ओडिशा में जनगणना का पहला चरण 16 अप्रैल से शुरू होगा और 15 मई तक चलेगा. यह जानकारी जनगणना संचालन निदेशक (DCO) और नागरिक पंजीकरण निदेशक (DCR) निखिल पवन कल्याण ने दी. भुवनेश्वर के यूनिट-9 स्थित जनगणना निदेशालय कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तारीखों की घोषणा करते हुए, कल्याण ने बताया कि जनगणना का आयोजन केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन जनगणना निदेशालय और ओडिशा सरकार के राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के समन्वय से किया जाएगा.
जनगणना गणक 16 अप्रैल से 33 सवाल पूछेंगे
परिवार के लिए अनाज की पसंद, इंटरनेट की उपलब्धता, स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर का मालिकाना हक, पीने के पानी का स्रोत, और घर में शौचालय का प्रकार- ये उन 33 सवालों में शामिल हैं, जो 16 अप्रैल से पूरे ओडिशा में चलाए जाने वाले हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) के दौरान पूछे जाएंगे.
सेल्फ-एन्यूमरेशन (SE) पोर्टल चालू होगा
DCO और DCR ने आगे बताया कि 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक एक सेल्फ-एन्यूमरेशन (SE) पोर्टल चालू रहेगा, जिसके जरिए नागरिक अपनी जानकारी ऑनलाइन जमा कर सकेंगे. नागरिकों द्वारा दी गई इस जानकारी को बाद में प्रशिक्षित गणकों और पर्यवेक्षकों द्वारा सत्यापित किया जाएगा, जो 16 अप्रैल से 15 मई के बीच घर-घर जाकर सर्वे करेंगे.
भारत की पहली डिजिटल जनगणना
इस विशाल अभियान के लिए एक मज़बूत प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा कर लिया गया है. गोपबंधु प्रशासन अकादमी में 67 मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षित किया गया. इन ट्रेनरों ने 1,552 फील्ड ट्रेनरों को तैयार किया है, जो इस समय पूरे राज्य में 1,00,875 गणकों और 17,282 पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं. प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को गणक के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि हाई स्कूल के शिक्षक पर्यवेक्षक के तौर पर काम करेंगे। डेटा संग्रह एक मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके किया जाएगा.
बनाए जाएंगे डिजिटल हाउस लिस्टिंग ब्लॉक
यह पहली बार है जब भारतीय जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी और इसमें सेल्फ-एन्यूमरेशन (स्वयं जानकारी देने) का भी प्रावधान शामिल होगा. इस अभ्यास में CMMS पोर्टल का भी उपयोग किया जाएगा और डिजिटल हाउस लिस्टिंग ब्लॉक बनाए जाएंगे.
ज़िला कलेक्टर और नगर आयुक्त मुख्य जनगणना अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे, जबकि अतिरिक्त ज़िला कलेक्टर ज़िला जनगणना अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे. शहरी स्थानीय निकायों के कार्यकारी अधिकारी और तहसीलदार उनकी देखरेख में प्रभारी अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे. राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग इस कार्यक्रम के लिए नोडल एजेंसी है. प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को गणनाकार के रूप में लगाया जाएगा, जबकि हाई स्कूल के शिक्षक पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करेंगे.
पहली बार डिजिटल जनगणना
विशेष रूप से, यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें पहली बार स्व-गणना (self-enumeration) की सुविधा शुरू की जा रही है. ऑनलाइन जमा किए गए डेटा का सत्यापन गणनाकारों द्वारा क्षेत्र के दौरों के दौरान किया जाएगा. इस प्रक्रिया में हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLBs) बनाने के लिए CMMS पोर्टल का उपयोग भी शामिल होगा.
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