अर्थ आवर पर उत्तराखंड और राजस्थान के मुख्यमंत्री आवास पर एक घंटे तक सभी लाइटें बंद रखी गईं. राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय एवं निवास पर अर्थ आवर के तहत एक घंटे बिजली बंद रही. मुख्यमंत्री कार्यालय एवं निवास पर शनिवार रात को 8.30 बजे से 9.30 बजे तक एक घंटे के लिए बिजली बंद रखी गई. इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय एवं निवास में सभी लाइट्स एवं उपकरण बंद रहे और कार्मिकों ने मोमबत्ती की रोशनी में कार्य किया.
रात 8:30 बजे से 9:30 बजे लाइटें बंद
वहीं उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी के आवास पर बिजली बंद रखी गई. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अर्थ आवर के अवसर पर शासकीय आवास पर रात्रि 8:30 बजे से 9:30 बजे तक एक घंटे के लिए सभी गैर-जरूरी लाइटें बंद कर इस वैश्विक पर्यावरणीय अभियान में सहभागिता की.
उत्तराखंड के सीएम खुद अपने घर की लाइट बंद किए.
सरकारी कार्यालयों में भी बिजली बंद रखी
उन्होंने आगे लिखा कि यह पहल हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का स्मरण कराती है और ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण संतुलन तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति हमारे संकल्प को और मजबूत करती है. आइए, हम सभी मिलकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें और एक जिम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य निभाएं. इसके साथ ही दिल्ली की तमाम ऐतिहासिक इमारतों, सरकारी कार्यालयों में भी बिजली बंद रखी गई. इंडिया गेट, अक्षरधाम मंदिर समेत तमाम जगहों पर एक घंटे के लिए सभी लाइटें बंद रखी गईं.
यह कदम अर्थ आवर 2026 के तहत उठाया जा रहा है, जिसमें लोगों और संस्थाओं से गैर-जरूरी लाइटें बंद करने की अपील की जाती है, ताकि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके.
2007 में सिडनी से हुई थी शुरुआत
इस साल अर्थ आवर अपने 20 साल पूरे कर रहा है और इसकी थीम 'गिव एन ऑवर फॉर अर्थ' रखी गई है, जिसका मतलब है कि लोग पृथ्वी के लिए एक घंटा समर्पित करें. यह अभियान हर साल वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड द्वारा आयोजित किया जाता है. इसकी शुरुआत 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से हुई थी और अब यह दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है.
सार्वजनिक स्थल और घरों में लाइट बंद
इस दौरान भारत और दुनियाभर के कई प्रसिद्ध भवन, सार्वजनिक स्थल और घरों में लाइट बंद रखी गई, ताकि लोगों का ध्यान पर्यावरण संरक्षण की ओर जाए. पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अर्थ आवर सिर्फ एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि हमें ऊर्जा की बचत करनी चाहिए और पर्यावरण को बचाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए.
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