ने बारामती में भावुक बयान देते हुए खुलासा किया है कि अजित पवार अपने जीवन के अंतिम महीनों में बार-बार चाहते थे कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुट एक हो जाएं.  काकडे के अनुसार, दादा (अजित पवार) सिर्फ राजनीतिक रूप से नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी NCP के पुनर्मिलन को अपनी बड़ी प्राथमिकता मानते थे. अंतिम विदाई के दौरान काकडे ने कहा कि पिछले 35–40 वर्षों का उनका साथ अब हमेशा के लिए टूट गया. उन्होंने याद किया कि उनकी और अजित पवार की राजनीतिक शुरुआत एक ही समय में हुई थी. जिला बैंक चुनावों से लेकर वर्षों तक कंधे से कंधा मिलाकर काम करने तक दोनों की साझेदारी कायम रही. 

सबसे बड़ी इच्छा थी कि दोनों गुट का विलय हो जाए

काकडे ने बताया कि दो साल पहले NCP का विभाजन होने के बावजूद दादा की सबसे बड़ी इच्छा थी कि दोनों गुट फिर एकजुट होकर महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूत योगदान दें.  उन्होंने कहा कि अजित पवार ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें कई बार बुलाकर कहा था कि  अंकुशराव, आप विट्ठल सेठ मणियार और श्रीनिवास पाटिल से बात कीजिए… दोनों पार्टियों को एक करना चाहिए. 

काकडे और विट्ठल मणियार ने कई दौर की कोशिशें कीं, लेकिन वह प्रयास अंततः सफल नहीं हो पाए. काकडे ने कहा कि यह दादा के लिए बेहद पीड़ादायक था कि बातचीत होने के बावजूद औपचारिक एकीकरण संभव नहीं हुआ.

निकाय चुनाव में एक होने के निर्णय से उम्मीद बढ़ी थी

उन्होंने बताया कि हाल ही में महानगरपालिका चुनावों में दोनों NCP गुटों का साथ लड़ने का निर्णय दादा के लिए उम्मीद की एक बड़ी किरण था. सुप्रिया सुले ने पुणे की जिम्मेदारी उन्हें और विशाल तांबे को सौंपी थी और दादा इसे एक बड़े राजनीतिक पुनर्मिलन की शुरुआत मान रहे थे.  काकडे ने कहा कि दादा चाहते थे कि 12 दिसंबर तक एकीकरण पूरा हो जाए.

काकडे ने भावुक होते हुए बताया कि चुनाव नॉमिनेशन के आखिरी दिन अजित पवार रात ढाई बजे तक बैठकों का हिस्सा रहे.  अगली सुबह 7 बजे सारे फॉर्म जमा कराए गए. उसके बाद बीड रवाना होते समय दादा ने उनसे कहा  “अंकुशराव, मैं निकल रहा हूँ… आप और विशाल सब ठीक से संभाल लेना. हम चुनाव अच्छे से जीतेंगे.”

काकडे ने कहा कि दादा के ये आखिरी शब्द आज भी उनके कानों में गूंजते हैं. उन्होंने कहा कि अगर अजित पवार के जीवनकाल में दोनों NCP गुट एक हो पाते, तो दादा को सबसे अधिक खुशी होती. “यह उनके दिल का सबसे बड़ा सपना था, जो पूरा नहीं हो सका.”

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