बेल या जेल? कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का क्या होगा, आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के जमानत पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश को कांग्रेस नेता ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी है.

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत पर आएगा फैसला
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  • कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
  • जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ करने वाली है सुनवाई
  • खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है
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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट आज कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करने वाला है, जिसमें उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें असम पुलिस द्वारा दर्ज एक आपराधिक मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी. यह मामला मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ कथित टिप्पणी से जुड़ा है.

दो जजों की पीठ करेगी सुनवाई 

सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित कॉज लिस्ट के अनुसार, जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ 30 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करेंगे. खेड़ा ने शीर्ष अदालत में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दाखिल कर गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार किया गया था. यह याचिका रविवार की शाम को दाखिल की गई थी और इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है.


गुवाहाटी हाईकोर्ट ने छूट देने से किया था इनकार 

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब गुवाहाटी हाईकोर्ट की एकल पीठ, जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया, ने कांग्रेस नेता को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि खेड़ा अग्रिम जमानत के विशेषाधिकार के पात्र नहीं हैं. हाईकोर्ट ने कहा था, ''यह केवल मानहानि का मामला नहीं कहा जा सकता. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 339 के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनने के लिए सामग्री मौजूद है.

जानिए पूरा मामला 

इससे पहले खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी, जिसमें उन्हें सीमित अवधि के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी, ताकि वे असम में संबंधित अदालत से नियमित राहत प्राप्त कर सकें. हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने असम पुलिस की याचिका पर इस राहत पर रोक लगा दी थी. इसके बाद शीर्ष अदालत ने खेड़ा की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने स्टे हटाने की मांग की थी और अंतरिम सुरक्षा बढ़ाने से भी इनकार कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसके पहले के आदेशों में की गई टिप्पणियां असम की सक्षम अदालत को जमानत याचिका पर निर्णय लेने में प्रभावित नहीं करेंगी. यह विवाद उन आरोपों से जुड़ा है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि रिनिकी भुयान सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट, विदेशों में अघोषित लग्जरी संपत्तियां और शेल कंपनियों से संबंध हैं. गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें झूठे बयान, धोखाधड़ी, जालसाजी और मानहानि से जुड़े आरोप शामिल हैं. इस महीने की शुरुआत में असम पुलिस ने इस मामले में दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास पर छापेमारी की थी और हैदराबाद में भी जांच के सिलसिले में गई थी.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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