- माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बाहर हुए हंगामे में युवकों ने विवादित नारे लगाए
- अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी जान को खतरा बताया है और शिविर में शरारती तत्वों के प्रवेश पर गंभीर चेतावनी दी है
- विवाद के बाद शिविर के आसपास दस सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की गई है
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी जान को खतरा बताया है. प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बाहर शनिवार शाम को हंगामा हुआ. कुछ अराजक तत्वों पर हंगामा करने का आरोप है. आरोप है कि हंगामा कर रहे युवकों ने आई लव बुलडोजर बाबा के नारे लगाए, जिसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद के सेवकों और जबरन घुसे लोगों के बीच हाथापाई हुई. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने चेतावनी दी है कि अगर शरारती तत्व शिविर में फिर प्रवेश करते हैं, तो श्रद्धालुओं और शिविर की संपत्ति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है. इस बीच संत समाज से लेकर राजनेता तक इस मुद्दे में कूद पड़े हैं. अब ये लड़ाई संत बनाम संत नहीं, बल्कि एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है. आइए आपको बताते हैं कि ये विवाद आखिर शुरू कहां से हुआ था और अभी कहां तक पहुंचा है?
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में बीते 7 दिनों से ना तो संगम की चर्चा है और ना ही साधु संतों की. बस चर्चा है तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की और उनसे जुड़े विवादों की. ना तो स्वामी जी धरने से उठने के लिए तैयार हैं और ना ही प्रशासन पीछे हटने को तैयार है. इस मामले में जमकर सियासत भी हो रही है. अखिलेश यादव भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में मोर्चा खोले हुए हैं. अखिलेश यादव ने फिर योगी सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है- कालनेमि को याद करने वाले बताएं कि कलयुग के कालनेमि कौन है? कालनेमि ही इनका काल बनके आएगा. वहीं अविमुक्तेश्वरानंद को मानने के लिए बाबा बागेश्वर समेत कई संतों ने भी बयान जारी किए हैं.
'समझौता कर लेना चाहिए', शंकराचार्य विवाद पर धीरेन्द्र शास्त्री
संगम घाट पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य और अधिकारियों के बीच हुई नोकझोंक के बारे में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कहते हैं, "मेरे पास इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है और मैं हर बात की पुष्टि नहीं कर सकता. मैंने सोशल मीडिया या अन्य मीडिया पर जो कुछ भी देखा है, उसके आधार पर मैं कहूंगा कि सनातन धर्म का उपहास नहीं किया जाना चाहिए. दोनों पक्ष अपने हैं, दोनों सनातनी ही हैं, और मेरा मानना है कि दोनों पक्षों को बैठकर समझौता कर लेना चाहिए."
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा
प्रयागराज में माघ मेला जारी है. श्रद्धालुओं का सैलाब लगातार संगम में आस्था की डुबकी लगा रहा है. साथ ही इधर बीते सात दिनों से ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना भी जारी है. मौनी अमावस्या पर पालकी से जाकर संगम स्नान करने से रोके जाने के बाद वो त्रिवेणी मार्ग पर अपने शिविर के सामने फुटपाथ पर बैठे हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अफसरों से माफी मांगने की जिद पर अड़े हैं और उनका धरना चल रहा है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. उत्तर प्रदेश के साथ ही देश भर में नेताओं, भक्तों और साधु-संतों की प्रतिक्रिया आ रही है. प्रयागराज के माघ मेला में मौनी अमावस्या स्नान के दौरान चर्चा में आए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों ने अपने गुरु की जान पर खतरा बताया है. इसके बाद शिविर के आस-पास सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. दरअसल, संदिग्धों की हलचल के बाद मेला प्रशासन ने दस सीसीटीवी लगाने का फैसला लिया है.
संतों से मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़ना गलत... निश्चलानंद सरस्वती
वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में पुरी गोवर्धन मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करना चाहिए था, तो इस पर उन्होंने दो टूक शब्दों में जवाब दिया कि साधु-संतों के साथ मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़कर उन्हें खींचना बिल्कुल गलत है. कहा कि शंकराचार्य हों या फिर कोई और, यह बात सभी पर लागू होती है. सभी को स्नान की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए.
