शिलांग की पहाड़ियों में राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या मेघालय में राजनीतिक समीकरण बदलने जा रहे हैं? क्योंकि मेघालय में भी अब 'ऑपरेशन लोटस' शुरू हो गया है. दरअसल, बीजेपी के सीनियर विधायक अलेक्जेंडर लालू हेक ने कुछ समय पहले दावा किया था कि कई मौजूदा विधायक बीजेपी में शामिल होने की योजना बना रहे हैं.
दिलचस्प बात यह है कि यह सब ऐसे राज्य में हो रहा है जहां बीजेपी, कॉनराड संगमा और उनकी पार्टी NPP गठबंधन सरकार का हिस्सा है.
मेघालय के राजनीतिक गलियारों में अब बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं, क्योंकि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के नौ विधायक कथित तौर पर पाला बदलकर बीजेपी में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं.
बीजेपी की तरह UDP भी NPP के नेतृत्व वाली सरकार की सहयोगी पार्टी है. जानकारों का मानना है कि अगर 'ऑपरेशन लोटस' कामयाब होता है तो मेघालय में बीजेपी के विधायकों की संख्या डबल डिजिट में जा सकती है. अभी मेघालय की 60 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी के 2 विधायक हैं.
ऐसी चर्चाएं क्यों?
UDP विधायकों और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच हाल ही में हुई बैठक के बाद राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है. UDP का कहना था कि बातचीत मुख्य रूप से फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) और मेघालय से जुड़े अन्य मुद्दों पर केंद्रित थी. हालांकि, सूत्रों ने कहा कि हालिया घटनाक्रमों को देखते हुए, इस बैठक का राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है.
अगर यह कदम असल में उठाया जाता है, तो इससे विधानसभा के गणित में बड़ा उलटफेर हो सकता है और सत्ताधारी खेमे में शक्ति का संतुलन बदल सकता है.
हालांकि प्रस्तावित बदलाव और सबसे अहम बात यह कि यह कब होगा, इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हाल के दिनों में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं.
अंदरूनी सूत्रों ने संकेत दिया है कि विधायक तुरंत पाला बदलने की तैयारी कर रहे हैं या अपने विकल्प खुले रख रहे हैं, यह गहन राजनीतिक अटकलों का विषय बना हुआ है. सूत्रों का कहना है कि अगर प्रस्तावित गठबंधन होता है, तो जिन मांगों पर चर्चा हो रही है, उनमें से एक बीजेपी के लिए ज्यादा मंत्री पद हासिल करना भी है.
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क्या बदल जाएगा पावर बैलेंस?
इस तरह की व्यवस्था मौजूदा सरकार में सत्ता-साझेदारी के समीकरण को काफी बदल सकती है और बीजेपी की मोल-भाव करने की स्थिति को मजबूत कर सकती है.
ना तो संबंधित विधायकों और ना ही बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर इस कदम की पुष्टि की है. फिर भी, UDP के भीतर राजनीतिक सरगर्मी तेजी से बढ़ गई है, क्योंकि एक बड़े गुट के अलग होने की संभावना से क्षेत्रीय पार्टी के भीतर गहरे मतभेद सामने आ सकते हैं.
UDP के पास अभी 60 सदस्यों वाली विधानसभा में 12 विधायक हैं. अगर नौ सदस्यों वाला यह गुट बीजेपी की ओर जाता है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे - न केवल UDP के लिए, बल्कि मेघालय के पूरे गठबंधन के समीकरण के लिए भी.
UDP के भीतर बढ़ रही नाराजगी!
यह अटकलें UDP के भीतर बढ़ती नाराजगी की खबरों के बीच लगाई जा रही हैं. कई विधायक कथित तौर पर पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह से नाखुश हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा का करीबी माना जाता है.
UDP सूत्रों ने बताया कि हाल ही में हुई केंद्रीय कार्यकारी समिति की बैठक में विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की. कुछ विधायकों ने तीखी बहस के बाद बैठक से वॉकआउट भी किया.
पता चला है कि पार्टी नेतृत्व ने लिंगदोह से बढ़ती बेचैनी के बीच संसदीय दल की बैठक बुलाने का आग्रह किया है.
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दल-बदल लागू नहीं होगा!
संख्याओं ने राजनीतिक समीकरण को और भी पेचीदा बना दिया है. UDP के 12 विधायकों में से, दलबदल विरोधी प्रावधानों के तहत विलय के लिए दो-तिहाई बहुमत की शर्त पूरी करने के लिए कम से कम आठ विधायकों की जरूरत होगी.
अगर नौ सदस्यों वाला यह गुट औपचारिक रूप से बीजेपी में विलय करता है, तो UDP के पास केवल तीन विधायक रह जाएंगे, जबकि बीजेपी की ताकत दो से बढ़कर 11 हो सकती है.
इससे मेघालय में बीजेपी की अब तक की सबसे बड़ी विधायी उपस्थिति हो सकती है और सत्ताधारी गठबंधन के भीतर उसकी राजनीतिक ताकत काफी बढ़ सकती है.
बीजेपी के लिए यह एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि होगी, जिससे उसकी उपस्थिति का काफी विस्तार होगा और 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है.
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