23 साल से फरार मोनिका कपूर अमेरिका में गिरफ्तार, आज रात भारत लेकर पहुंचेगी सीबीआई

मोनिका कपूर, जो “मोनिका ओवरसीज” नाम की फर्म की मालिक थी, अपने दो भाइयों  राजन खन्ना और राजीव खन्ना  के साथ मिलकर साल 1998 में जाली शिपिंग बिल, इनवॉइस और बैंकों के फर्जी एक्सपोर्ट दस्तावेज तैयार किए.

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सीबीआई ने ऐसे कसा शिकंजा
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  • सीबीआई ने करीब 23 साल से फरार महिला कारोबारी मोनिका कपूर को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित करने में सफलता हासिल की है.
  • मोनिका कपूर पर 1998 में जाली शिपिंग बिल और फर्जी एक्सपोर्ट दस्तावेज बनाकर ड्यूटी-फ्री सोना खरीदने का आरोप है.
  • इस घोटाले से सरकार को करीब 1.44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जिसमें मोनिका ने अपने भाइयों के साथ मिलकर भूमिका निभाई.
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नई दिल्‍ली:

सीबीआई ने आर्थिक अपराधों के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए करीब 23 साल से फरार चल रही महिला कारोबारी मोनिका कपूर को अमेरिका से भारत लाने में सफलता पाई है. मोनिका कपूर 2002 के एक आयात-निर्यात घोटाले की मुख्य आरोपी है और सालों से अमेरिका में छिपी हुई थी.

क्‍या है पूरा मामला?

मोनिका कपूर, जो “मोनिका ओवरसीज” नाम की फर्म की मालिक थी, अपने दो भाइयों  राजन खन्ना और राजीव खन्ना  के साथ मिलकर साल 1998 में जाली शिपिंग बिल, इनवॉइस और बैंकों के फर्जी एक्सपोर्ट दस्तावेज तैयार किए. इन फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए इन्होंने सरकार से छह ‘रिप्लेनिशमेंट लाइसेंस' हासिल कर लिए, जिनसे करीब 2.36 करोड़ रुपये की ड्यूटी-फ्री सोने की खरीद की इजाज़त मिली. बाद में इन्होंने ये लाइसेंस अहमदाबाद की एक फर्म दीप एक्सपोर्ट्स को प्रीमियम पर बेच दिए, जिसने इनका इस्तेमाल कर ड्यूटी फ्री सोना मंगवाया. इस गड़बड़ी से सरकार को करीब 1.44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

सीबीआई ने ऐसे कसा शिकंजा 

सीबीआई ने इस मामले में जांच के बाद 31 मार्च 2004 को चार्जशीट दाखिल की थी. कोर्ट ने राजन और राजीव खन्ना को 2017 में दोषी करार दिया, लेकिन मोनिका कपूर तब तक देश छोड़ चुकी थी. वह जांच और सुनवाई से बचती रही, जिस कारण कोर्ट ने उसे 2006 में भगोड़ा घोषित कर दिया, साथ ही 2010 में उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी हुआ। सीबीआई ने उसी साल अमेरिका से मोनिका की प्रत्यर्पण की मांग भी की थी.

सीबीआई की मेहनत लाई रंग

लगातार अमेरिकी एजेंसियों से समन्वय के बाद आखिरकार सीबीआई की टीम अमेरिका गई और मोनिका कपूर को हिरासत में लेकर भारत लौटी. अब उसे कोर्ट में पेश किया गया है और जल्द ही उस पर मुकदमा चलेगा.

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सीबीआई का सख्त संदेश

सीबीआई ने कहा कि वह आर्थिक अपराधों के खिलाफ अपनी मुहिम में पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और देश से भागे अपराधियों को किसी भी कीमत पर कानून के कटघरे में लाकर रहेगी  चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हों.

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