राहुल गांधी के खिलाफ 200 से अधिक पूर्व नौकरशाहों ने लिखा पत्र, कर दी माफी मांगने की मांग, जान लीजिए पूरा मामला

इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी द्वारा संसद के भीतर और बाहर किए गए ऐसे कृत्य सार्वजनिक विमर्श के स्तर को गिराते हैं और संसद की कार्यवाही में बाधा डालते हैं, जिससे सार्वजनिक समय और संसाधनों की भी हानि होती है.

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राहुल गांधी के खिलाफ पूर्व नौकरशाहों ने लिखा खत
NDTV
नई दिल्ली:

संसद परिसर में हाल की घटनाओं को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए 200 से अधिक सेवानिवृत्त नौकरशाहों और पूर्व सैनिक अधिकारियों ने एक संयुक्त पत्र जारी किया है. इस पत्र में संसद की गरिमा और मर्यादा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की गई है.17 मार्च को जारी इस पत्र में कहा गया है कि भारतीय संसद देश की संवैधानिक व्यवस्था का सर्वोच्च मंच है, जहां जनता की सामूहिक इच्छा अभिव्यक्त होती है और कानूनों का निर्माण होता है.संसद की गरिमा केवल परंपरा का विषय नहीं बल्कि लोकतंत्र की संवैधानिक आत्मा का अनिवार्य तत्व है. इसलिए संसद भवन और उसके पूरे परिसर में सांसदों के आचरण का स्तर सर्वोच्च होना चाहिए.

पत्र में आगे कहा गया है कि संसदीय परंपराओं के अनुसार लोकसभा और राज्यसभा के कक्षों के साथ-साथ संसद की सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी भी संसद परिसर का अभिन्न हिस्सा हैं और इन सभी स्थानों पर वही मर्यादा लागू होती है. सेवानिवृत्त अधिकारियों ने 12 मार्च की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन माननीय अध्यक्ष द्वारा संसद परिसर में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन या विरोध पर स्पष्ट रोक के बावजूद विपक्षी सांसदों ने निर्देशों की अवहेलना की.

राहुल गांधी और अन्य सांसदों को संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय और बिस्कुट लेते हुए देखा गया, जिसे पत्र में अनुचित और संसदीय गरिमा के खिलाफ बताया गया है. सेवानिवृत्त नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों का कहना है कि संसद की सीढ़ियां किसी भी तरह के राजनीतिक प्रदर्शन या प्रतीकात्मक गतिविधियों के लिए स्थान नहीं हैं और इस तरह का व्यवहार संस्था के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है.

इस पत्र में यह भी कहा गया है कि संसद को लोकतंत्र का मंदिर माना जाता है, जहां राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर गंभीर विमर्श होना चाहिए. लेकिन इस तरह की गतिविधियां संसद को विचार-विमर्श के मंच के बजाय राजनीतिक नाटकीयता का मंच बना देती हैं. आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी द्वारा संसद के भीतर और बाहर किए गए ऐसे कृत्य सार्वजनिक विमर्श के स्तर को गिराते हैं और संसद की कार्यवाही में बाधा डालते हैं, जिससे सार्वजनिक समय और संसाधनों की भी हानि होती है.

सेवानिवृत्त अधिकारियों ने इस बात पर विशेष चिंता जताई है कि यह आचरण ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जो नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद पर है.सरकार से सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन ऐसा करते हुए देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए.संसद सदस्यों को देश के एक अरब से अधिक नागरिकों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का प्रतिनिधि और संरक्षक होना चाहिए. सेवानिवृत्त नौकरशाहों ने राहुल गांधी और उनके सहयोगियों के आचरण को लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला बताते हुए इसे अनुचित ठहराया है.राहुल गांधी से देश से माफी मांगने और अपने आचरण पर आत्ममंथन करने की अपील की गई है, ताकि संसद की गरिमा, अधिकार और संस्थागत पवित्रता को बनाए रखा जा सके.

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