'मातोश्री' को जेल बनाने की थी तैयारी...' : भुजबल ने के.पी. रघुवंशी के आरोपों को नकारा, बताई 25 साल पुरानी कहानी

रघुवंशी के आरोपों पर भुजबल ने मंगलवार को नासिक में पलटवार किया. भुजबल का कहना था कि ठाकरे के खिलाफ फाईल तत्कालीन पुलिस कमिश्नर एम.एन.सिंह ने ही भेजी थी. चूंकि ये कार्रवाई श्रीकृष्ण कमीशन की रिपोर्ट पर कानूनी प्रकिया का हिस्सा थी इसलिये उनकी ओर से दबाव डालने का आरोप गलत है.

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  • छगन भुजबल और पूर्व आईपीएस के.पी.रघुवंशी के बीच शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को लेकर विवाद शुरू हुआ.
  • रघुवंशी ने अपनी जीवनी में आरोप लगाया कि भुजबल ने बिना सबूत ठाकरे को गिरफ्तार करने का दबाव डाला था.
  • भुजबल ने कहा कि उन्होंने ठाकरे को कोई असुविधा न हो, इसलिए सरकार उनके घर को जेल में बदलना चाहती थी.
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मुंबई:

महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल और पूर्व आईपीएस अधिकारी के.पी.रघुवंशी के बीच जुबानी जंग शुरू हो गयी है. रघुवंशी ने अपनी जीवनी “ट्रबलशूटर” में आरोप लगाया है कि जब वे स्पेशल टास्क फोर्स के सदस्य थे तब भुजबल उनपर बिना सबूत के भी शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे को गिरफ्तार करने का दबाव डालते थे और उन्हें अपमानित करते थे. भुजबल का कहना है कि उनकी ओर से ऐसा कोई दबाव नहीं थी, उलटा वे चाहते थे कि कानूनी मामले में ठाकरे को कोई असुविधा न हो और इसीलिये सरकार ठाकरे के घर को ही जेल में तब्दील करना चाहती थी.

अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मुंबई में भडके सांप्रदायिक दंगों की जांच के लिये महाराष्ट्र सरकार ने श्रीकृष्ण कमीशन गठित किया था. कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में दंगों के दौरान हिंसा फैलाने के लिये बाल ठाकरे को दोषी करार दिया और बताया कि ठाकरे किसी मिलिट्री जनरल की तरह अपने शिव सैनिकों को हिंसा करने का आदेश दे रहे थे. श्रीकृ.ण कमीशन की ओर से दोषी माने गये लोगों पर आपराधिक मुकदमा चलाने के लिये महाराष्ट्र सरकार ने आई.पी.एस अफसर के.पी.रघुवंशी की अगुवाई में एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित किया था.

रघुवंशी ने जीतेंद्र दीक्षित द्वारा लिखित किताब “ट्रबलशूटर” में दावा किया कि भुजबल की ओर से उन्हें ठाकरे को गिरफ्तार करने के लिये दबाव डाला जा रहा था, क्योंकि भुजबल को ठाकरे से पुराना हिसाब चुकता करना था. ऱघुवंशी के मुताबिक टास्क फोर्स के कानूनी सलाहकार ने सबूतों के अभाव में उन्हें ठाकरे को गिरफ्तार न करने की हिदायत दी. जो लोग ठाकरे को हिंसा का आदेश देते वक्त कथित चश्मदीद थे, वे टास्क फोर्स के सामने अपना बयान दर्ज कराने आये ही नहीं. ऐसे में ठाकरे के खिलाफ अदालत में मामला नहीं टिकता.

रघुवंशी के आरोपों पर भुजबल ने मंगलवार को नासिक में पलटवार किया. भुजबल का कहना था कि ठाकरे के खिलाफ फाईल तत्कालीन पुलिस कमिश्नर एम.एन.सिंह ने ही भेजी थी. चूंकि ये कार्रवाई श्रीकृष्ण कमीशन की रिपोर्ट पर कानूनी प्रकिया का हिस्सा थी इसलिये उनकी ओर से दबाव डालने का आरोप गलत है. भुजबल ने सफाई दी कि उलटे उन्होने कमिशनर सिंह को कहा थी कि वे ठाकरे को तकलीफ नहीं देना चाहते. अदालत में पुलिस उनकी जमानत अर्जी का विरोध न करे. फिर भी अगर तकनीकी कारणों से जमानत खारिज हो जाती है तो ऐसी स्थिति में उन्हें गिरफ्तार करके उन्हीं के बंगले मातोश्री में रखा जाये और उसे जेल घोषित कर दिया जाये.

इस पर रघुवंशी का कहना है कि भुजबल दो अलग-अलग मामलों का घालमेल कर रहे हैं. ऱघुवंशी के मुताबिक भुजबल जिस मामले का जिक्र कर रहे हैं वो ठाकरे की ओर से भडकाऊ लेख लिखने का मामला था. उस मामले में सरकार की मंजूरी लगती थी. जुलाई 2000 में ठाकरे को उस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन मंजूरी मिलने में देरी के कारण कुछ मिनटों में मुकदमा खत्म कर दिया गया और ठाकरे रिहा हो गये. श्रीकृष्ण कमीशन वाला मामला (जो रघुवंशी के आधीन था.) उसमें भुजबल के पास फाईल भेजने की जरूरत ही नहीं थी.

1999-2000 के विधान सभा चुनाव के घोषणापत्र में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ने ऐलान किया था कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो श्रीकृष्ण कमीशन की ओर से दोषी माने गये लोगों के खिलाफ मुकदमें चलाये जायेंगे. इसी चुनावी वादे को पूरा करने का दबाव सरकार पर था लेकिन रघुवंशी कानूनी सलाह का हवाला देकर ठाकरे को गिरफ्तार नहीं कर रहे थे जिन्हें कि सरकार जेल भेजना चाहती थी.

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