- मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण देश में एलपीजी की कमी से कई रेस्टोरेंट और रेहड़ी-पटरी की दुकानें बंद हो रही हैं.
- भारत की एलपीजी की लगभग 60 प्रतिशत जरूरत विदेशी आयात से पूरी होती है, जिसका अधिकांश हिस्सा हार्मुज मार्ग से है.
- ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को बंद करने से भारत में एलपीजी और तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है.
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण देश में LPG की कमी देखने को मिल रही है. कई जगहों पर रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं, तो कई लोगों को बुकिंग के बाद सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. मयूर विहार में लिट्टी-चोखा की दुकान लगाने वाले रौशन यादव ने कहा कि 10 तारीख से दुकान बंद कर दी, क्योंकि गैस नहीं है. ब्लैक में गैस लेने गए तो 600 रुपये प्रति किलो मिल रही है. जितनी कमाई नहीं होती, उससे ज्यादा महंगी गैस भरवाकर कैसे काम कर पाऊंगा.
रौशन यादव ने कहा कि 400 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गैस भरवाकर दुकान खोली थी और 10 रुपये दाम बढ़ा दिए थे. अब ग्राहक आते हैं तो महंगे दाम सुनकर सवाल करते हैं. “हम क्या करें? जब हमें सस्ती गैस मिलेगी, तो हम भी रेट कम कर देंगे,” वह कहते हैं.
यह सिर्फ यादव की समस्या नहीं है. हजारों रेहड़ी-पटरी और रेस्टोरेंट चलाने वाले इस परेशानी का सामना कर रहे हैं. दिल्ली के शास्त्री भवन के पास करीब 40 साल से समोसा, कचौड़ी और चाय की दुकान चलाने वाले आशु कहते हैं कि गैस नहीं मिल पा रही है, इसलिए कमर्शियल गैस की जगह कहीं से घरेलू गैस का इस्तेमाल कर दुकान चला रहे हैं, ताकि रोजी-रोटी चल सके.
आशु बताते हैं कि उन्होंने भी दाम बढ़ा दिए हैं और बिक्री में थोड़ी कमी आई है. सरकार कह रही है कि कमर्शियल एलपीजी गैस मिलनी शुरू हो गई है, इस पर वह कहते हैं कि अभी तक उन्हें गैस नहीं मिली है. “यह हमारा आखिरी सिलिंडर है. इसके खत्म होने के बाद दुकान बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा,” वे कहते हैं. जो दुकानदार अभी खाने-पीने की दुकान चला रहे हैं, उन्होंने अपने दाम बढ़ा दिए हैं.
दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हार्मुज का रास्ता बंद कर दिया है. इसी रास्ते से खाड़ी देशों से भारत में तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की सप्लाई होती है. भारत अपनी जरूरत का 62 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, जिसमें से लगभग 90 प्रतिशत हार्मुज के रास्ते आता है.
भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, देश में एलपीजी उत्पादन 38 प्रतिशत बढ़ाया गया है. हालांकि, हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं, लेकिन घरेलू एलपीजी की सप्लाई जारी रहेगी. उनके मुताबिक, रोजाना गैस की बुकिंग लगभग 70 लाख थी, जो हाल ही में बढ़कर 89 लाख तक पहुंच गई, जबकि सप्लाई रोजाना 50 से 60 लाख सिलिंडर ही है.
इन हालातों के कब तक बने रहने की संभावना है, यह कहना मुश्किल है. इसलिए सरकार ने लोगों से एलपीजी के अलावा अन्य विकल्पों पर विचार करने को कहा है. गैस सप्लाई प्रभावित होने से कई दुकानें बंद हो गई हैं और इसका असर आम जनता पर महंगाई के रूप में पड़ रहा है. लोकल सर्किल्स के एक ताजा सर्वे के मुताबिक, हर दो में से एक ग्राहक ने कहा है कि रेहड़ी और रेस्टोरेंट्स ने दाम बढ़ा दिए हैं. रेहड़ी वालों ने पिछले एक हफ्ते में 10–25 प्रतिशत तक दाम बढ़ाए हैं, जबकि रेस्टोरेंट्स ने करीब 25 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ाई हैं, सर्वे में शामिल 57 प्रतिशत लोगों ने बताया कि ऑनलाइन और रेस्टोरेंट में खाने के दौरान उन्हें बढ़े हुए दाम चुकाने पड़े, वहीं 54 प्रतिशत लोगों ने कहा कि रेहड़ी पर खाने का खर्च भी पिछले एक सप्ताह में बढ़ गया है. यह सर्वे 38 हजार लोगों के बीच किया गया.
युद्ध के कारण बने ये हालात फिलहाल सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं. हार्मुज में फंसे दो एलपीजी जहाज भारत पहुंच चुके हैं, जो कुल 92.7 हजार मीट्रिक टन गैस लेकर आए हैं. यह मात्रा देश की लगभग एक दिन की जरूरत को ही पूरा कर सकती है. सरकार के मुताबिक, अभी भी फारस की खाड़ी में भारत के 6 एलपीजी जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें करीब 3 लाख मीट्रिक टन गैस है. यह करीब 3.5 से 4 दिन की जरूरत को ही पूरा कर सकता है. ऐसे में यह संकट अभी जारी रहने की संभावना है.
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