प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने'सेवा तीर्थ' में केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ एक हाई लेवल बैठक की. बैठक में दो मुख्य विषयों पर बातचीत की गई. पहला विषय था 'ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस' (कारोबार में आसानी) और 'ईज ऑफ लिविंग' (जीवन यापन में आसानी) के लिए नियमों में ढील और अन्य सुधार. जबकि दूसरा विषय था 'आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना'.
सचिवों ने विभागों के कामों की जानकारी दी
बातचीत के दौरान, सचिवों ने इन दो मुख्य विषयों के अनुरूप अपने मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए जा रहे अहम कदमों के बारे में बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री के विजन को ठोस नतीजों में बदलने के लिए चल रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला, साथ ही सेक्टर-खास चुनौतियों पर चर्चा की और गवर्नेंस व सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए अपनी भविष्य की रणनीतियों की रूपरेखा भी बताई.
PM ने होल-ऑफ-गवर्नमेंट को अपनाने पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' दृष्टिकोण को अपनाने और विभागों के बीच बनी बाधाओं को तोड़ने के महत्व पर जोर दिया. इंटीग्रेटेड प्लानिंग और तालमेल के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने विभागों के बीच तालमेल और सही जानकारी के आधार पर फैसले लेने के लिए एक असरदार प्लेटफॉर्म के तौर पर 'पीएम गतिशक्ति' के व्यापक इस्तेमाल को बढ़ावा दिया. प्रधानमंत्री ने सचिवों से कहा कि वे लोगों के जीवन पर योजनाओं के ठोस असर पर ध्यान दें.
PM मोदी ने विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग व समन्वय का दृष्टिकोण अपनाने तथा विभागीय रूढ़ियों को तोड़ने पर जोर दिया. उन्होंने समेकित नियोजन और समन्वय के महत्व पर जोर देते हुए, विभागों के बीच तालमेल और सही जानकारी के आधार पर फैसले लेने के लिए 'पीएम गतिशक्ति' को एक असरदार प्लेटफॉर्म के तौर पर अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया.
विकसित भारत बनाने का लक्ष्य
सूत्रों के मुताबिक, सचिवों ने अपने-अपने मंत्रालयों के कामकाज और अलग-अलग सुधारों व लोगों के हित में उठाए गए अन्य कदमों में हुई प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए प्रस्तुतियां दीं. प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को 2047 तक एक विकसित देश बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जब देश अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा.
केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक के लगभग एक महीने बाद सचिवों की यह बैठक हुई। मंत्रिपरिषद की बैठक में मोदी ने कहा था कि सरकार को जीवन-यापन को सुगम करने, कारोबार को आसान बनाने और युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए.
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