मैं भारत सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकता...नेचुरल गैस सप्लाई की कमी पर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम

मिडिल ईस्ट संकट बीच एलपीजी/प्राकृतिक गैस और ईंधन सप्लाई पर विपक्षी नेताओं ने सरकार से संसद में विस्तृत बयान की मांग की. विपक्ष के किस नेता ने क्या कहा, जानिए

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मिडिल ईस्ट के संकट ने बढ़ाई भारत की सिरदर्दी
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  • मध्य पूर्व युद्ध के कारण भारत में एलपीजी और प्राकृतिक गैस की सप्लाई में कमी के राजनीतिक मुद्दे उठे हैं
  • कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने अमेरिका को तेल और गैस संकट का मुख्य जिम्मेदार बताया है
  • डीएमके सांसद टी.आर. बालू ने सरकार से एलपीजी कमी पर वैकल्पिक उपाय और रणनीति बनाने की मांग की है
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मध्य पूर्व युद्ध के गहराते संकट के बीच भारत में तेल‑गैस सप्लाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हैं. कांग्रेस, डीएमके और शिवसेना (उद्धव) के सांसदों ने एलपीजी/प्राकृतिक गैस और ईंधन सप्लाई पर सरकार की रणनीति, विकल्प और पारदर्शिता को लेकर अपनी‑अपनी बात रखी. कांग्रेस के लोकसभा सांसद कार्ति चिदंबरम ने चेन्नई में एलपीजी सप्लाई में कमी के मसले पर एनडीटीवी से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि नेचुरल गैस की सप्लाई में कमी के लिए मैं भारत सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकता.

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जो युद्ध छेड़ा है, उसकी वजह से ही दुनियाभर में तेल और गैस का दुर्भाग्यपूर्ण संकट खड़ा हुआ है. इससे निपटने के लिए वैकल्पिक सप्लाई चेन बनाने होंगे. मैं भारत सरकार को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकता क्योंकि इसे पहले से भांपना संभव नहीं था,” कार्ति चिदंबरम के मुताबिक, यह युद्ध अमेरिका ने शुरू किया और वही इस गैस और तेल संकट के लिए जिम्मेदार है.

डीएमके सांसद टी.आर. बालू की मांग

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके के सांसद टी.आर. बालू ने एनडीटीवी से कहा कि एलपीजी की कमी से निपटने के लिए वैकल्पिक उपाय सरकार को करने होंगे. हर राज्य सरकार की तरफ से ज़्यादा नेचुरल गैस सप्लाई की मांग होगी, और सरकार को इससे निपटने के लिए रणनीति बनानी होगी.

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शिवसेना (उद्धव) के सांसद अनिल देसाई की चेतावनी

शिवसेना (उद्धव गुट) के लोकसभा सांसद अनिल देसाई ने कहा कि मध्य पूर्व एशिया में युद्ध की वजह से दुनियाभर में ऊर्जा संकट खड़ा हो रहा है. एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने कहा कि युद्धविराम की संभावना नहीं दिख रही. नेचुरल गैस के बाद पेट्रोल‑डीज़ल की सप्लाई और कीमतें बढ़ने की भी आशंका है. ऐसे में भारत सरकार को एसेन्शियल कमोडिटीज़ (खाद्य सामग्री) की सप्लाई बनाए रखने के साथ‑साथ दवाइयों की उपलब्धता और महंगाई पर असर से निपटने की तैयारी करनी होगी. साथ ही, ब्लैक मार्केटिंग और होर्डिंग रोकने के लिए भी सरकार को गंभीर पहल करनी होगी.

सरकार से संसद में विस्तृत बयान की मांग

विपक्षी सांसद चाहते हैं कि मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध का भारत के हितों पर पड़ रहा असर सरकार संसद में समूचे तथ्य रखकर बताए. कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने एनडीटीवी से कहा, “हम चाहते हैं कि मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध का भारत पर पड़ रहे असर पर संसद में चर्चा हो. सरकार को संसद में बताना चाहिए कि देश में नेचुरल गैस का कितना स्टॉक उपलब्ध है, क्योंकि आज सरकार ने गैस की राशनिंग शुरू कर दी है. तेल की कीमतों में भी उथल‑पुथल चल रही है. हम चाहते हैं कि सरकार ने किस वजह से देश में एलपीजी सप्लाई की राशनिंग शुरू की—इन सब मसलों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए.”
 

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