- नोएडा के फेज-2 में मजदूर न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें हिंसक घटनाएं भी हुईं
- मजदूरों का आरोप है कि वे कम वेतन में ज्यादा समय तक काम करते हैं, उन्हें ओवरटाइम का उचित भुगतान नहीं मिलता
- प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कई जगह लाठीचार्ज किया और अफवाह फैलाने वाले हैंडल के खिलाफ FIR दर्ज की
नोएडा में सैकड़ों-हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं. न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर मजदूर सोमवार को प्रदर्शन कर रहे हैं. कई जगहों पर ये प्रदर्शन हिंसक भी हो गया. नोएडा के फेज-2 में प्रदर्शनकारी मजदूरों ने कई गाड़ियों को फूंक दिया. हालात को देखते हुए पुलिस अलर्ट पर है. कई जगहों पर हालात बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा. वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर सभी मजदूर यूनियन से बातचीत करने का आदेश दिया है.
सबसे खराब हालात नोएडा फेज-2 में हैं. यहां हिंसक घटनाएं हुई हैं. मजदूरों ने कई जगहों पर गाड़ियों में तोड़फोड़ की और कुछ कंपनियों में आगजनी की घटनाएं भी हुईं, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है.
प्रशासन की कोशिश है कि बातचीत के जरिए हालात को जल्द से जल्द सामान्य किया जाए लेकिन मजदूर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. मजदूरों को शांत कराने के लिए डिप्टी लेबर कमिश्नर, एडिशनल डीसीपी और कई प्रशासनिक अधिकारी फेज-2 पहुंचे. मजदूरों से लगातार बातचीत की जा रही है और उनकी मांगों को समझने की कोशिश हो रही है.
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5 पॉइंट्स में समझें अब तक क्या हुआ?
- मजदूरों का प्रदर्शन: नोएडा का फेज-2 प्रदर्शन का केंद्र रहा. यहां सैकड़ों कंपनियां हैं. हजारों की संख्या में मजदूर सड़कों पर उतर आए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.
- प्रदर्शन की वजह: मजदूरों का आरोप है कि उनकी मांगों को अनसुना कर दिया जाता है. उनका कहना है कि काम ज्यादा होने के बावजूद तनख्वाह कम है. छुट्टी और बोनस भी नहीं मिलता.
- हालात कहां बिगड़े: मजदूरों का ये प्रदर्शन कई जगहों पर हिंसक हुआ. नोएडा फेज-2 में सबसे ज्यादा हालात बिगड़े. पुलिस टीमें लगातार पेट्रोलिंग कर रही है. हालात संभालने के लिए RRF तैनात की गई है.
- पुलिस ने क्या किया: कई जगहों पर हालात संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. यूपी पुलिस आंदोलन भड़काने के लिए दो सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ FIR दर्ज करने जा रही है.
- सरकार का क्या है कहना: सरकार बातचीत के जरिए इसे संभालने की कोशिश कर रही है. सीएम योगी ने 24 घंटे के भीतर मजदूरों से बात कर उनकी समस्या का समाधान करने का आदेश दिया है.
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प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं मजदूर?
ज्यादातर प्रदर्शनकारी मजदूरों का कहना है कि वे महीने में 15 हजार रुपये से भी कम कमाते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि वे इतनी कम तनख्वाह में अपना गुजारा कैसे कर सकते हैं? कइयों ने यह भी कहा कि उनसे रोजाना 12 घंटे काम करवाया जाता है. मजदूरों ने 8 घंटे की शिफ्ट करने की मांग की है.
विरोध कर रही मजदूरों में से एक लक्ष्मी ने कहा, 'हम बस दो चीजें मांग रहे हैं. एक है ओवरटाइम का पैसा और दूसरी है महीने का कम से कम 20 हजार रुपये. हमारी कंपनी में हमारा शोषण हो रहा है. हमें सही समय पर खाना नहीं दिया जाता और महिलाओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं है.'
