- वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत ने थर्मल पावर प्लांट्स पर विशेष ध्यान देकर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की है
- ईरान संकट के चलते LNG की कमी और ईंधन कीमतों में वृद्धि के बावजूद कोयले का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया गया
- गर्मी के मौसम में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए थर्मल पावर प्लांट्स का मेंटेनेंस अस्थायी रूप से स्थगित
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश में जरूरत के मुताबिक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पावर सेक्टर ने बड़े स्तर पर तैयारी की है. ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए सरकार और संबंधित मंत्रालयों ने कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स पर विशेष जोर दिया है, ताकि गर्मी के दौरान बढ़ने वाली बिजली की मांग को बिना किसी रुकावट के पूरा किया जा सके.
ईरान‑गैस संकट का असर और भारत की तैयारी
युद्ध के दौरान ईरान द्वारा कतर और कई अन्य गल्फ देशों के गैस प्रोडक्शन प्लांट्स पर मिसाइल हमलों के कारण LNG और अन्य ऊर्जा उत्पादों का उत्पादन प्रभावित हुआ है. इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कार्गो जहाजों की आवाजाही भी बाधित हुई है. इस स्थिति के कारण देश में LNG की उपलब्धता में कमी और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी जैसी चुनौतियां सामने आई हैं. इन हालात से निपटने के लिए थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया जा रहा है.
गर्मी में बढ़ेगी पीक डिमांड
आने वाले गर्मी के सीजन में बिजली की पीक डिमांड बढ़ने की संभावना को देखते हुए विद्युत मंत्रालय ने उपाय तेज कर दिए हैं. आयातित कोयले पर आधारित बिजली संयंत्रों की क्षमता का अधिकतम उपयोग करने के लिए उन्हें पूरी तरह ऑपरेशनल किया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित आपूर्ति संकट से बचा जा सके.
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मेंटेनेंस स्थगित, नई क्षमता पर जोर
गर्मी के मौसम में लगभग 10,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली क्षमता सुनिश्चित करने के लिए थर्मल पावर प्लांट्स के मेंटेनेंस को अस्थायी रूप से स्थगित किया जा रहा है. इसके साथ ही निर्माणाधीन थर्मल, हाइड्रो और रिन्यूएबल ऊर्जा परियोजनाओं में उत्पादन शुरू करने की प्रक्रिया को अप्रैल से जून 2026 के दौरान तेज किया जाएगा.
विद्युत मंत्रालय का बयान
विद्युत मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी एक रिलीज में कहा कि भारत की वर्तमान स्थापित बिजली क्षमता 531 गीगावाट से अधिक है. यह क्षमता कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा जैसे विविध स्रोतों पर आधारित है, जिसमें गैर‑जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है. मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था करीब 5 लाख सर्किट किलोमीटर के मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और 120 गीगावाट से अधिक अंतर‑क्षेत्रीय ट्रांसफर क्षमता द्वारा समर्थित है, जिससे देश के अलग‑अलग हिस्सों में भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है.
कोयले का मजबूत बफर स्टॉक
उधर, कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में कोयले का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है. 6 अप्रैल 2026 तक तापीय विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार 55.18 मिलियन टन था, जो हालिया औसत खपत के आधार पर लगभग 24 दिनों के लिए पर्याप्त माना जा रहा है. कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजीव कुमार कस्सी के मुताबिक, इस बफर स्टॉक के अलावा लगभग 171.90 मिलियन टन कोयला खदानों और परिवहन प्रणाली में उपलब्ध है. इसमें कोल इंडिया लिमिटेड, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड, कैप्टिव खदानें, बंदरगाह और परिवहन भंडार शामिल हैं.
उपभोक्ताओं पर बोझ न पड़े, कंपनियों का फैसला
कोल इंडिया लिमिटेड और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड ने विस्फोटकों की कीमतों में बढ़ोतरी का भार उपभोक्ताओं पर न डालने का फैसला किया है. दोनों कंपनियों ने बढ़ी हुई इनपुट लागत को स्वयं वहन किया है, ताकि बिजली उत्पादन और आपूर्ति पर इसका असर न पड़े.
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ई‑नीलामी के जरिए आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश
कोयला मंत्रालय के अनुसार, कोल इंडिया लिमिटेड ने मार्च 2026 में ई‑नीलामी की आवृत्ति बढ़ाते हुए 32.53 मिलियन टन कोयले की पेशकश की थी, जिसमें से 13.32 मिलियन टन यानी करीब 40.94 प्रतिशत को बुक किया गया. यह कोयले की पर्याप्त उपलब्धता का संकेत है. वहीं अप्रैल 2026 के लिए 25.80 मिलियन टन कोयले की पेशकश के साथ 30 ई‑नीलामी की योजना बनाई गई है. अब तक 3.20 मिलियन टन की पेशकश की जा चुकी है, जिसमें से 1.24 मिलियन टन यानी करीब 38.75 प्रतिशत बुक हो चुका है.














