राहुल गांधी ने कनिमोझी से कहा कांग्रेस की सीट शेयरिंग कमिटी से बात करे डीएमके - सूत्र 

राहुल गांधी के साथ कनिमोझी की मुलाक़ात के बाद अब दोनों पार्टियों के बीच सीट बंटवारे की बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है. हालांकि तस्वीर पूरी तरह साफ़ होने में अभी समय लगेगा.

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राहुल गांधी और कनिमोझी के बीच हुई बातचीत
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  • तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर कनिमोझी ने राहुल गांधी से करीब एक घंटे बातचीत की
  • राहुल गांधी ने कांग्रेस के सम्मान पर जोर देते हुए डीएमके को प्रदेश कांग्रेस कमिटी से बात करने को कहा
  • कांग्रेस इस बार अधिक सीटें मांग रही है और सरकार में सत्ता हिस्सेदारी की भी इच्छा जता रही है
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नई दिल्ली:

तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे के पेंच को सुलझाने के लिए कनिमोझी ने राहुल गांधी से मुलाक़ात की. दस जनपथ पर दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक चली बातचीत के बाद कनिमोझी मीडिया से बात किए बिना निकल गईं. औपचारिक तौर पर कांग्रेस और डीएमके ने इस मुलाक़ात को लेकर चुप्पी साधी हुई है.लेकिन कांग्रेस सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी और कनिमोझी की मुलाक़ात अच्छे माहौल में हुई. हालांकि सीटों को लेकर बात नहीं बनी है . राहुल गांधी ने कांग्रेस के सम्मान पर जोर दिया और कहा कि डीएमके को सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे द्वारा बनाई गई तमिलनाडु कांग्रेस की कमिटी से बात करनी चाहिए. 

दरअसल, डीएमके से सीट बंटवारे की बातचीत तय करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने नवंबर में ही प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की एक कमिटी बनाई थी. हालांकि इस कमिटी से डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने महज़ एक बार शिष्टाचार मुलाक़ात की है. दोनों दलों में सीट बंटवारे की औपचारिक बातचीत शुरू तक नहीं हो पाई है.

पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा और 18 पर जीत दर्ज की. इस बार कांग्रेस ज़्यादा सीटें तो मांग ही रही है साथ ही सरकार बनने पर सत्ता में हिस्सेदारी भी मांग रही है. लेकिन डीएमके ना तो सत्ता में कांग्रेस को साझेदार बनाना चाहती है ना ही ज्यादा सीटें देना. इस बीच प्रवीण चक्रवर्ती जैसे कुछ कांग्रेस नेताओं ने टीवीके के साथ गठबंधन की वकालत शुरू कर दी. 

बहरहाल, राहुल गांधी के साथ कनिमोझी की मुलाक़ात के बाद अब दोनों पार्टियों के बीच सीट बंटवारे की बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है. हालांकि तस्वीर पूरी तरह साफ़ होने में अभी समय लगेगा.डीएमके के साथ कांग्रेस का गठबंधन करीब दो दशकों से है लेकिन अब पार्टी नेतृत्व को लगता है कि गठबंधन के बावजूद सत्ता में भागीदारी ना मिलने से उसके कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलता और पार्टी को भी अपनी जड़ें जमाने में मुश्किल होती है. दूसरी तरफ़ डीएमके को लगता है कांग्रेस बिना किसी आधार के ज़्यादा सीटों की डिमांड कर रही है. 

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