'जो पीएम मोदी-सीएम योगी से खुश नहीं, वे सनातन के विरोधी'
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य पर तंज कसते हुए दावा किया कि जो देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से खुश नहीं हैं, वे सनातन विरोधी हैं. जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य पर आरोप लगाया है कि वे सनातनी विरोधी हैं और उन्हें शंकराचार्य नहीं कहा जाना चाहिए. जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य से जुड़े विवाद पर कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस समय राजनीति से प्रभावित हैं_ बेहतर होगा कि उन्हें शंकराचार्य न कहा जाए. वे सनातन को क्षति पहुंचाने का ठेका ले चुके हैं. वे देख रहे हैं कि इंडी गठबंधन के लोग सनातन धर्म को डेंगू, मच्छर, मलेरिया और कोविड बताते हैं. सनातन को खत्म करने की बात करते हैं, वे उन्हीं लोगों से बातचीत और सलाह ले रहे हैं. जब अखिलेश यादव ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया था, तब भी वे उन्हीं के साथ बैठते हैं.
धर्म में बढ़ रहा राजनीति का हस्तक्षेप: मायावती
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा है कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी बीते कुछ वर्षों से धार्मिक पर्वों, त्योहारों, पूजापाठ और स्नान जैसे आस्थागत आयोजनों में राजनीतिक लोगों का हस्तक्षेप और प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जो नए-नए विवाद, तनाव और सामाजिक संघर्ष का कारण बन रहा है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी भी दृष्टि से सही नहीं है और इसे लेकर आम लोगों में दुख व चिंता का माहौल स्वाभाविक है.
कलयुग के कालनेमि कौन: अखिलेश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े घटनाक्रम को लेकर यूपी सरकार पर निशाना साधा. अखिलेश यादव ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, 'कालनेमि को याद करने वाले बताएं कि कलयुग के कालनेमि कौन हैं. कालनेमि काल बनकर आता है.' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी का उनसे लगातार संपर्क बना हुआ है और उनसे बातचीत हो रही है. वे असली सनातनी हैं और सरकार को इस पूरे मामले में संयम और संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए.
FIR की मांग, बढ़ाई गई शिविर की सुरक्षा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य के शिविर के बाहर हुए हंगामे को लेकर एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही की मांग की गई है. शिविर परिसर और उसके आसपास पर्याप्त सुरक्षा बल की तैनाती की मांग की भी गई है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अनहोनी से पूरी तरह से बचाव किया जा सके. यह भी कहा गया है कि अगर भविष्य में शिविर अथवा शिविर के बाहर किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मेला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की होगी. यह तहरीर शिविर व्यवस्थापक पंकज पांडेय की ओर से दी गई है. सेक्टर चार, त्रिवेणी मार्ग उत्तरी पटरी पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का शिविर स्थित है. मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर पालकी के साथ स्नान के लिए जाने से रोकने पर विवाद हुआ था. इसके बाद से ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिविर के बाहर बैठे हैं. आज शिविर के बाहर बैठने का सातवां दिन है.
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माघ मेले में ऐसे शुरू हुआ विवाद
माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोकते हुए पैदल जाने को कहा. इस पर आपत्ति जताने के दौरान उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बनी. घटना से नाराज शंकराचार्य माघ मेला क्षेत्र स्थित अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे. इस मामले में प्रशासन की ओर से अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को 48 घंटे के भीतर दो नोटिस जारी किए गए. पहले नोटिस में शंकराचार्य की पदवी के प्रयोग को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या के दौरान उत्पन्न विवाद को लेकर जवाब तलब किया गया. नोटिस में माघ मेले से प्रतिबंध की चेतावनी भी दी गई थी. बाद में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दोनों नोटिसों का जवाब प्रशासन को भेज दिया. इसके बाद से इसमें राजनीतिक दल कूद गए हैं.
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