एक और प्रदर्शनकारी मजदूर ने कहा कि मजदूरों को कम से कम 800 रुपये रोजाना मिलने चाहिए. अभी रोजाना 300-400 रुपये कमाते हैं. एक महिला ने कहा कि एलपीजी से लेकर कमरे का किराया और स्कूल की फीस तक, सबकुछ महंगा होता जा रहा है. लेकिन हमारी तनख्वाह नहीं बढ़ रही है. महीने के 13,000 रुपये में हम गुजारा कैसे करेंगे?
प्रदर्शन में शामिल राजेश ने कहा कि उन्हें 8 घंटे की शिफ्ट के लिए कम से कम 20 हजार रुपये मिलने चाहिए. उन्होंने कहा, 'हम अपना गुजारा नहीं कर पा रहे हैं. हम अपने बच्चों को कैसे पालेंगे?'
मजदूरों का कहना है कि उनसे हर दिन 10-12 घंटे काम करवाया जाता है. ओवरटाइम का सही भुगतान नहीं होता. छुट्टी और बोनस जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं.
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क्या चाहते हैं मजदूर?
- न्यनतूम वेतन बढ़ाकर 26 हजार रुपये महीना किया जाए.
- ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से मिले.
- काम के घंटे तय हो और काम का ज्यादा दबाव न हो.
- हर हफ्ते एक दिन की छुट्टी मिली.
- सैलरी समय पर बैंक खाते में ट्रांसफर की जाए.
- श्रम कानून का सख्ती से पालन किया जाए.
सीएम योगी ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मजदूरों के इस प्रदर्शन पर कहा कि नक्सलवाद को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने कहा कि हर मजदूर को मिले सम्मानजनक मानदेय, सुरक्षित वातावरण और मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं. उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयां श्रम कानूनों का पालन करें और मजदूरों की समस्याओं का समय पर समधान करें.
सीएम योगी ने सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरण को अगले 24 घंटे के भीतर औद्योगिक संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों और इकाई प्रबंधन से सीधा संवाद बनाएं. उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों के नाम पर माहौल बिगाड़ने वाले तत्वों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए.
वहीं, यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि 'बीजेपी सरकार में अन्याय अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है. हर तरफ अन्याय हो रहा है. महंगाई बढ़ाकर अन्याय किया जा रहा है. बढ़ती बेरोजगारी से अन्याय हो रहा है. नोएडा में मजदूर बड़े पैमाने पर अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं. इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की है. जब दूसरे राज्यों में मजदूरों का वेतन बढ़ाया गया तो यूपी सरकार ने राहत क्यों नहीं दी.'
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यूपी पुलिस दर्ज करेगी FIR
नोएडा में फैक्ट्री मजदूरों के विरोध प्रदर्शन को लेकर यूपी पुलिस FIR दर्ज करने जा रही है. यूपी पुलिस ने बताया कि कथित तौर पर अफवाहें फैलाने वाले दो सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ FIR दर्ज कर रही है.
एक बयान में, पुलिस ने कहा कि नोएडा में कई जगहों पर प्रदर्शन हुए, जिन्हें कथित तौर पर राज्य के बाहर के तत्वों ने भड़काया था, लेकिन सिर्फ एक जगह पर हिंसा हुई, जिसे कम से कम बल का इस्तेमाल करके काबू में कर लिया गया. उन्होंने साफ किया कि इस घटना के दौरान कोई गोलीबारी नहीं हुई और जनता से आग्रह किया कि वे गलत जानकारी न फैलाएं.
यूपी के डीजीपी राजीव कृष्णा ने कहा कि भड़काने वाले बाहरी तत्वों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
पुलिस के बयान में कहा गया, 'जो लोग झूठी और गुमराह करने वाली जानकारी फैला रहे हैं और लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.'
इसी बीच उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के मुख्य सचिव अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं.
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