- राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र किया
- राहुल गांधी ने विपक्ष के नेता होने के नाते बिना अनुमति बोलने की अपनी अधिकारिता पर जोर दिया
- उन्होंने सदन में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को उठाने की कोशिश की थी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज फिर पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की 'अप्रकाशित किताब' से जुड़े एक मैगजीन आर्टिकल का हवाला देते हुए बोलना शुरू किया, तो फिर सदन में हंगामा खड़ा हो गया. राहुल गांधी ने इस दौरान कहा, 'मैं सीधा जिक्र नहीं करूंगा...मुझे बोलने दिया जाए. मैं विपक्ष का नेता हूं, मुझे बोलने के लिए किसी से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है. मैंने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया है.' इस दौरान कांग्रेस सांसद ने कहा- यार, बोलने तो दो. इस पर जेपी नड्डा समेत कई बीजेपी सांसदों ने आपत्ति जताई और कहा कि ये शब्द सदन की गरिमा के खिलाफ है.
'मैं बस इतना कह रहा हूं कि मुझे चीन...'
लोकसभा में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'राष्ट्रपति के भाषण में एक बहुत ही ज़रूरी मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है. पाकिस्तानियों, चीनियों और हमारे बीच संबंध. इस लेख में एक बहुत ही ज़रूरी बात है जिसे मैंने वेरिफाई किया है. इसमें प्रधानमंत्री के रिएक्शन के बारे में बताया गया है. हमारे राष्ट्रपति का भाषण उस रास्ते के बारे में था जो भारत को अपनाना है. आज, दुनिया के मंच पर अंतरराष्ट्रीय मामलों में मुख्य मुद्दा चीन और अमेरिका के बीच टकराव है. यह हमारे राष्ट्रपति के भाषण का मुख्य हिस्सा है. मैं बस इतना कह रहा हूं कि मुझे चीन और भारत के बीच क्या हुआ और हमारे प्रधानमंत्री ने इस पर कैसे रिएक्शन दिया, इस बारे में बयान देने दें. मुझे क्यों रोका जा रहा है?
बीजेपी सांसदों ने राहुल गांधी के इस मुद्दे पर बोलने पर आपत्ति जताई. राहुल गांधी द्वारा चीन का मुद्दा फिर से उठाए जाने के बाद लोकसभा में हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.
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अड़े हुए राहुल राहुल गांधी, सोमवार को भी हुआ हंगामा
इससे पहले सोमवार को भी राहुल गांधी ने जब लोकसभा में बोलना शुरू किया, तो हंगामा हो गया था. इस दौरान ट्रेजरी बेंच के सदस्यों ने बार-बार टोका, जिन्होंने राहुल गांधी से अपने दावों को सपोर्ट करने के लिए असली सोर्स पेश करने की अपील की. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी विपक्ष के नेता के भाषण में दखल दिया और बयानों की सच्चाई पर सवाल उठाए. इसके बाद कई बार सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा था.
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