- नागौर में शहीद जवान भागीरथ कड़वासरा की बेटी सुष्मिता की शादी में साथी जवान पिता की भूमिका निभाने पहुंचे थे
- 13 ग्रेनेडियर्स बटालियन के 24 जवानों ने शादी में कन्यादान, फेरे और अन्य पिता की रस्में पूरी कीं
- भागीरथ कड़वासरा 1995 में सेना में भर्ती हुए थे और 2002 में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे
राजस्थान के नागौर के मेड़ता में एक शहीद की बेटी की शादी में कुछ ऐसा देखने को मिला, जिससे वहां मौजूद हर एक मेहमान की न सिर्फ आंखें नम हो गईं बल्कि सीना गर्व से भर गया. दरअसल हुआ कुछ यूं कि एक शहीद जवान के साथियों ने 23 साल पहले उससे किया हुआ वादा निभाते हुए उसकी बेटी की शादी में पिता का फर्ज निभाया. मौका था शहीद जवान भागीरथ कड़वासरा की बेटी सुष्मिता की शादी का. इस दौरान सुष्मिता के पिता के 24 साथी जवान ‘पिता' बनकर शादी समारोह में पहुंचे. यह सिर्फ एक शादी नहीं थी बल्कि यह फौजी भाईचारे, कर्तव्यनिष्ठा और वचन की मर्यादा का जीवंत उदाहरण था.
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शहीद की बेटी की शादी में साथी जवानों ने निभाईं पिता की रस्में
मेड़ता उपखंड के कड़वासरो की ढाणी में शनिवार को शादी समारोह के दौरान ऐसा नजारा देख पूरा गांव भावुक हो उठा. 13 ग्रेनेडियर्स बटालियन (गंगानगर-जैसलमेर सेक्टर) के 24 जवान विशेष रूप से नागौर पहुंचे. कमान अधिकारी कर्नल सोमेन्द्र कुमार, अन्य अधिकारी और सेवानिवृत्त कर्नल सुरेश चंद्र राणा भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने. जवानों ने दुल्हन सुष्मिता को गोद में बिठाया, कन्यादान किया, फेरे लगवाए, आशीर्वाद दिया और हर वह रस्म निभाई जो एक पिता निभाता है. विदाई के समय जवानों की आंखें नम थ. ये देखकर वहां मौजूद मेहमानों की आंखें भी भर आईं. इस दौरान भावुक एक ग्रामीण ने कहा कि आज के समय में लोग अपने रिश्ते निभाने से कतराते हैं, लेकिन सेना ने दिखा दिया कि वादा क्या होता है.
2002 में भागीरथ कड़वासरा ने दी थी शहादत
बता दें कि भागीरथ कड़वासरा 1995 में भारतीय सेना की 13 ग्रेनेडियर्स में भर्ती हुए थे. 8 जून 2002 को असम के मिलनपुर गांव में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए वह शहीद हो गए थे. उनकी बहादुरी के लिए 26 मार्च 2003 को उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया. वह अपने पीछे पत्नी संतोष देवी और नन्ही बेटी सुष्मिता को छोड़ गए थे. उस समय साथी जवानों ने शहीद से वादा किया था-तुम्हारी बेटी की हर खुशी में हम साथ रहेंगे. शनिवार को वह वादा निभाया गया.
'शहीद साथी से किया वादा हमेशा जिंदा रहेगा'
शहीद भागीरथ की पत्नी संतोष देवी की आंखें नम थीं. लेकिन उनके चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था. उन्होंने कहा कि भागीरथ जी चले गए, लेकिन उनके साथी आज भी हमारा परिवार हैं. वहीं शादी में पहुंच जवानों ने एक स्वर में कहा कि शहीद साथी से किया वादा हमेशा जिंदा रहेगा. बता दें कि यह कहानी सिर्फ एक शादी की नहीं, बल्कि उस फौजी परंपरा की है, जहां ‘रक्त से नहीं, रिश्तों से भाईचारा' निभाया जाता है. सीमा पर दुश्मन से लड़ने वाले ये जवान, घर लौटकर भी अपने शहीद साथी का परिवार नहीं भूलते. भागीरथ कड़वासरा के साथी जवानों ने वादा पूरा कर ये दिखा दिया है.
इनपुट- लोकेश श्रीवास्तव













