- सोनम वांगचुक ने 27वें दिन गुरुवार देर रात अपना अनशन खत्म किया
- जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी ने वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ा
- मोदी सरकार ने वांगचुक को उनकी मांगों पर आश्वासन भी दिया है
नीट पेपर लीक पर चल रहे आंदोलन पर सरकार ने अब तक कई मोर्चों पर अपनी रणनीति पर अमल किया है. सरकार ने विपक्षी नेताओं से संवाद के साथ ही आंदोलनकारियों से संपर्क बनाए रखना और कानून-व्यवस्था के हालात पर काबू रखना, इन सभी मोर्चों पर हालात संभालने की जिम्मेदारी अलग-अलग मंत्रियों को दी गई. पीएम मोदी और अमित शाह के मार्गदर्शन में सरकार ने फिलहाल एक मोर्चा फतह कर लिया है लेकिन दबाव अब भी बना हुआ है.
यहां फंसी थी बात
दरअसल, आंदोलनकारियों की ओर से न्यूट्रल स्थान पर चर्चा की शर्त ने गतिरोध पैदा कर दिया था. एक ओर सोनम वांगचुक ने संसद में चर्चा पर जोर दिया तो वहीं सीजेपी के नेता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं. वांगचुक जंतर मंतर धरना स्थल से अलग काफी दूर गुरुग्राम में मेदांता में शिफ्ट होकर एक तरह के बाकी आंदोलनकारियों से अलग-थलग हो गए. वहीं पिछले छत्तीस घंटों में सरकार ने सीजेपी से चार बार बातचीत की पेशकश की लेकिन उधर से शुरुआत में जवाब नहीं आना भी एक तरह से उनके हठ के रूप में देखा गया.
12 घंटे में काफी कुछ बदला
लेकिन पिछले बारह घंटों में घटनाक्रम काफी तेजी से बदले. कल सुबह पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर फास्ट ट्रैक बनाने की बात कही. इसके बाद पूरे दिन वरिष्ठ मंत्री मीडिया में खुल कर सामने आए. उन्होंने विपक्ष पर संसद में चर्चा से भागने का आरोप लगाया तो वहीं इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार के दरवाजे छात्रों से बातचीत के लिए हमेशा खुले हैं.
जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ सीजेपी प्रतिनिधि सौरभ दास एवं आशुतोष रांका
पीएम मोदी का आया वीडियो
कल देर रात घटनाक्रम तेजी से बदला. सबसे पहले शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला हुआ. फिर दिल्ली हाईकोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया. इसके बाद पीएम मोदी का जेन जी के लिए वीडियो संदेश आया. इसकी खास बात यह थी कि यह वर्टिकल फ़्रेम में बनाया गया था. यह फॉर्मेट इंस्टाग्राम के लिए सटीक है. जेन जी सबसे अधिक इंस्टाग्राम पर ही सक्रिय हैं इसलिए पीएम के वीडियो की फॉर्मेट भी सोच समझ कर चुनी गई. पीएम ने भी अपने संबोधन को फ्रेंड्स कह कर ही शुरू किया, हमेशा की तरह भाइयों-बहनों आदि कह कर नहीं.
वांगचुक ने खत्म किया अनशन
इसके तुरंत बाद यह खबर भी आ गई कि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया. यह सरकार के लिए एक मोर्चा फतह करने जैसा था क्योंकि वांगचुक इस पूरे आंदोलन का केंद्र बन चुके थे. यह अनशन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर बिना किसी ठोस आश्वासन के ही समाप्त कराने में सरकार को कामयाबी मिली. इसी बीच यह भी खबर आ गई कि सरकार और सीजेपी के बीच गतिरोध दूर हो गया और शुक्रवार दोपहर को न्यूट्रल स्थान पर बातचीत का दूसरा दौरा होगा.
विपक्ष हुआ किनारे
वहीं विपक्ष इस घटनाक्रम से हतप्रभ नजर आया. इससे पहले शाम को राहुल गांधी ने गांधी स्मृति तक मार्च तक सरकार पर लगातार दूसरी बार दबाव बनाने की कोशिश की. लेकिन रात के घटनाक्रम ने उनकी मुहिम को किनारे कर दिया. हालांकि विपक्ष के तेवर कड़े हैं. वह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना सदन में चर्चा नहीं चाहता. हालांकि सरकार के रणनीतिकार कहते हैं कि आंदोलनकारियों की तुलना में विपक्षी दलों से निपटना आसान है.
