भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा है. दो साल बाद लड़ाकू विमानों की डिलीवरी नहीं दे पाने पर अब रक्षा मंत्रालय सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पर जुर्माने लगाने की तैयारी कर रहा है. कारण है कि कंपनी अब तक वायुसेना को एक भी LCA तेजस Mk1A लड़ाकू विमान डिलीवर नहीं कर पाई है.
HAL को दो साल पहले ही LCA तेजस Mk1A डिलीवर करना था, लेकिन अब तक वायुसेना को ये मिल नहीं पाए हैं.. कंपनी का दावा है कि अमेरिका से इंजन नहीं मिल पाने की डिलीवरी नहीं हो पाई.
इस मामले पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दखल दिया था. इंजन की सप्लाई में देरी का मुद्दा इतना गंभीर हो गया था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कई बार इस मामले को अमेरिकी रक्षा मंत्री के आगे भी उठाया था.
2021 में हुआ था समझौता
रक्षा मंत्रालय ने साल 2021 में HAL के साथ 83 LCA तेजस Mk1A को लेकर समझौता किया था. इस डील की कीमत 45,696 करोड़ रुपये थी. इन 83 विमानों में से 73 लड़ाकू विमान और 10 ट्रेनर विमान शामिल हैं.
समझौते के तहत, HAL को फरवरी 2024 से विमानों की डिलीवरी शुरू करनी थी. हर साल HAL को करीब 8 विमान की डिलीवरी करनी थी. लेकिन अब तक वायुसेना को एक भी विमान नहीं मिला है.
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क्यों नहीं हुई अब तक डिलीवरी?
HAL का कहना है कि डिलीवरी में देरी की सबसे वजह इंजन की सप्लाई में हुई समस्या है. अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक को तेजस Mk1A के लिए F404-IN20 इंजन देने हैं. लेकिन अमेरिकी कंपनी तय समय पर इंजन की डिलीवरी नहीं कर सकी.
जानकारी के मुताबिक, 2021 में 99 इंजनों की खरीद का समझौता हुआ था. अप्रैल 2023 से इनकी डिलीवरी शुरू होनी थी. लेकिन अप्रैल 2026 तक सिर्फ 6 इंजन ही भारत पहुंचे हैं.
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विमान तैयार, लेकिन डिलीवरी नहीं
HAL का कहना है कि 5 LCA तेजस Mk1A विमान पूरी तरह तैयार हैं. इसके अलावा, 9 विमान और बन चुके हैं और उनकी टेस्टिंग भी हो चुकी है. हालांकि, इनमें टेस्टिंग वाले इंजन लगे हैं, जिन्हें बाद में GE के F404-IN20 इंजन से बदला जाना है.
इसके बावजूद अभी तक किसी भी विमान को औपचारिक रूप से वायुसेना को नहीं सौंपा गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 20 तेजस Mk1A एयरफ्रेम पूरी तरह तैयार हैं. लेकिन इनमें इंजन नहीं लगे हैं. इसी वजह से ये विमान HAL की फैक्ट्री में खड़े हुए हैं और डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं.
वायुसेना की योजनाओं पर असर
तेजस Mk1A भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण का अहम हिस्सा है. इन विमानों की देरी से वायुसेना की नई स्क्वाड्रन बनाने और पुराने लड़ाकू विमानों को बदलने की योजना प्रभावित हो रही है. HAL से यह फाइटर जेट वायुसेना को कब मिलेंगे? अभी तक यह बात न तो रक्षा मंत्रालय बता पाने की स्थिति में हैं और न ही वायुसेना.
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