माता-पिता के झगड़े की वजह से नहीं रोका जा सकता नाबालिग का पासपोर्ट... इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

कोर्ट का अंतिम निर्देश हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, लखनऊ को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता के आवेदन को तुरंत प्रोसेस करें.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता के वैवाहिक विवाद नाबालिग को पासपोर्ट जारी न करने का कानूनी आधार नहीं हैं.
  • कोर्ट ने पासपोर्ट और विदेश यात्रा को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार माना है.
  • पासपोर्ट अधिनियम की धारा छह केवल राष्ट्रीय सुरक्षा या अदालत के आदेश पर पासपोर्ट रोकने की अनुमति देती है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि माता-पिता के बीच चल रहे वैवाहिक या आपराधिक विवाद किसी नाबालिग को पासपोर्ट जारी करने से इनकार करने का वैध कानूनी आधार नहीं हो सकते. जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने 'पोयम जैसवार' नामक दो वर्षीय नाबालिग की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. कोर्ट ने जोर देकर कहा कि पासपोर्ट प्राप्त करना और विदेश यात्रा करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' के मौलिक अधिकार का अभिन्न अंग है.

मामला एक दो साल की बच्ची का था, जिसकी मां ने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था. हालांकि, बच्ची के पिता के साथ चल रहे वैवाहिक विवाद और दर्ज प्राथमिकी के कारण, पासपोर्ट अधिकारियों ने मौखिक रूप से प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से मना कर दिया था. याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि पिता द्वारा सहमति न देना या माता-पिता के बीच के मुकदमों की वजह से बच्चे के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए माना कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6 के तहत केवल विशिष्ट आधारों (जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा या अदालती रोक) पर ही पासपोर्ट रोका जा सकता है.

अभिभावकों के विवाद और पासपोर्ट नियम अदालत ने 'पासपोर्ट नियमावली 1980' और 'पासपोर्ट मैनुअल 2020' का हवाला देते हुए कहा कि इनमें स्पष्ट प्रावधान हैं कि यदि एक अभिभावक सहयोग नहीं कर रहा है, तो भी नाबालिग का पासपोर्ट प्रोसेस किया जा सकता है. कानून इस तरह बनाया गया है कि माता-पिता की असहमति नाबालिग के भविष्य और उसके अधिकारों को कमजोर न कर सके. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक किसी सक्षम अदालत का स्पष्ट रोक आदेश न हो, तब तक अधिकारियों को औपचारिकताएं पूरी होने पर पासपोर्ट जारी करना ही चाहिए.

कोर्ट का अंतिम निर्देश हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, लखनऊ को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता के आवेदन को तुरंत प्रोसेस करें. अदालत ने आदेश दिया कि यदि कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं है और रूटीन वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो मां के माध्यम से प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर पासपोर्ट जारी कर दिया जाए. यह फैसला उन हजारों मामलों के लिए एक नजीर बनेगा जहाँ पारिवारिक विवादों के कारण बच्चों के दस्तावेज और उनके विदेश जाने के अवसर अटक जाते हैं.
 

Featured Video Of The Day
Rao Inderjeet Yadav Interview: Elvish Yadav और Fazilpuria पर किसने कराई फायरिंग? | NDTV Exclusive