- गणतंत्र दिवस समारोह में PM मोदी ने पैदल चलकर लोगों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया
- प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और दो मिनट का मौन रखा
- समारोह में भारत की सैन्य प्रगति, सांस्कृतिक विविधता, और आधुनिक उपलब्धियों का भव्य प्रदर्शन किया गया
गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर सभी की निगाहों के केंद्र में रहे. क कार्यक्रम खत्म होते ही प्रधानमंत्री ने अपने काफिले को पीछे छोड़ दिया और पैदल ही आगे बढ़ते हुए लोगों की ओर रुख किया. हाथ जोड़कर अभिवादन करते हुए पीएम मोदी काफी दूर तक भीड़ का अभिवादन करते हुए चलते रहे. लोगों ने “मोदी-मोदी” के नारों के साथ उनका स्वागत किया और यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल होने लगा.
इस साल के गणतंत्र दिवस आयोजन में स्वदेशी रक्षा क्षमता की शानदार झलक दिखाई दी. परेड की शुरुआत ही स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गनों से दी गई 21 तोपों की सलामी के साथ हुई, जिसने देश की सैन्य आत्मनिर्भरता और तकनीकी मजबूती का संदेश दिया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने समारोह का नेतृत्व किया, जबकि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं.
कर्तव्य पथ पर “वंदे मातरम” के 150 वर्ष, भारत की सैन्य प्रगति और सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिला. यह आयोजन न केवल सामरिक शक्ति बल्कि भारत की सभ्यतागत विरासत और आधुनिक उपलब्धियों का भी भव्य प्रदर्शन रहा.
समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि देने से हुई. दो मिनट का मौन रखते हुए उन्होंने देश के वीर सपूतों को नमन किया. इस वर्ष पीएम मोदी ने मरून रंग की खास पगड़ी पहनी—जो पिछले कई वर्षों की तरह इस बार भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही. लेकिन दिन का सबसे यादगार क्षण वही था, जब प्रधानमंत्री अपने काफिले से अलग होकर सीधे जनता की ओर बढ़े और आम लोगों से जुड़ाव का संदेश दिया.













