सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI ने क्यों कहा- आपकी याचिका शॉपिंग मॉल की तरह लगती है

Supreme Court Hearing: याचिका दायर करने वाले ने सुप्रीम कोर्ट से तमाम राज्यों में सरकारी विभागों की लापरवाही से होने वाली मौतों को लेकर नियम बनाने की मांग की थी, इस याचिका में कई मुद्दों का जिक्र किया गया था.

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सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को किया खारिज

Supreme Court Hearing: सुप्रीम कोर्ट में सार्वजनिक प्राधिकरणों की लापरवाही से होने वाली मौतों पर नियम बनाने को लेकर एक याचिका दायर की गई. इसमें मांग की गई थी कि अथॉरिटीज की लापरवाही के चलते हुई मौतों को लेकर जिम्मेदारी तय की जाए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को शॉपिंग मॉल की तरह बता दिया. कोर्ट ने कहा कि याचिका बहुत व्यापक है और इसमें मांगी गई राहतों को लागू करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा. आइए जानते हैं कि इस याचिका में ऐसा क्या था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने शपिंग मॉल की तरह बताया. 

याचिका में ऐसा क्या था?

दरअसल याचिका दायर करने वाले ने एक ही याचिका में कई अलग-अलग मुद्दे शामिल कर लिए थे, यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे एक शॉपिंग मॉल की तरह बता दिया. इसमें असुरक्षित ढांचा, अधूरे निर्माण कार्य, खराब वायरिंग से करंट लगना और सरकारी लापरवाही से होने वाली मौतों का जिक्र किया गया था. इसके अलावा हिरासत में मौत, पुल गिरने और अन्य दुर्घटनाओं का भी जिक्र किया गया. इतने मामलों को एक ही याचिका में शामिल किए जाने पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कहा कि "आपकी याचिका तो शोरूम या शॉपिंग मॉल की तरह है. गड्ढों से लेकर पुलिस भवन, पुलों के अधूरे निर्माण, अंडरपास तक सब कुछ इसमें शामिल है."

सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई थी?

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से ऐसे तमाम मामलों को लेकर एक SOP बनाने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता की तरफ से ये दलील दी गई कि इन मामलों को लेकर अधिकारियों को बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया. इसीलिए सरकारी विभागों की लापरवाही से होने वाली मौतों पर जवाबदेही तय करने का कोई मैकेनिज्म होना चाहिए. 

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया इनकार?

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए ये भी बताया कि इसमें किन चीजों को लेकर मुश्किल हो सकती है. कोर्ट ने कहा कि सभी राज्यों की आर्थिक स्थिति अलग-अलग है, इसलिए पूरे देश के लिए एक समान SOP बनाना व्यावहारिक नहीं होगा. साथ ही राज्यों की वित्तीय सीमाएं भी अलग हैं. सभी के लिए एक नियम बनाने पर संसाधनों नहीं होने का तर्क सामने आ सकता है. कुछ राज्य तो सरकारी कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए भी उधार ले रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतने व्यापक मुद्दों पर सामान्य निर्देश देना संभव नहीं है, जब तक कि मामला किसी विशेष राज्य से संबंधित न हो. 

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