चेन्नई पुलिस की हिरासत में मौत : पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिले 13 अलग-अलग चोटों के निशान

इस हफ्ते की शुरुआत में एक सनसनीखेज सीसीटीवी फुटेज सामने आया था, जिसमें दो पुलिस वाले विग्नेश का पीछा करते हुए दिखाई दे रहे थे, वह ठोकर खाकर गिर भी गया था. पुलिस बाद में उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लेती है और उसे पुलिस डंडे से पीटती भी है.

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चेन्नई पुलिस की हिरासत में युवक की मौत..
चेन्नई:

पिछले महीने चेन्नई में पुलिस हिरासत में मारे गए 25 वर्षीय विग्नेश की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि उसके शरीर पर 13 अलग-अलग चोटों के निशान हैं. हालांकि अभी मौत के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है, क्योंकि अभी और रिपोर्टों का इंतजार है. पुलिस का दावा है कि विग्नेश की मौत दौरा पड़ने के बाद हुई, वहीं परिवार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उसे प्रताड़ित किया गया.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके सिर, आंखों के ऊपर, गाल और बाहों सहित शरीर के कई हिस्सों में चोटों के निशान मिले हैं. विग्नेश को पुलिस ने 18 अप्रैल को गांजा रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था. अगले दिन पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई थी.

इस हफ्ते की शुरुआत में एक सनसनीखेज सीसीटीवी फुटेज सामने आया था, जिसमें दो पुलिस वाले विग्नेश का पीछा करते हुए दिखाई दे रहे थे, वह ठोकर खाकर गिर भी गया था. पुलिस बाद में उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लेती है और उसे पुलिस डंडे से पीटती भी है.

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जैसे ही पुलिस कर्मी उसे हिरासत में लेते हैं, एक पुलिस वाला जमीन से कुछ उठाता हुआ दिखाई देता है, जिसके बारे में पुलिस सूत्रों का दावा है कि पीछा करने के दौरान विग्नेश ने उन पर चाकू फेंका था. एनडीटीवी टेप की सत्यता की पुष्टि नहीं कर सकता. इस मामले में दो पुलिसकर्मियों - एक एसआई और एक कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है. राज्य सरकार ने जांच सीबी-सीआईडी को सौंप दी थी.

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मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मामले की निष्पक्ष जांच का वादा करते हुए परिवार को 10 लाख रुपये की सहायतादेने की घोषणा की. हालांकि, पुलिस के इस दावे पर एक मानवाधिकार संगठन ने सवाल उठाया है जिनकी इस मामले पर पूरी नजर है.

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एक मानवाधिकार संगठन जिसने इस मामले को उठाया है पीपुल्स वॉच के निदेशक हेनरी तिफांगने ने एनडीटीवी को बताया कि यह सिर्फ एक कैमरा है, वहां कम से कम 15 कैमरे हैं, लेकिन पुलिस ने सुनिश्चित किया है कि कुछ भी काम न करे. उस व्यक्ति को रात 11 बजे से तीन घंटे तक प्रताड़ित किया गया, हालांकि सीबी-सीआईडी ने 21 अप्रैल को कार्यभार संभाला था, लेकिन एक भी समन जारी नहीं किया गया. मजिस्ट्रेट चुप क्यों हैं? 

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पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह वह वीडियो है, जिसे उन्होंने अदालत में पेश किया था. इस घटना के बारे में बात करते हुए जांच दल के एक सदस्य ने एनडीटीवी को बताया कि ये वो जगह है जहां विग्नेश ने चाकू फेंककर पुलिस पर हमला करने का प्रयास किया था. फुटेज में विग्नेश के शरीर की मूवनेंट फ्रेम बाय फ्रेम दर्शायी गई है. जैसे ही उसने बिना पीछे मुड़े चाकू फेंकने के लिए हाथ का इस्तेमाल किया तो वह संतुलन खो बैठा और गिर गया.

पुलिस का कहना है कि एक ऑटो में जा रहे विग्नेश के पास से गांजा मिला और उसने चाकू से पुलिस पर हमला करने और भागने का प्रयास किया.  तभी पुलिस ने उसका पीछा किया और गिरफ्तार कर लिया. समुद्र तट पर लोगों को घोड़ों की सवारी करवाने वाले विग्नेश को अगली सुबह ही दौरा पड़ा और चिकित्सा सहायता के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका.

बता दें कि पुलिस द्वारा कथित तौर पर एक लाख रुपये दान स्वरूप दिए जाने पर परिवार का संदेह इस मामले में पुलिस पर और बड़ गया.

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