- निर्मला सीतारमण अपना 9वां बजट पेश करेंगी. एनडीए की लगातार तीसरी सरकार का यह दूसरा पूर्ण बजट होगा
- भारत की बेरोजगारी दर पिछले 7 साल में आधी रह गई है और पिछले 2 साल से 3.2 पर्सेंट पर स्थिर है
- प्रति व्यक्ति औसत सालाना आय पिछले 10 साल में दोगुनी से अधिक बढ़कर 2024-25 में 2 लाख रुपये हो चुकी है
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को अपना 9वां बजट पेश करने जा रही हैं. एनडीए सरकार के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद दूसरा पूर्ण बजट होगा. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़ों ने पहले ही इस बजट की बुनियाद रख दी है. यह न सिर्फ अगले एक साल का लेखा-जोखा होगा बल्कि उम्मीद है कि विकसित भारत की दिशा में एक बड़ा कदम भी होगा. लेकिन क्या यह आम बजट आम आदमी की किस्मत बदलने वाला साबित होगा? आइए, डेटा और मौजूदा आर्थिक हालातों के आधार पर समझते हैं.
7 साल में आधी रह गई बेरोजगारी दर
भारतीय अर्थव्यवस्था इस वक्त बेहद दिलचस्प मोड़ पर है. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि देश की विकास दर (GDP) स्थिर है और बेरोजगारी की दर में गिरावट आई है. पिछले कुछ वर्षों का डेटा देखें तो बेरोजगारी दर में लगातार सुधार हुआ है. 2017-18 में जो बेरोजगारी दर 6 फीसदी के स्तर पर थी, वह 2021-22 तक घटकर 3.1 पर्सेंट पर आ गई और पिछले दो साल से 3.2 पर्सेंट पर स्थिर बनी हुई है. इससे कहा जा सकता है कि आत्मनिर्भर भारत और अन्य सरकारी योजनाओं ने रोजगार के मोर्चे पर मजबूती दी है. आगामी बजट में उम्मीद है कि सरकार स्किल इंडिया और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए नए प्रावधान लाकर इस दर को और नीचे ले जाने का प्रयास कर सकती है.
| साल | बेरोजगारी दर |
| 2017-18 | 6% |
| 2018-19 | 5.8% |
| 2019-20 | 4.8% |
| 2020-21 | 4.2% |
| 2021-22 | 3.1% |
| 2022-23 | 3.2% |
| 2023-24 | 3.2% |
GDP की रफ्तार दुनिया में सबसे तेज
भारत की आर्थिक विकास दर (GDP) के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव तो रहा है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है. 2021-22 में 8.7 पर्सेंट की शानदार जीडीपी ग्रोथ के बाद कुछ उतार चढ़ाव देखते हुए 2023-24 में यह 8.2 पर्सेंट रही. हालांकि 2024-25 में इसके 6.5 पर्सेंट रहने का अनुमान है, लेकिन 2025-26 के लिए इसके फिर से 7.4 पर्सेंट की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में जताई गई है. ये रफ्तार ही 2026 के बजट को किस्मत बदलने वाला बनाने की क्षमता रखती है.
| साल | आर्थिक विकास दर (GDP) |
| 2014-15 | 7.41% |
| 2015-16 | 8% |
| 2016-17 | 8.26% |
| 2017-18 | 6.80% |
| 2018-19 | 6.53% |
| 2019-20 | 4.04% |
| 2020-21 | 7.96% |
| 2021-22 | 8.7% |
| 2022-23 | 7.2% |
| 2023-24 | 8.2% |
| 2024-25 | 6.5% |
| 2025-26 | 7.4 % (अनुमान) |
बढ़ रही आम आदमी की सालाना आय
सबसे राहत की खबर आमदनी के मोर्चे से आई है. जो प्रति व्यक्ति आय 2015-16 में महज 94,797 रुपये थी, वो 2024-25 में बढ़कर 2 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच चुकी है. यानी पिछले 10 वर्षों में भारतीयों की औसत आय दोगुनी से भी अधिक हो गई है. अब नजरें वित्त मंत्री के पिटारे से कल इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव या स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी पर है, ऐसा हुआ तो मिडिल क्लास के हाथ में खर्च करने के लिए अधिक पैसा बच सकेगा.
| साल | प्रति व्यक्ति औसत सालाना आय (रुपये में) |
| 2015-16 | 94,797 हजार |
| 2016-17 | 1.03 लाख |
| 2017-18 | 1.15 लाख |
| 2018-19 | 1.25 लाख |
| 2019-20 | 1.34 लाख |
| 2020-21 | 1.28 लाख |
| 2021-22 | 1.5 लाख |
| 2022-23 | 1.69 लाख |
| 2023-24 | 1.84 लाख |
| 2024-25 | 2 लाख |
आम बजट से बड़ी उम्मीदें
मिडिल क्लास को टैक्स राहत, उद्योगों के लिए निवेश प्रोत्साहन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे क्षेत्रों पर फोकस के साथ आगामी बजट से अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है. कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि सरकार ओल्ड इनकम टैक्स रिजीम के कुछ लाभों को न्यू टैक्स रिजीम में शामिल कर सकती है. ऐसा होने पर टैक्सपेयर्स को ज्यादा फायदा मिलेगा और वो अधिक खर्च कर सकेंगे. इससे घरेलू मांग बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी.
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