प्रचंड गर्मी के बीच देश में अब मॉनसून का इंतजार लोग बेसब्री से कर रहे हैं. हालांकि इसमें थोड़ी देरी हो सकती है. भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने पहले अपने पूर्वानुमान में कहा था कि इस साल मॉनसून केरल में 26 मई को आएगा. लेकिन अब केरल में मॉनसून इस बार 2-4 जून के बीच आने की संभावना बन रही है. लेकिन अच्छी बात है कि मॉनसून के पहले ही मई के आखिरी हफ्ते में देश के ज्यादातर हिस्सों में हल्की से भारी बारिश का सिग्नल है.
मॉनसून अलर्ट (Monsoon Alert)
मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण पश्चिम मॉनसून को लेकर स्थितियां लगातार अनुकूल बनी हुई हैं. ये अगले 2-3 दिनों में साउथवेस्ट और दक्षिण पश्चिम अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के बाकी हिस्सों के बड़े इलाके को कवर करेगा. सामान्य तौर पर भारत के तटीय इलाके में मॉनसून 1 जून के आसपास पहुंचता है. मौसम विभाग इसी तारीख को केरल में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के टकराने की पारंपरिक तारीख मानता है.
कहां- कब बारिश
- उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर में 28 से 30 मई और हिमाचल में 28-29 मई को बारिश, आंधी, बिजली गिरने की चेतावनी
- वेस्ट यूपी, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में 28 से 31 मई के बीच आंधी-बारिश का अलर्ट
- पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 मई के बाद 28 से 31 मई के बीच आंधी, बारिश, बिजली कड़कने की चेतावनी
- राजस्थान में 28 और 29 मई को आंधी के साथ हल्की बारिश आने का अनुमान
- महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कोंकण और गोवा में आंधी, बारिश के आसार 26 से 29 मई के बीच
- महाराष्ट्र में 26 से 28 मई, गुजरात में 30 से 1 जून के बीच, सौराष्ट्र औऱ कच्छ में 1 जून को बारिश
- बिहार, ओडिशा में 26 से 30 मई के बीच आंधी, बारिश, झारखंड में एक हफ्ते तक का रेन अलर्ट
- बंगाल, सिक्किम में 26-27 मई को, अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 28 से 21 जून तक बारिश
प्री मॉनसून की बारिश आई
खुशखबरी की बात है कि मॉनसून के पहले देश के अधिकांश हिस्सों में प्री मॉनसून बारिश की शुरुआत हो गई है. हिमालय में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान समेत उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में अगले 4-5 दिनों में बारिश के संकेत हैं.
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मॉनसून क्या है
दक्षिण पश्चिम मानसून भारत में बारिश लाने वाला महत्वपूर्ण मौसमी बदलाव है, जो केरल में बारिश लाती है. मॉनसून अगले चार महीनों में दक्षिण और पश्चिमी तटों से उत्तर की ओर अपनी यात्रा शुरू करता है. भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70% हिस्सा इसी से मिलता है.
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अंडमान द्वीप के बाद दक्षिणी तटीय राज्य केरल वह स्थान है, जहां मॉनसून सबसे पहले आता है. यह पूरे देश के लिए राहत, ठंडी हवाओं और बारिश के मौसम का संकेत देता है. मॉनसून समुद्र के तापमान, हवा के पैटर्न और वायुमंडलीय दबाव प्रणालियों के एक जटिल चक्र पर निर्भर करता है.
केरल में मॉनसून कब पहुंचेगा
केरल और मुंबई में प्री मॉनसूनी बारिश शुभ संकेत हैं.केरल के 14 नामित मौसम स्टेशनों में से कम से कम 60 फीसदी स्टेशनों पर लगातार दो दिनों तक 2.5 मिमी या उससे अधिक वर्षा दर्ज की जानी चाहिए, साथ ही हवा और बादल छाने के मानक पूरे होने पर मॉनसून आने पर मुहर लगती है.














