बच्चों के डेटा–प्राइवेसी पर NHRC की सख्ती, राज्यों, केंद्र और विभागों को नोटिस

बच्चों के डेटा और गोपनीयता को लेकर NHRC ने राज्यों, केंद्र और संबंधित विभागों को नोटिस भेजा है। NAMO फाउंडेशन की शिकायत पर ‘प्रथम–Anthropic’ सहयोग में AI के जरिए बच्चों की उत्तर-पुस्तिकाओं/शैक्षणिक डेटा प्रोसेसिंग, संभावित क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसफर और DPDP Act, 2023 के उल्लंघन की आशंका की जांच को कहा गया है.

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  • NHRC ने बच्चों के डेटा सुरक्षा संबंधी गंभीर सवालों पर राज्य और केंद्र सरकारों को नोटिस जारी
  • शिकायत में अमेरिका की कंपनी और भारतीय एनजीओ ‘प्रथम’ के सहयोग में बच्चों के शैक्षणिक डेटा के दुरुपयोग का आरोप
  • बच्चों के मानवाधिकार उल्लंघन के संकेत मिलने पर डेटा सुरक्षा और कानूनों का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा
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नई दिल्ली:

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बच्चों के डेटा सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े गंभीर सवालों पर राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों और केंद्र सरकार के संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है. यह कदम NAMO फाउंडेशन की एक शिकायत के आधार पर उठाया गया, जो एक रिपोर्ट पर टिकी है: “Children's Privacy at Stake? Assessing Data Breach Risks in the Pratham–Anthropic AI Collaboration under India's DPDP Act”. शिकायत में बच्चों के डेटा की सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों को रेखांकित किया गया है.

आरोप: ‘प्रथम–Anthropic' सहयोग में बच्चों के डेटा प्रोसेसिंग पर सवाल

शिकायत के अनुसार, अमेरिका की AI कंपनी Anthropic और भारतीय एनजीओ ‘प्रथम' के बीच सहयोग में “Anytime Machine Testing” नामक एक AI सिस्टम के जरिए बच्चों की लिखित उत्तर–पुस्तिकाएं और शैक्षणिक डेटा प्रोसेस किया जाता है. आरोप है कि इस प्रक्रिया में बच्चों के व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा, डेटा के संभावित गलत इस्तेमाल, और डेटा के विदेश भेजे जाने जैसे जोखिम मौजूद हैं. साथ ही, यह आशंका भी जताई गई है कि यह व्यवस्था डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 या अन्य भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर सकती है.

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NHRC की प्राथमिक राय: ‘प्राइमा फेसी' मानवाधिकार उल्लंघन के संकेत

आयोग ने कहा है कि प्रस्तुत आरोप प्राइमा फेसी (prima facie) बच्चों के मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े प्रतीत होते हैं. NHRC ने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और नई तकनीक पर काम महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ भारत की शिक्षा नीति, मौजूदा कानून, बच्चों के अधिकार और डेटा सुरक्षा का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

राज्यों और केंद्र के लिए निर्देश: डेटा दुरुपयोग रोकें, MoU की समीक्षा करें

आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को निर्देश दिया है कि ‘प्रथम' या किसी अन्य एनजीओ द्वारा बच्चों के डेटा का गलत इस्तेमाल न होने पाए. बच्चों का डेटा DPDP Act, 2023 या किसी अन्य भारतीय कानून का उल्लंघन न करे. NGO के साथ किए गए सभी MoU/समझौतों की समीक्षा की जाए, ताकि डेटा सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी प्रावधानों का कड़ाई से पालन हो.

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ऑडिट और अनुपालन रिपोर्ट: दो सप्ताह में कार्रवाई का ब्योरा मांगा

NHRC ने सभी संबंधित प्राधिकरणों से कहा है कि वे दो सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट आयोग को भेजें. इस रिपोर्ट में डेटा सुरक्षा उपाय, अनुमतियों/सहमति (consent) की प्रक्रियाएं, डेटा का लोकेशन/ट्रांसफर प्रोटोकॉल, और जोखिम निवारण के कदम विस्तार से शामिल करने को कहा गया है.

आगे क्या?

आयोग की कार्यवाही के बाद राज्यों/केंद्र से आने वाली अनुपालन रिपोर्टों के आधार पर अगले कदम तय होंगे. यदि डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल या कानूनी अनुपालन में कमी पाई जाती है, तो संबंधित विभागों/संस्थाओं और साझेदार एनजीओ के लिए सुधारात्मक कार्रवाई, कड़े दिशानिर्देश और संभावित जवाबदेही तय की जा सकती है.
 

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