संसद का बजट सत्र बुधवार से शुरू हो गया है. चूंकि साल का पहला सत्र है, इसकी शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अभिभाषण दिया. अभिभाषण में उन्होंने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं. इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने जब G RAM G कानून का जिक्र किया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के सभी सांसदों ने मेज थपथपाई लेकिन विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष ने इस कानून को वापस लेने की मांग की.
अभिभाषण के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने इस कानून को लेकर कहा, 'ग्रामीण इलाकों में रोजगार और विकास के लिए विकसित भारत-G RAM G कानून बनाया गया है. इस नए सुधार से गांवों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी.'
राष्ट्रपति मुर्मू ने जैसे ही इस कानून का जिक्र किया, वैसे ही एनडीए सांसदों ने तारीफ करते हुए मेज थपथपाई. जबकि विपक्षी सांसदों ने खड़े होकर इसका विरोध किया और इस कानून को वापस लेने की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे.
क्या है G RAM G कानून?
संसद के शीतकालीन सत्र में इस कानून को पास किया गया है. विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन- ग्रामीण यानी VB-G RAM G के नाम से यह कानून लाया गया है. इसने 20 साल पुराने मनरेगा कानून की जगह ली है. मनरेगा की ही तरह ये कानून भी ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी देता था. हालांकि, मनरेगा में साल के 100 दिन के रोजगार की गारंटी मिलती थी, जबकि VB-G RAM G में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है.
विपक्ष को आपत्ति क्या है?
विपक्ष को इसलिए आपत्ति है, क्योंकि मनरेगा योजना महात्मा गांधी के नाम पर रखी गई थी. जबकि, नए कानून में महात्मा गांधी का नाम नहीं है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने महात्मा गांधी का नाम हटाकर उनका अपमान किया है. विपक्ष का ये भी आरोप है कि नया कानून राज्य सरकारों पर बोझ बढ़ाता है. मनरेगा का पूरा पैसा केंद्र सरकार देती थी, जबकि नए कानून में केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारों का भी हिस्सा रहेगा.














