37 लाख को काटा, 54 लोगों की हुई मौत, यहां देखिए आवारा कुत्तों के 'आतंक' के सभी आंकड़े

आवारा कुत्तों की समस्या और कुत्ता काटने के मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट कर रहा है. आइए देखते हैं कि भारत में कितनी बड़ी समस्या हैं कुत्ते और ये हर साल कितने लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं.

विज्ञापन
Read Time: 6 mins
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट इन दिनों देश में आवार कुत्तों की समस्या पर सुनवाई कर रहा है. इस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारा शामिल हैं. अदालत अदालतों, स्कूलों और अस्पतालों जैसी जगहों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रही है.अदालत ने पूछा है कि इन जगहों पर कुत्तों की मौजूदगी होनी चाहिए. पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में कुत्तों को लेकर चल रहे मामलों को अपना यहां मंगवा लिए थे. इन मामलों पर एक साथ सुनवाई हो रही है. आइए जानते हैं कि देश में अवारा कुत्ते कितनी बड़ी समस्या हैं. अवारा कुत्ते हर साल कितने लोगों को काटते हैं और हर साल इससे कितनी मौतें होती हैं.

सरकार ने लोकसभा में कुत्तों पर क्या जानकारी दी

मछली पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ने कुत्ता काटने की समस्या को लेकर बीते साल चार फरवरी को लोकसभा में जानकारी दी थी. उन्होंने डीएमके के अरुण नेहरू के सवाल के जबाव में बताया था कि जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक देश के ग्रामीण इलाकों में कुत्ता काटने की कुल 21 लाख 95 हजार 122 घटनाएं दर्ज की गई थीं. उन्होंने बताया था कि देश के ग्रामीण इलाकों में कुत्तों के काटने से 37 इंसानों की मौत के मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं दूसरे जानवरों के काटने की पांच लाख चार हजार 728 मामले दर्ज किए गए थे. इन जानवरों के काटने से 11 लोगों की मौत होने की जानकारी सरकार ने लोकसभा में दी थी. सरकार ने बताया था कि  इस दौरान आवारा कुत्तों ने 15 साल से कम आयु के पांच लाख 19 हजार 704 बच्चों को काटा था.

देश भर में आवारा के कुत्ता काटने के कितने मामले सामने आए

वहीं प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) की एक अप्रैल 2025 के एक बयान के मुताबिक 2024 में देश भर में कुत्तों के काटने के कुल 37 लाख 15 हजार 713 मामले दर्ज किए गए थे. इससे पहले 2023 में कुत्तों के काटने के 30 लाख 52 हजार  521 मामले देश भर में दर्ज किए गए थे. इस तरह एक साल में देश में कुत्ता काटने के मामलों में 20 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2022 में देश में कुत्तों के काटने के 21 लाख 89 हजार 909 मामले दर्ज किए गए थे. 

देश में कुत्ता काटने के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में सामने आए थे. वहां कुत्ता काटने के चार लाख 85 हजार 345 मामले दर्ज किए गए थे. इस मामले में चार लाख 80 हजार 427 मामलों के साथ तमिलनाडु दूसरे नंबर पर था. तीन लाख 92 हजार 837 मामलों के साथ गुजरात तीसरे नंबर पर था.केंद्रशासित लक्षद्वीप देश में एक ऐसी जगह थी, जहां कुत्ता काटने का कोई मामला सामने नहीं आया था.

Advertisement

आवारा कुत्तों के काटने से कहां होती हैं सबसे अधिक मौतें

वहीं अगर देश में रेबीज के संक्रमण से होने वाली मौतों की बात करें तो 2024 में ऐसी 54 मौतें दर्ज की गई थीं. रैबीज के संक्रमण का सबसे बड़ा स्रोत कुत्ता काटना ही है. इससे पहले 2023 में देश में इससे 50 मौतें दर्ज की गई थीं तो 2022 में केवल 21 मौतें दर्ज की गई थीं. रेबीज से होने वाली मौतों के मामले में भी महाराष्ट्र सबसे आगे है. वहां 2024 में कुल 14 मौतें दर्ज की गई थीं. छह-छह मौतों के साथ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर थे. देश में रेबीज से होने वाली मौतों में कुत्ता काटने से होने वाली मौतें सबसे अधिक हैं.

कुत्ता काटने की समस्या केवल भारत की ही नहीं है, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है. कुत्ते कुत्ता काटने और उनसे होने वाली मौतों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े भी कम चौकाने वाली नहीं हैं. इस संगठन के मुताबिक दुनिया में कुत्तों के काटने से होने वाली 59 हजार मौतों में से 40 फीसद मौतें 15 साल से कम आयु के बच्चों की हैं. 

Advertisement

आवारा कुत्तों को कैसे नियंत्रित कर रही है सरकार

 ये आंकड़े बताते हैं कि देश में आवारा कुत्ते एक बड़ी समस्या बन गए हैं. इसे देखते हुए सरकार ने पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के तहत पशु जन्म नियंत्रण को लेकर नियम बनाए हैं. इसमें आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने, रेबीज को रोकने और मानव-कुत्ता संघर्ष को कम करने के लिए आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का प्रावधान शामिल है.साल 2030 तक सरकार की कोशिश रेबीज से होने वाली मौतों को शून्य पर लाना है. इसको लेकर  सरकार नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम चला रही है. साल 2019 की पशु गणना के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुत्तों की आबादी डेढ़ करोड़ से अधिक थी.

सुप्रीम कोर्ट देश भर की अदालतों में कुत्तों की समस्या को लेकर चल रहे मामलों की एक साथ सुनवाई कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा मामला

आवारा कुत्तों से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट और देश के अलग-अलग हाई कोर्टों में चल रहे थे. सुप्रीम कोर्ट के दो जजों के पीठ ने अंग्रेजी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक खबर का संज्ञान लेते हुए हुए कुत्ता काटने की घटनाओं को चिंताजनक और परेशान करने वाला बताया. अदालत ने जिस खबर का संज्ञान लिया वह दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने से हुई छह साल की एक बच्ची की मौत की थी. 

सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त की सुनवाई में दिल्ली और एनसीआर में आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखने का आदेश दिया.अदालत ने कहा कि शेल्टर होम में रखे गए कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया. लेकिन उन्हें फिर सड़कों पर न छोड़ा जाए. अदालत ने कहा कि इस आदेश में बाधा डालने वाले व्यक्ति या संगठन के खिलाफ अवमानना का केस चलेगा. शीर्ष अदालत की इस फैसले का विरोध हुआ. इस पर यह मामला तीन जजों के पीठ को सौंपा गया. इस पीठ ने देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर चल रहे सभी मामलों को अपने पास ट्रांसफर कर लिया. पीठ ने 22 अगस्त को पहले के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी इलाके में वापस छोड़ दिया जाएगा,जहां से उन्हें पकड़ा गया था.लेकिन रेबीज संक्रमित कुत्ते शेल्टर होम में ही रखे जाएंगे. 

ये भी पढ़ें: कोलकाता में जहां हुई ED रेड वहीं पहुंची ममता, नाराज होकर बोलीं- TMC के दस्तावेज उठा ले गए

Advertisement
Featured Video Of The Day
Sucherita Kukreti | Iran Israel War: Donald Trump की युद्ध नीति पर समर्थक क्या बोले? | NDTV India
Topics mentioned in this article