सरकार की ओर से इस पूरे घटनाक्रम में कुछ अहम किरदार सामने आए हैं जिन्हें अलग अलग जिम्मेदारियां दी गईं थीं
जे पी नड्डा
बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष, राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री. सौम्य, मिलनसार और पीएम के भरोसेमंदय उन्हें आंदोलनकारियों से बातचीत में सरकार का चेहरा बनाया गया. उन्होंने दो बार मेदांता अस्पताल जाकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की और एक बार अपने घर पर सीजेपी के प्रतिनिधियों से. जब बीस मई को सीजेपी के दो प्रतिनिधि बिना लिखित मांग पत्र के पहुंच गए तो उन्हें याद भी दिलाया कि ऐसे मौकों पर क्या किया जाता है? इसके लिए उन्होंने अपने लंबे विपक्षी नेता के तौर के कैरियर का हवाला भी दिया. इसके बाद उन्हें मांग पत्र लिखने के लिए कागज-पत्री भी मुहैया कराई. गुरुवार रात वे डॉ जितेंद्र सिंह के साथ मेदांता गए और जूस पिला कर सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त कराया. वहीं पर कैमरे के सामने सरकार की ओर से आश्वासन भी पढ़ कर सुनाया. शुक्रवार को डॉ जितेंद्र सिंह के साथ वे सीजेपी के नेताओं के साथ दूसरे दौर की बातचीत की.
जेपी नड्डा
किरेन रिजिजू
संसदीय कार्य मंत्री को विपक्षी दलों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी गई थी. वे लगातार उनसे बात कर रहे हैं. वे स्पीकर से भी मिले और उनसे अलग अलग फ्लोर लीडर्स से बातचीत करने का आग्रह भी किया. उन्होंने संसद के दोनों सदनों में आश्वासन दिया कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा को तैयार है. सहयोगी दलों के नेताओं को भी भरोसे में लिया.
अर्जुन राम मेघवाल
केंद्रीय कानून एवं विधि मंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का पीएम मोदी की घोषणा को अमली जामा पहनाया. उन्होंने पीएम के कहे अनुसार पेपर लीक और नकल पर कड़े कानून के लिए मौजूद कानून में संशोधनों का मसौदा भी तैयार किया. वे चंद्रशेखर और अखिलेश यादव से संपर्क में भी रहे. संसद परिसर में धरने पर बैठे चंद्रशेखर का धरना समाप्त कराया और अखिलेश यादव के सामने सरकार का पक्ष रखा. जिसके बाद अखिलेश ने लोकसभा में कहा कि इस्तीफे पर बात होती रहेगी लेकिन पहले पुलिस की सख्ती पर कार्रवाई हो.
डॉ जितेंद्र सिंह
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री. जब राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों के नेता पीएम आवास पर धरने पर बैठ गए तब उन्हें बातचीत के लिए भेजा गया. हालांकि बाद में उन्होंने राहुल गांधी पर मांगें बदलने का आरोप लगाया. इसके बाद सरकार ने उन्हें सोनम वांगचुक से मिलने के लिए जे पी नड्डा के साथ भेजा. गुरुवार रात भी वे वांगचुक का अनशन समाप्त कराने के लिए नड्डा के साथ मेदांता अस्पताल गए. शुक्रवार को सीजेपी के साथ बातचीत में वे सरकार की ओर से नड्डा के साथ शामिल हुए जबकि सोमवार को नड्डा ने अकेले ही मुलाकात की थी.
गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को पूरे दिन संसद भवन में रह कर सेंट्रल दिल्ली के हालात पर नजर रखे हुए थे. उनके साथ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे. इसके बाद बुधवार और गुरुवार को उन्होंने अपने आवास से ही नजर रखी. वे गुरुवार को कुछ देर के लिए स्पीकर से मिलने संसद भवन आए थे. इसके बाद जेपी नड्डा और डॉ जितेंद्र सिंह ने वांगचुक से मिलने से पहले उनसे मुलाकात की. आज भी सीजेपी नेताओं से मिलने से पहले नड्डा उनसे मिले. प्रस्तावित संशोधनों पर भी शाह की चर्चा हुई और शिक्षा सचिव को हटाने से लेकर अन्य नौकरशाहों को बदलने में भी उन्होंने भूमिका निभाई.
पीएम मोदी ने सामने से नेतृत्व किया
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे आकर कमान संभाली. मंगलवार को एनडीए सांसदों की बैठक में उन्होंने पेपर लीक मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की. इसे घोर पाप बताया और धुरंधर वकीलों से आगे आकर सजा दिलाने में मदद की अपील की. सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख किया. गुरुवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना का ऐलान किया और रात को कड़े कानून की बात कही. उन्होंने छात्रों को आश्वासन भी दिया कि उनके भविष्य के लिए मोदी सरकार प्रतिबद्ध है.
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