कर्नाटक HC के फैसले के बाद से 17 हजार छात्राएं हुईं प्रभावित : हिजाब मामले की सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील

जस्टिस गुप्ता ने कहा कि हम रिपोर्ट्स के बारे में कुछ नहीं कहना चाहते. हम नहीं मानते. बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट के सामने कभी ड्रॉप आउट रेट का मुद्दा नहीं उठाया गया. आप पहली बार बहस कर रहे हैं. 

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हिजाब पहनने पर उठे विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हुई
नई दिल्ली:

हिजाब पहनने पर उठे विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट में हिजाब बैन को लेकर सुनवाई के दौरान मुस्लिम याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील हुजैफा अहमदी ने PUCL संगठन की रिपोर्ट का हवाला दिया.  अहमदी ने आधार पर दावा किया कि कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के बाद से 17 हजार छात्राओं प्रभावित हुई हैं और उन्होंने या तो स्कूल छोड़ दिया या परीक्षा नहीं दी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ' PUCL ' रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार किया. कहा कि  हम रिपोर्ट के बारे में कुछ नहीं कहना चाहते. हम इसे स्वीकार नहीं करते 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि मार्च के फैसले का क्या प्रभाव पड़ा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि हजारों मुस्लिम छात्राएं  हिजाब बैन के कारण परीक्षा में नहीं हुईं .  हुज़ेफ़ा अहमदी ने कहा हिजाब पर प्रतिबंध के कारण बड़ी संख्या में ड्रॉप आउट हुए और हजारों मुस्लिम छात्राएं  परीक्षा में शामिल नहीं हुईं.  

जस्टिस धूलिया ने कहा कि ये फैसला मार्च 2022 का  है. क्या आपको लगता है कि कोई प्रामाणिक अध्ययन हो सकता है? अहमदी ने कहा कि रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉलेजों द्वारा हिजाब पर प्रतिबंध, सरकार की अधिसूचना और कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में, राज्य भर में हजारों मुस्लिम लड़कियों को शिक्षा तक पहुंच से वंचित कर दिया गया और बड़ी संख्या मेंलोग अपनी परीक्षाओं में बैठने में असमर्थ थे. 

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जस्टिस गुप्ता ने कहा कि हम रिपोर्ट्स के बारे में कुछ नहीं कहना चाहते. हम नहीं मानते. बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट के सामने कभी ड्रॉप आउट रेट का मुद्दा नहीं उठाया गया. आप पहली बार बहस कर रहे हैं . 

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अहमदी ने कहा कि फैसले के प्रभाव पर फैसले से पहले बहस नहीं की जा सकती थी. छात्रों का यह विशेष वर्ग, जो मदरसों तक ही सीमित था, रूढ़ियों से बाहर निकल कर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा में शामिल हो गया था. आज, यदि आप उसे एक आवश्यक अभ्यास के रूप में लेते हैं, तो क्या प्रभाव होगा. उन्हें मदरसों में वापस जाने के लिए मजबूर किया जाएगा. 

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