बीएमसी में तबादले, पोस्टिंग और नियुक्तियों में जमकर चलती हैं सिफारिशें, RTI में खुलासा

बीएमसी के 'डी वार्ड' के कुछ इंजीनियरों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था. इनमें से कुछ वैसे नाम थे जो वीआईपी पैरवी से पोस्ट पर बने हुए थे.

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मुंबई:

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बीएमसी में तबादले, पोस्टिंग और नियुक्तियों में जमकर सिफ़ारिशें चलती रही हैं. ये बात आरटीआई एक्टिविस्ट जीतेंद्र घाडगे द्वारा दायर सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से सामने आई है. इसके मुताबिक, 2020 और 2022 के बीच, बीएमसी में जूनियर इंजीनियरों से लेकर कार्यकारी इंजीनियरों के पोस्टिग, ट्रांसफ़र या प्रमोशन के लिए 309 सिफारिशी चिट्ठियां आईं. ये चिट्ठियां लिखने वालों में, डिप्टी मेयर, बीएमसी में विपक्ष के नेता, नगरसेवक, विधायक, सांसद, राज्य मंत्री और कैबिनेट मंत्री तक हैं.

पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने सबसे ज़्यादा 34 अनुशंसा पत्र लिखे. महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि ज़िरवाल 11 पत्रों के साथ दूसरे नंबर पर रहे. नाना पटोले ने भी पिछले तीन सालों में 6 पत्र लिखे.

इस जानकारी से ऐसा दिख रहा है कि बीएमसी के इंजीनियर, बिल्डिंग प्रपोजल विभाग, बिल्डिंग फैक्ट्री विभाग, एसआरए , लैब टेस्टिंग विभाग जैसे मलाईदार पोस्टिंग्स के लिए बड़े पैमाने पर लॉबिंग कर रहे हैं.

जबकि बीएमसी की नियम संख्या 21 के मुताबिक ऐसी लॉबिइंग करने या सिफारिश करवाने वाले लोगों के खिलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए, जो किसी पर नहीं हुई।.

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आरटीआई कार्यकर्ता जीतेंद्र घाडगे ने कहा, "मैंने एक्शन के बारे में जानने के लिए जब अलग से आरटीआई डाली तो पता चल रहा है कि इन 300 में से सिर्फ़ 3 को शो कॉज नोटिस दिया गया है, कार्रवाई नहीं हुई है, इनकी लॉबी बहुत बड़ी है. इसका ख़ामियाज़ा आमलोगों पर पड़ता है, बिल्डिंग और फैक्ट्री डिपार्टमेंट है ये बहुत अहम विभाग हैं, जहां बहुत एक्सीडेंट्स होते हैं, हादसे होते हैं, पहले कभी इंजीनियर्स जेल में जा चुके हैं, यहां बहुत भ्रष्टाचार होता है, जब ऐसे लोगों को राजनेता रिकमेंड करते हैं, इसमें भ्रष्टाचार तो होता ही है, लोगों की जान भी जाती है. इन 300 में से कुछ लेटर के साथ प्रेशर डाल रहे हैं तो कुछ फ़ोन कॉल से, तो मेरी मांग है कि रूल 21 के तहत बीएमसी कार्रवाई करे."

सत्तारूढ़ शिवसेना के प्रवक्‍ता कृष्णा हेगड़े भी मानते हैं कि मनचाहे पोस्ट के लिए मनमानी होती है. उन्होंने कहा, "कई बीएमसी के अधिकारी एक ही पोस्ट पर 7 साल तक रहते हैं, उनकी मनमानी शुरू हो जाती है. उनके इतने लंबे कार्यकाल में, दूसरे काबिल अधिकारियों को मौक़ा नहीं मिलता. अब एक लोक प्रतिनिधि किसी का ट्रांसफ़र चाहता है तो वो जनहित और लोकहित में ये चाहता है. कई अधिकारी हमारे पास आते हैं और कहते हैं पारिवारिक समस्या है. बच्चे के स्कूल से लेकर घर पर किसी बीमार की समस्या बताते हैं ऐसे में हम सब कुछ देखते हुए, समझते हुए जनहित में लेटर ट्रांसफ़र का देते हैं."

हाल ही में, बीएमसी के 'डी वार्ड' के कुछ इंजीनियरों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था. इनमें से कुछ वैसे नाम थे जो वीआईपी पैरवी से पोस्ट पर बने हुए थे. अब आरटीआई खुलासे के बाद इस पर कार्रवाई कब और कितनी होगी, कहना मुश्किल है क्योंकि हर पार्टी से जुड़ा कोई ना कोई नाम पैरवीकार के तौर पर दिख रहा है. 

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