'प्रोजेक्‍ट चीता' दीर्घकालीन योजना, अभी कोई भी निष्‍कर्ष निकालना जल्‍दबाजी : चीतों की मौत पर केंद्र सरकार

सरकार का कहना है कि इस प्रोजेक्‍ट का कार्यान्वयन निर्धारित एक्‍शन प्‍लान के मुताबिक किया जा रहा है. इसकी  देखरेख के लिए सरिस्का और पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की सफल वापसी में शामिल प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और अधिकारियों की संचालन समिति गठित की गई है.

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चीतों की मौत के कारणों की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से परामर्श किया जा रहा है.
नई दिल्‍ली:

मध्‍य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत ने एक नई बहस छेड़ दी है. हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि प्रोजेक्ट चीता को अभी एक साल पूरा होना बाकी है, ऐसे में सफलता और विफलता को लेकर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी क्योंकि यह एक दीर्घकालिक परियोजना है. साथ ही सरकार का कहना है कि वैश्विक अनुभव खासतौर पर दक्षिण अफ्रीका के अनुभव से पता चलता है कि अफ्रीकी देशों में चीतों की पुन: वापसी के शुरुआती चरण में चीतों की मृत्यु की दर 50 फीसदी से अधिक रही है. भारत में चीतों को सात दशकों के बाद भारत वापस लाया गया है. ऐसे में इतने बड़े प्रोजेक्ट में उतार-चढ़ाव आना तय है. 

भारत सरकार ने देश में चीतों को वापस लाने का महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट शुरू किया है. इसके तहत मध्‍य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीतों को लाया गया है. प्रोजेक्‍ट चीता को मध्‍य प्रदेश वन विभाग, भारतीय वन्‍यजीव संस्‍थान, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के चीता विशेषज्ञों के सहयोग से वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत राष्‍ट्रीय बाघ संरक्षण प्राणिकरण सफल बनाने में जुटा है. 

चीतों की 24 घंटे की जा रही है निगरानी 
सरकार का कहना है कि भारत में इस प्रोजेक्‍ट का कार्यान्वयन निर्धारित एक्‍शन प्‍लान के मुताबिक किया जा रहा है. साथ ही इसकी  देखरेख के लिए सरिस्का और पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की सफल वापसी में शामिल प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और अधिकारियों की एक संचालन समिति भी गठित की गई है. साथ ही एक निगरानी टीम द्वारा प्रत्येक चीते की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है. 

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मौत प्राकृतिक कारणों से हुई चीतों की मौत 
कूनो में स्थानांतरित 20 वयस्क चीतों में से पांच वयस्‍क चीतों की मौत हो गई है. सरकार के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में इन सभी चीतों की मौतें प्राकृतिक कारणों से हुई है. साथ ही कहा है कि मीडिया में ऐसी रिपोर्टें हैं जिनमें चीतों की मौत के लिए रेडियो कॉलर आदि को जिम्मेदार ठहराया गया है. ऐसी रिपोर्टें किसी वैज्ञानिक प्रमाण पर आधारित नहीं हैं बल्कि अटकलों और अफवाहों पर आधारित हैं. 

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दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया के विशेषज्ञों से ले रहे परामर्श 
सरकार की ओर से कहा गया है कि चीतों की मौत के कारणों की जांच के लिए दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया के अंतरराष्ट्रीय चीता विशेषज्ञों/पशु चिकित्सकों से नियमित परामर्श किया जा रहा है. मौजूदा निगरानी प्रोटोकॉल, सुरक्षा स्थिति और पशु चिकित्सा सुविधाओं की समीक्षा स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा की जा रही है. चीता प्रोजेक्‍ट संचालन समिति परियोजना की बारीकी से निगरानी कर रही है और उसने अब तक इसके कार्यान्वयन पर संतोष व्यक्त किया है. 

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