मुंबई : पहले रास्ते में खत्म हो गया एंबुलेंस का ईंधन, फिर अस्पताल में मोबाइल टॉर्च से कराई डिलीवरी, मां-बच्चे की मौत

खुसरूद्दीन अंसारी आरोप लगाते हैं कि मोबाइल के टॉर्च से उनकी पत्नी सहिदून अंसारी की बीएमसी अस्पताल में डिलीवरी हुई. क्योंकि अस्पताल में बिजली गुम हो गई. ना बच्चा बच्चा ना बीवी.  खुसरूद्दीन एक पैर से असमर्थ हैं, 11 महीने पहले निकाह हुआ था. किसी भी हाल में इंसाफ़ चाहते हैं.

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मुंबई:

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटीलेटर पर हैं और यहां से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है. बीएमसी के मैटरनिटी होम में बिजली गुल हुई तो मोबाइल टॉर्च की रोशनी से डिलीवरी कराई गई, जिसमें एक 26 साल की महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई.

बताया जाता है कि महिला को अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस का बीच रास्ते में ही ईंधन खत्म हो गया था. दूसरी एंबुलेंस 1 घंटे बाद आ सकी. लापरवाह 'सिस्टम' के कारण महिला दर्द से तड़पती रही. मृतका के पति खुसरूद्दीन अंसारी ने कहा कि जैसे मैं तड़प रहा हूं, डॉक्टर और स्टाफ तड़पे, सजा मिले, अस्पताल बंद हो. जान के बदले जान.”

खुसरूद्दीन अंसारी आरोप लगाते हैं कि मोबाइल के टॉर्च से उनकी पत्नी सहिदून अंसारी की बीएमसी अस्पताल में डिलीवरी हुई. क्योंकि अस्पताल में बिजली गुम हो गई. ना बच्चा बच्चा ना बीवी.  खुसरूद्दीन एक पैर से असमर्थ हैं, 11 महीने पहले निकाह हुआ था. किसी भी हाल में इंसाफ़ चाहते हैं.

खुसरूद्दीन ने कहा कि छोटी मोटी कमाई करता हूं, अपंग हूं, बड़ी मुश्किल से शादी हुई, मेरी जिंदगी तो तबाह हो गई. इंसाफ़ चाहिए.  परिवार ना सिर्फ आरोप लगा रहा, बल्कि सबूत के तौर पर तस्वीरें भी पेश कर रहा है, जहां इनके बच्चे की मौत के बाद भी मोबाइल के टॉर्च से इसी ऑपरेशन थिएटर में और डिलीवरी भी कराई गई. वीडियो सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोलता है.

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परिवार के लोगों ने कहा कि बिजली तीन घंटे नहीं आई. जेनेरेटर ऑन नहीं हुआ. लड़की एकदम तंदुरुस्त थी. नौ महीने का बच्चा था, एकदम सारे रिपोर्ट ठीक थे. डिलीवरी के लिए 29 अप्रैल को सुबह सात बजे ले गए, पूरा दिन रखा, रात के आठ बजे अस्पताल की ओर से कहा गया कि नार्मल डिलीवरी हो जाएगा. फिर जब मिलने गये तो देखा कि महिला खून से लथपथ थी.”

परिवार के लोगों ने कहा कि चीरा पहले ही लगा दिया. फिर साइन करवाने आया कि जल्दी करो हालत ख़राब है. अस्पताल की ओर से कहा गया कि साइजरियन करेंगे. उसी समय लाइट चली गई. उसके बाद भी कहीं और नहीं भेजा. ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर मोबाइल के टॉर्च से डिलीवरी कराई. बच्चा मर गया, हम रोये, डॉक्टर बोला मां बच जाएगी.  सायन अस्पताल रेफर किया, लेकिन तब तक वो ख़त्म हो गई. ऑक्सीजन की भी सुविधा नहीं थी.”

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सुषमा स्वराज बीएमसी मैटरनिटी अस्पताल के बाहर हैं, दो दिन से परिवार यहां इंसाफ़ की मांग के साथ विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे रहा था, जिसको देखते हुए, सुरक्षा सख़्त की गई है. भारतीय जनता पार्टी सदस्य और पूर्व पार्षद जागृति पाटिल लगातार परिवार का सहयोग करते हुए बीएमसी पर जांच का दबाव बना रही हैं. दो दिनों की दौड़ के बाद आखिकार एक कमेटी बनाई गई है जो खामियों की जांच करेगी.

बीजेपी के पूर्व पार्षद जागृति पाटिल ने कहा कि खराब हालत है अस्पताल की. हमने सख़्त एक्शन की मांग की है. यहाँ से हमारे उम्मीदवार मिहिर कोटेचा से मैं मिली, अब बीएमसी ने एक्शन लिया, समिति बनाई, डॉक्टर और गलत स्टाफ पर कार्रवाई जरूर होगी. किसी और के साथ ये नहीं होना चाहिए. यहां से पहले भी ऐसी शिकायतें आई हैं. अब सख़्त एक्शन लेना होगा. 

चुनाव के समय पुलिस की तैनाती किसी अस्पताल के बाहर इस संख्या में हो तो आप मामले की गंभीरता समझ सकते हैं. आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में बिजली गुल से माँ-बच्चे की मौत की खबर वाक़ई शर्मसार करने वाली है. BMC ने इस बार क़रीब 52,000 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था जिसमें हेल्थ सेक्टर को पूरे बजट का 12% हिस्सा दिया गया. देश की सबसे अमीर महानगर पालिका की रखरखाव वाले अस्पताल में ऐसी हालत वाक़ई शर्मसार करने वाली है.

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