कभी प्लंबर तो कभी कुक, पहचान छुपाकर 16 साल भारत में रहा PAK आतंकी, राजस्थान-हरियाणा में बनाए ठिकाने

राजस्थान और हरियाणा में पेंटर और इलेक्ट्रीशियन जैसे अन्य काम करने के बाद अब्दुल्ला ने पंजाब के मलेरकोटला गांव में बसने का फैसला किया. पूछताछ के दौरान अब्दुल्ला ने अपने और हारिस उर्फ “खरगोश” के भारत भर में खासकर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में फैले नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी.

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पहचान छुपाकर 16 साल भारत में रहा PAK आतंकी (सांकेतिक तस्वीर)
IANS

पाकिस्तान के लश्कर-ए- तैयबा का आतंकवादी भारत में पहचान छिपाकर 16 साल भारत में रहा है. वह कभी पेंटर, कभी कुक, कभी प्लंबर और इलेक्ट्रीशियन बनकर अलग-अलग जगहों पर रहा. अधिकारियों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी ने कुछ समय के लिए ढाबा चलाया, इस दौरान उसने शेयर बाजार में ट्रेडिंग करना सीखा. ढाबे से ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ, इसलिए उसने उसे बंद करने का फैसला किया. हालामकि, वह यूट्यूब से शेयर बाजार के बारे में काफी कुछ सीख चुका था. 

तीन राज्यों में बनाए ठिकानें

सोमवार को अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के बाहर आतंकी ठिकाने स्थापित करने का जिम्मा संभालने वाला लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग पेशे अपनाता रहा. लश्कर-ए-तैयबा के सबसे पुराने आतंकी अब्दुल्ला ने देश के विभिन्न हिस्सों जैसे राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में अपने ठिकानों के बारे में विस्तृत जानकारी दी. पूछताछ के दौरान उसने इन राज्यों में अपने ठहरने का पूरा ब्योरा दिया और यह भी बताया कि स्थानीय लोगों के बीच घुलने-मिलने के लिए उसने कौन-कौन से पेशे अपनाए.

2010 में जम्मू-कश्मीर में की थी घुसपैठ

ये जानकारी तब सामने आई, जब श्रीनगर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के एक 'गहरी पैठ वाले' अंतरराज्यीय मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया और अब्दुल्ला सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया, जो 16 साल से फरार था. अधिकारियों ने अनुसार, राजस्थान में छोटे-मोटे काम करने के बाद अब्दुल्ला ने नलसाजी (प्लंबिंग) का काम शुरू कर दिया, क्योंकि उसे पाकिस्तान से इसके बारे में कुछ बुनियादी जानकारी थी. उसने 2010 में उत्तरी हिस्से से जम्मू कश्मीर में घुसपैठ की थी.

उमर हारिस उर्फ खरगोश से था संपर्क

जम्मू कश्मीर में आतंकवाद रोधी ग्रिड में खरगोश' के उपनाम से जाने जाने वाले उमर हारिस के संपर्कों से जुड़ाव के बाद, उसने एक आधार कार्ड और फिर एक स्थायी खाता संख्या (पैन) कार्ड प्राप्त करने में कामयाबी हासिल की, ताकि वह अपने ग्राहकों से डिजिटल भुगतान प्राप्त कर सके. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर गांव के निवासी अब्दुल्ला ने अपना ठिकाना अमृतसर स्थानांतरित करने का फैसला किया था. हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पकड़े जाने के डर से उसने ऐसा नहीं किया. उसकी पंजाबी बोली पर उसकी अच्छी पकड़ थी. 

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पेंटर और इलेक्ट्रीशियन का किया काम

अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान और हरियाणा में पेंटर और इलेक्ट्रीशियन जैसे अन्य काम करने के बाद, अब्दुल्ला ने पंजाब के मलेरकोटला गांव में बसने का फैसला किया, जहां वह अपनी पंजाबी बोली में बात कर सकता था. इस आतंकी ने कुछ समय के लिए ढाबा चलाया, इस दौरान उसने शेयर बाजार में ट्रेडिंग करना सीखा. ढाबे से मुनाफा नहीं होने पर उसने उसे बंद कर दिया. गिरफ्तारी के समय उसके डीमैट खाते में 50,000 रुपये से अधिक का लाभ मार्जिन था और वह दूसरों को निवेश के टिप्स भी दे रहा था. अब्दुल्ला को इस महीने की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था और केंद्र शासित प्रदेश के बाहर उसके द्वारा बनाए गए संभावित नेटवर्क के बारे में उससे गहन पूछताछ की जा रही है.

अब्दुल्ला और एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक उस्मान उर्फ ​​खुबैब की गिरफ्तारी श्रीनगर पुलिस के लिए एक और बड़ी सफलता मानी जा रही है. अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान अब्दुल्ला ने अपने और हारिस उर्फ “खरगोश” के भारत भर में खासकर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में फैले नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी. उसने यह भी बताया कि फरार आतंकियों में से एक ने कश्मीर में एक आतंकी समर्थक की बेटी से शादी की थी.
 

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