मैप, AI तकनीक, एल्गोरिदम... अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया रेलवे की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने का फॉर्मूला

रेल मंत्री ने कहा कि जहां भी राज्य सरकारें मदद करती हैं, वहां अच्छे परिणाम मिलते हैं, और जमीन का मुद्दा राज्य सरकार के अंतर्गत आता है, इसलिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करती है.

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  • रेलवे के कुल 4.99 लाख हेक्टेयर भूमि में से लगभग 1,068 हेक्टेयर भूमि पर देशभर में अतिक्रमण पाया गया है.
  • रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि रेलवे भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की गई है.
  • उन्होंने बताया कि उपग्रह तकनीक और ड्रोन सर्वेक्षण से नए अतिक्रमणों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जा रही है.
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नई दिल्ली:

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि भारतीय रेलवे के स्वामित्व वाली लगभग 1,068 हेक्टेयर भूमि पर देशभर में अतिक्रमण है, जो कुल 4.99 लाख हेक्टेयर भूमि का 0.21 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि यह सही है कि भूमि पर यह अवैध अतिक्रमण एक गंभीर समस्या है. कार्रवाई भी की गई है, लेकिन समय-समय पर ही की गई है. लेकिन जब भी ऐसी कार्रवाई की जाती है, मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाता है, क्योंकि रेलवे की जमीन पर सबसे गरीब लोगों ने झुग्गियां बना रखी हैं. जहां भी संभव हो, राज्य सरकारों के साथ मिलकर व्यावहारिक समाधान निकाले गए हैं.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "पिछले कुछ सालों में हम एक बेहद पारदर्शी तंत्र बनाने में सफल रहे हैं. हमने कई तरीके आजमाए. रेलवे के पास रेलवे भूमि विकास प्राधिकरण नामक एक संस्था है. इस संस्था का गठन कई साल पहले हुआ था, लेकिन किसी तरह, यूपीए सरकार के दौरान, कई ऐसे कदम उठाए गए जो बहुत पारदर्शी नहीं थे. इसलिए व्यावहारिक रूप से वह काम लगभग रुक गया था, लेकिन हाल के समय में एक बेहद प्रामाणिक निविदा-आधारित प्रक्रिया के तहत बहुत पारदर्शी तरीके अपनाए गए हैं, जिसके तहत भूमि का उपयोग वाणिज्यिक विकास या आवासीय विकास के लिए किया जाता है."

अश्विनी वैष्णव ने कहा, "हम दो बुनियादी तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं. एक है उपग्रह तकनीक और दूसरी है ड्रोन आधारित सर्वेक्षण. इन दोनों से मानचित्र तैयार किए जाते हैं, जिनकी तुलना हमारे पास मौजूद पूरे नेटवर्क के संदर्भ मानचित्रों से की जाती है. इन संदर्भ मानचित्रों के आधार पर, हम एआई और अन्य एल्गोरिदम का उपयोग करके यह पता लगा पाते हैं कि कोई नया अतिक्रमण हुआ है या नहीं, और फिर हम तत्काल कार्रवाई कर पाते हैं. नए अतिक्रमणों में काफी कमी आई है. समस्या मुख्य रूप से दशकों से चले आ रहे अतिक्रमणों की है."

प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए मंत्री ने कहा कि यदि सभी रेलवे भूमि के उपयोग को देखा जाए, तो लगभग 80 प्रतिशत भूमि पटरियों के पास है, 5 प्रतिशत उसके आसपास है, जबकि शेष 15 प्रतिशत भूमि का उपयोग स्टेशनों, कॉलोनियों, अस्पतालों और अन्य चीजों के विकास के लिए किया जाता है.

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उन्होंने उच्च सदन को यह भी बताया कि रेलवे की जमीन खाली कराने के कुछ अच्छे उदाहरण भी हैं. सूरत में, हमने राज्य सरकार के साथ मिलकर काम किया, जिसने रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण करने वालों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. इस प्रकार, मानवीय दृष्टिकोण अपनाया गया, जमीन खाली कराई गई और विकास कार्य आगे बढ़ाया गया.

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उन्होंने कहा कि जहां भी राज्य सरकारें मदद करती हैं, वहां अच्छे परिणाम मिलते हैं, और भूमि का मुद्दा राज्य सरकार के अंतर्गत आता है, इसलिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करती है.

वैष्णव ने सदन को सूचित किया, “चालू वित्तीय वर्ष में, हमें इससे 900 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है और यह राशि काफी बढ़ने वाली है.”

तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने कहा, “पिछले पांच वर्षों में लगभग 98.02 हेक्टेयर रेलवे भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है. खाली पड़ी रेलवे भूमि का उपयोग परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए किया जाता है, जैसे कि मल्टी-ट्रैकिंग, रेलवे कार्यशालाएं, नए यात्री टर्मिनल, कार्गो टर्मिनल आदि. रेलवे को जिस भूमि की तत्काल आवश्यकता नहीं है, उसे व्यावसायिक उपयोग के लिए रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) को सौंप दिया जाता है.”

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