10 साल बाद बदला चुनावी नतीजा: मद्रास हाई कोर्ट का फैसला, 2016 में हारने वाले DMK नेता अप्पावु ने जीता था चुनाव

तमिलनाडु के 2016 विधानसभा चुनाव में राधापुरम सीट से असल में डीएमके नेता एम. अप्पावु की जीत हुई थी. 10 साल बाद मद्रास हाई कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है.

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डीएमके नेता एम. अप्पावु. (फाइल फोटो)
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  • मद्रास हाई कोर्ट ने 2016 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एम. अप्पावु को विजेता घोषित किया है
  • कोर्ट ने AIADMK के आई. एस. इनबादुराई की जीत को अमान्य मानते हुए अप्पावु को विधायक दर्ज करने का आदेश दिया
  • दोबारा गिनती में 203 विवादित पोस्टल बैलेट में से 153 वोट अप्पावु के पक्ष में सही पाए गए हैं
चेन्नई:

इंसाफ मिलने में देरी भले ही हो लेकिन मिलता जरूर है... ऐसा ही कुछ तमिलनाडु में हुआ है, जहां 10 साल बाद एक हारे हुए उम्मीदवार को मद्रास हाई कोर्ट ने विजेता माना है. तमिलनाडु के सबसे कड़े मुकाबले वाले विधानसभा चुनावों में से एक में हार घोषित किए जाने के लगभग एक दशक बाद, तमिलनाडु के पूर्व स्पीकर और DMK नेता एम. अप्पावु को आखिरकार कानूनी जीत मिल गई है. एक ऐतिहासिक फैसले में, मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अप्पावु ने असल में 2016 का विधानसभा चुनाव राधारापुरम सीट से जीता था, और AIADMK उम्मीदवार आई. एस. इनबादुराई की जीत को पलट दिया.

जस्टिस जी. जयचंद्रन ने फैसला सुनाया कि इनबादुराई का चुनाव अमान्य था और निर्देश दिया कि अप्पावु को 2016-2021 के विधानसभा कार्यकाल के लिए आधिकारिक तौर पर निर्वाचित विधायक के रूप में दर्ज किया जाए. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि उस अवधि के लिए एक विधायक को मिलने वाले सभी लाभ अप्पावु को दिए जाएं और राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे सरकारी रिकॉर्ड में राधारापुरम से निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में उनका नाम शामिल करें.

राहत महसूस करते हुए अप्पावु ने NDTV से कहा, "मैं खुश हूं कि न्याय की जीत हुई है. यह एक साहसी फैसला है."

क्या था पूरा मामला?

यह कानूनी लड़ाई तिरुनेलवेली जिले के राधारापुरम सीट में 2016 के विधानसभा चुनाव से जुड़ी है. 2016 में इनबादुराई को 49 वोटों के मामूली अंतर से विजेता घोषित किया गया था. इस नतीजे को चुनौती देते हुए अप्पावु ने हाई कोर्ट का रुख किया और आरोप लगाया कि काउंटिंग की प्रक्रिया में अनियमितताएं थीं, खासकर पोस्टल बैलेट और काउंटिंग के 19वें, 20वें और 21वें राउंड के दौरान दर्ज किए गए वोटों में.

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2019 में, हाई कोर्ट ने EVM वोटों और पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती का आदेश दिया. हालांकि, यह प्रक्रिया लंबी कानूनी लड़ाई में उलझ गई, क्योंकि इनबादुराई ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों में दोबारा गिनती के आदेश को चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा गिनती की अनुमति दे दी लेकिन चुनाव अधिकारियों को नतीजे घोषित करने से रोक दिया. इस कारण नतीजे सालों तक गुप्त ही रहे.

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हाई कोर्ट ने क्या कहा?

जब तक यह मामला हाई कोर्ट में वापस आया, तब तक दो और विधानसभा चुनाव - 2021 और 2026 में - पूरे हो चुके थे. यह देखते हुए कि चुनाव से जुड़ा विवाद अनिश्चित काल तक अनसुलझा नहीं रह सकता, कोर्ट ने दोबारा गिनती के निष्कर्षों की जांच की और एक दशक से चली आ रही इस कानूनी लड़ाई को खत्म कर दिया. 

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दोबारा गिनती से पता चला कि 203 विवादित पोस्टल बैलेट में से 153 वोट अप्पावु के पक्ष में सही पाए गए, जबकि 44 वोट रद्द कर दिए गए. संशोधित नतीजों के अनुसार, अप्पावु 104 वोटों से चुनाव जीत गए.

इस फैसले ने इस विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास पूरी तरह से बदल दिया है. अप्पावु ने 2021 का विधानसभा चुनाव भी जीता और तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर बने. दूसरी ओर, इनबादुराई राजनीति में सक्रिय रहे और 2025 में AIADMK ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया.

इनबादुराई का क्या होगा अब?

हालांकि अदालत ने यह माना कि इनबादुराई को विधायक के तौर पर पहले ही दिए जा चुके वेतन और भत्तों को वापस लेना अव्यावहारिक होगा, क्योंकि उन्होंने उस पद के कर्तव्यों का पालन किया था. लेकिन माना जा रहा है कि इस फैसले के कारण उन्हें इस विधानसभा कार्यकाल से जुड़ी पेंशन नहीं मिलेगी.

अप्पावु के लिए, यह फैसला दस साल लंबी लड़ाई का अंत है, और यह एक ऐसा दुर्लभ उदाहरण है जहां राजनीतिक लड़ाई खत्म होने के काफी समय बाद चुनाव के नतीजों को न्यायिक रूप से सुधारा गया है. इनबादुराई ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

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